kitabon ki duniya

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इंग्लिश में प्रकाशित ऐसी किताबों के बारे में जो हाल में चर्चा में रही, समय समय पर किताबों की दुनिया लेकर आऊंगा.
पाकिस्तान की राजनीति का दूसरा चेहरा
अंग्रेजी उपन्यास लेखन के क्षेत्र में भारतीय उपन्यासकारों का दबदबा पहले से कम होता जा रहा है। हाल के बरसों में पाकिस्तान-अफगानिस्तान मूल के कुछ लेखकों ने इस क्षेत्र में जबर्दस्त उपस्थिति दर्ज की है। कुछ साल पहले अफगानिस्तान मूल के लेखक खालिद होसैनी के उपन्यासों द काइट रनर और ए थाउजेंड स्प्लेंडिड सन की विश्वव्यापी चर्चा हुई थी। पिछले साल पाकिस्तान मूल के अंग्रेजी लेखक मोहम्मद हनीफ के प्रथम उपन्यास ए केस ऑफ एक्सप्लोडिंग मैंगोज(मामला विस्फोटक आमों का) की जबर्दस्त चर्चा रही। उपन्यास में पाकिस्तान के सैनिक तानाशाह जनरल जिया उल हक की मृत्यु से जुड़ी परिस्थितियों को कथा का आधार बनाया गया है। उनकी मृत्यु के बीस सालों बाद भी यह गुत्थी अनसुलझी ही है कि जिस विमान दुर्घटना ने जनरल जिया के ग्यारह साल की तानाशाही का अंत कर दिया था वह स्वाभाविक थी या उसके पीछे कोई गहरी साजिश थी। लेखक ने उपन्यास में इस सवाल का जवाब अपने ढंग से देने का प्रयास किया है।
१७ अगस्त १९८८ को पंजाब सूबे के बहावलपुर में एक टैंक प्रदर्शनी देखने के बाद पाकिस्तानी राच्च्ट्रपति का विमान पाक वन(सी-१३० हरक्यूलीस) कुछ अन्य पाकिस्तानी जनरलों और पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूत आर्नोल्ड राफेल को लेकर वापस राजधानी इस्लामाबाद के लिए उड़ा। लेकिन कुछ देर में ही विमान हवा में कलाबाजियां खाने लगा और उसके टुकडे-टुकडे हो गए। जिया उल हक समेत विमान में सवार सभी यात्री मारे गए। विमान दुर्घटना की जांच का कोई ठोस परिणाम आज तक सामने नहीं आ पाया। अमेरिकी जांच एजेंसियों की रपट में जो भी कहा गया हो पाकिस्तान का अवाम यह मानता है कि वह विमान दुर्घटना वास्तव में जिया उल हक की हत्या की किसी गहरी साजिश का नतीजा थी। अलबत्ता उस साजिश को लेकर तरह-तरह की कहानियां प्रचलित हैं। जिनका इस उपन्यास में लेखक ने जिक्र किया है, जिनको लेखक ने कथा का आधार बनाया है।
इस दुर्घटना के अनेक संभावित साजिशकर्ता माने जाते हैं। एक, पाकिस्तानी सेना के नाराज अधिकारी, दो, जिया उल हक से ऊबी हुई अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए, भारतीय खुफिया तंत्र, पूर्व राष्टपति जुल्फिकार अली भुट्‌टो का बेटा मुर्तजा भुट्‌टो, जिनका तखतापलट कर जिया उल हक ने पाकिस्तान की सत्ता हथियाई थी, तत्कालीन सोवियत संघ की खुफिया एजेंसी केजीबी। लेकिन अगर लेखक उपन्यास में साजिश की इन्हीं संभावनाओं तक सिमटकर रह जाता तो यह उपन्यास कम खोजपूर्ण पत्रकारिता का नमूना अधिक प्रतीत होता। केस ऑफ एक्सप्लोडिंग मैंगोज में लेखक ने इस साजिश के अनेक सूत्रधारों की कल्पना की है, अनेक संभावित पात्रों का सृजन किया है जिनका इस साजिश में हाथ रहा हो। इससे न केवल उपन्यास की कथा में रोचकता पैदा हुई है बल्कि एक धर्मभीरु तानाशाह की तथाकथित हत्या की परिघटना को व्यापक परिप्रेक्ष्य में समझने में मदद भी मिलती है।
विमान दुर्घटना का एक साजिशकर्ता है उपन्यास का कथावाचक अली शिगरी, जो पाकिस्तान की सेना में जूनियर अंडर अफसर है। उसे संदेह है कि उसके पिता कर्नल कुली शिगरी की हत्या जनरल जिया के इशारों पर की गई थी। वह अपने मित्र और प्रेमी ओबैद के साथ मिलकर षड्‌यंत्र रचता है और जहर बुझी तलवार की नोक से छूकर जनरल जिया की हत्या की योजना तैयार करता है। वह उस अभिशप्त विमान में भी सवार होता है लेकिन किसी चमत्कारवश बच जाता है- उस तानाशाह की हत्या की दास्तान सुनाने के लिए जिसने कानून के शासन के स्थान पर धर्म के शासन की सत्ता स्थापित की, उस धार्मिक कट्‌टरता को पनाह दी जिसकी कोख से मुस्लिम आतंकवाद का जन्म हुआ। लेकिन उपन्यास की कथा में वह अकेला साजिशकर्ता नहीं है।
विमान उड़ने से कुछ देर पहले ही एक फौजी जनरल के कहने पर पाक वन के पायलट केबिन में आम की कुछ पेटियां लादी जाती हैं जिनमें एक ऐसा गैस होता है जिसके प्रभाव में आकर जहाज के पायलटों की मौत हो जाती है और दुनिया के सबसे मजबूत जहाजों में से एक माना जाने वाला सी-१३० हरक्यूलीस कलाबाजियां खाते हुए गिर जाता है। एक अन्य कहानी के अनुसार जनरल जिया की मौत का कारण बना विधवा जैनब का शाप, जिसका सामूहिक बलात्कार हुआ था और जिसे इस्लामी कानून के मुताबिक पत्थरों से मारे जाने की सजा मिली थी। उसने शाप दिया था कि उस आदमी को कीडे खाएं जिसने उसे दरबदर किया और उसके घरवाले मरने के बाद उसका चेहरा भी न देख पाएं। पाकिस्तान में एक कहावत है जिसके अनुसार कोई अभिशाप तभी फलित होता है जब शाप देने वाला किसी कौवे को भरपेट खिलाकर वह शाप सुनाए और वह कौवा शापग्रस्त व्यक्ति तक उस शाप को लेकर पहुंच जाए। कहते हैं कि कौवे की स्मृति नब्बे साल तक रहती है।
साजिशकर्ताओं में सेना के अनेक बड़े अफसर भी शामिल थे। उपन्यास की कथा आरंभ होती है जनरल जिया की दुर्घटना में मृत्यु से कुछ महीने पहले के घटनाक्रमों के साथ जब जनरल जिया को ऐसा महसूस होता है कि अल्लाह ने कुरान के माध्यम से उसके पास यह संदेश भेजा है कि उसकी जान खतरे में है और वह अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च श्रेणी कोड रेड तक बढाने का आदेश देता है। वह रोज सुबह उठकर ऐसे कुरान पढता है जैस अपनी जन्मपत्री पढ रहा हो। उपन्यास की कथा के दो सूत्र हैं- अली शिगरी द्वारा सुनाई जा रही साजिश-कथा और अन्य पुरुष में मरने से कुछ महीने पहले से लेकर अंत तक जिया उल हक के जीवन से जुडी कथाएं। लेकिन इस उपन्यास का महत्व केवल इसी कारण रेखांकित नहीं किया जा सकता कि इसमें एक तानाशाह की मौत से जुडी गुत्थी को सुलझाने का प्रयास किया गया है।
वास्तव में इस उपन्यास के निहितार्थ भिन्न हैं जो ए केस ऑफ एक्सप्लोडिंग मैंगोज की कथा को प्रासंगिक बनाते हैं। उपन्यास में लेखक ने बडे सूक्ष्म तरीके से यह दिखाने का प्रयास किया है कि किस तरह जनरल जिया के काल में पाकिस्तानी शासन में धर्म की भूमिका बढी, किस तरह जिहाद की भूमिका पाकिस्तान की भूमि पर तैयार हुई। लेखक ने इस कथा के द्वारा यह दिखाने का प्रयास भी किया है कि अफगान युद्ध के दौरान अमेरिका ने रूस के खिलाफ अफगान मुजाहिदीन तैयार करने के लिए जिया की हरसंभव सहायता की और उनका भरपूर इस्तेमाल भी किया।
उपन्यास में एक सीन अमेरिकी राजदूत आर्नोल्ड राफेल के घर पर अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस चार जुलाई १९८८ को आयोजित भोज का है। आमंत्रित अतिथियों में एक दाढ़ीवाला अरब युवक भी होता है। जिसका नाम उपन्यास में ओबीएल(ओसामा बिन लादेन का संक्षिप्त रूप) बताया गया है और जो लादेन एंड कंपनी के लिए काम करता है। पार्टी में सभी मौजूद लोग उससे बडे खुलुस से मिलते हैं। सीआईए का स्थानीय प्रमुख उसकी पीठ थपथपाते हुए कहता है-बहुत अच्छे। इसी तरह काम करते रहो। इस सीन के माध्यम से लेखक मानो यह संकेत करना चाहता है कि वास्तव में मुस्लिम आतंकवाद का जनक अमेरिका ही रहा है। उपन्यास में इस तरह के अनेक संदर्भ आते हैं जो इसकी कथा को समकालीन संदर्भों में महत्वपूर्ण बनाते हैं।
यह कोई महान उपन्यास नहीं है। लेकिन पाकिस्तानी राजनीति और समाज की जटिलताओं को समझने में इसकी कथा मदद करती है। उपन्यास में लेखक ने एक स्थान पर लिखा है कि अपराधी अपराध को अंजाम देते हैं और निर्दोष सजा के भागी बनते हैं। ऐसे देश में हम रहते हैं। उपन्यास की कहानी का संदर्भ भले बीस साल पुराना हो मगर वहां के हालात आज भी वैसे ही हैं। लेखक ने बडे रोचक ढंग से यह हैरतनाक कथा कही है। शायद इसी कारण पिछले साल सबसे अधिक बिकने वाले अंग्रेजी उपन्यासों में ए केस ऑफ एक्सप्लोडिंग मैंगोज की धूम रही।
पुस्तक- ए केस ऑफ एक्सप्लोडिंग मैंगोज, लेखक- मोहम्मद हनीफ, प्रकाशक- रैंडम हाउस इंडिया, मूल्य- ३९५ रुपए।

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