जे.एम. कोएत्जी का उपन्यास ‘समरटाइम’ और लेखक का जीवन

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2009 में जे. एम. कोएत्जी के उपन्यास ‘समरटाइम’ पर लिखा था. लेखक के जीवन की निस्सारता को लेकर एक अच्छा उपन्यास है- प्रभात रंजन

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स्पेनिश भाषा के कद्दावर लेखक मारियो वर्गास ल्योसा ने अपनी पुस्तक लेटर्स टु ए यंग नॉवेलिस्ट में लिखा है कि सभी भाषाओं में दो तरह के लेखक होते हैं- एक वे जो अपने समय में प्रचलित भाषा और शैली के मानकों के अनुसार लिखते हैं, दूसरी तरह के लेखक वे होते हैं जो भाषा और शैली के प्रचलित मानकों को तोड़कर कुछ एकदम नया रच देते हैं। अंग्रेजी उपन्यासकार जेम्स मैक्सवेल कोएट्‌जी(जे. एम. कोएट्‌जी) इस परिभाषा के अनुसार दूसरी कोटि के लेखक कहे जा सकते हैं। उनके नवीनतम उपन्यास समरटाईम के संदर्भ में इस कथन को देखा जा सकता है। नोबेल पुरस्कार प्राप्त एक गल्पकार की जीवनी के रूप में लिखे जा रहे इस उपन्यास में यह सवाल महत्वपूर्ण ढंग से उभरकर सामने आता है कि आखिर तथ्य और गल्प का क्या रिश्ता होता है? किस प्रकार लेखक की कला तथ्य को गल्प-कथा में रूपांतरित कर देती है? लेखक ने एकदम नए शिल्प में कथा कहने का प्रयास किया है।
जे. एम. कोएट्‌जी अंग्रेजी के उत्तर-आधुनिक लेखकों में अग्रगण्य कहे जा सकते हैं। प्रचार और प्रसिद्धि के इस दौर में परिदृश्य से ओझल रहने वाले इस लेखक को दो बार बुकर पुरस्कार मिल चुका है और समरटाईम के लिए २००९ में उनको तीसरी बार इस पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया। किसी अन्य लेखक को यह पुरस्कार दो बार नहीं मिला है। यही नहीं २००३ में उनको साहित्य का नोबेल पुरस्कार भी मिल चुका है। लेकिन पुरस्कारों ने न उनके लेखन की भूख को कम किया है न ही उनके प्रयोगों की धार को कुंद किया है। अपने उपन्यासों के कथ्य ही नहीं शिल्प को लेकर वे कितने सजग रहते हैं समरटाईम इसका अच्छा उदाहरण है।
वास्तव में, समरटाईम उनके उस वृहत्‌ त्रयी की आखिरी कड़ी है जिसे उन्होंने स्थानीय जीवन के दृश्य कहकर याद किया है। इस कडी की पहली पुस्तक है १९९७ में प्रकाशित बॉयहुड, जिसमें जॉन नामक चरित्र के जीवन के आरंभिक वर्षों से जुडे दृश्य हैं जब वह केपटाउन में रहता था। २००२ में प्रकाशित इसकी दूसरी कडी यूथ में जॉन नामक वह चरित्र जवान हो जाता है और केपटाउन से लंदन आ जाता है तथा वहां आईबीएम नामक कंपनी में प्रोग्रामर के बतौर काम करने लगता है और लेखक बनने के सपने देखने लगता है। इन दोनों पुस्तकों में एक लेखक के सौंदर्यात्मक और बौद्धिक विकास के आरंभिक चरण को दिखाया गया है। समरटाईम इस श्रृंंखला की सबसे महत्वाकांक्षी पुस्तक कही जा सकती है। रचना के स्तर पर भी और शिल्प के स्तर पर भी। बॉयहुड तथा यूथ में लेखक ने इस विचार को प्रश्नित किया है कि आखिर लेखक द्वारा लिखे गए अपने संस्मरणों की क्या सार्थकता होती है, जबकि समरटाईम में लेखक ने बहुत महत्वपूर्ण ढंग से आत्मकथात्मक लेखन की संभावनाओं एवं परिभाषाओं को परखने का प्रयास किया है, इसलिए एक तरह से इस पुस्तक में लिखा सब कुछ सत्य कहा जा सकता है और कहा जा सकता है कि एक स्तर पर कुछ भी सत्य नहीं क्योंकि पुस्तक का स्वरूप गल्पात्मक है।
उपन्यास में विंसेंट नामक एक अंग्रेज दक्षिण अफ्रीका के उस महान लेखक जॉन कोएट्‌जी की जीवनी लिख रहा है जिनका हाल में ही निधन हो गया है तथा जिनसे वह कभी नहीं मिला था। उपन्यास में वह लेखक जॉन कोएट्‌जी के १९७२-७५ के काल के जीवन को लेकर अनेक स्त्रोतों से शोोध के आधार पर सामग्री इकट्ठा कर रहा है। यह लेखक के जीवन का वह काल है जब वह अमेरिका से लौटकर केपटाउन में अपने बूढ़े पिता के साथ रह रहा था तथा एक अध्यापक एवं लेखक के रूप में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्षरत था। इस दौरान उसका एक उपन्यास डस्कलैंड्‌स प्रकाशित हो चुका है। लेखक जॉन के जीवन के इस काल को पुनर्रचित करने के क्रम में विन्सेंट अनेक स्त्रोतों से सामग्री लेता है। उपन्यास के आरंभ और अंत में लेखक की डायरियों के अंश दिए गए हैं तथा उपन्यास की मूल कथा के रूप में पांच लोगों की भेंटवार्ताएं दी गई हैं जिनका उस दौर में लेखक जॉन से किसी न किसी तरह का संबंध था।
प्रश्न उठता है कि उपन्यास-लेखक जे. एम. कोएट्‌जी एवं कथानायक जॉन कोएट्‌जी में किसी प्रकार की समानता दिखाई देती है? काफी हद तक दोनों के जीवन में समानता दिखाई देती है। दोनों दक्षिण अफ्रीका के हैं, दोनों इंगलैंड और अमेरिका में काफी समय बिताकर अपने देश लौटे, दोनों ने डस्कलैंड्‌स और डिस्ग्रेस जैसे उपन्यास लिखे एवं बॉयहुड और यूथ नामक गल्पात्मक संस्मरण लिखे, दोनों को नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुए। लेकिन दोनों के जीवन में गहरा अंतर यह है कि उपन्यास का कथानायक मर चुका है जबकि लेखक जे. एम. कोएट्‌जी जीवित हैं। बहरहाल, इस प्रकार की स्थूलताओं के आधार पर न इस उपन्यास को पढा जाना चाहिए, न ही इसका यह उद्देश्य है। उपन्यास एक असाधारण मनुष्य़ के साधारण जीवन के बारे में है। जिसकी कथा उन पांच व्यक्तियों की बातचीत से उभरकर आती है जिनसे जॉन कोएट्‌जी नामक कथानायक के जीवनी लेखन के शोोध के दौरान शोोधकर्ता विंसेंट ने बात की है और जिनके साथ उस दौरान कोएट्‌जी के अंतरंग संबंध थे।
उपन्यास में जॉन कोएट्‌जी के जीवन को लेकर पहली बातचीत जूलिया नामक महिला से है, जो पेशे से मनोविश्लेषक है तथा जवानी के दिनों उसका कोएट्‌जी के साथ विवाहेतर संबंध था। दूसरी बातचीत मारगॉट नामक महिला से है, जो दूर के रिश्ते में कोएट्‌जी की बहन है तथा किशोर-जीवन में जिसके साथ कोएट्‌जी की अंतरंगता थी। तीसरी बातचीत एड्रियाना नामक एक नर्तकी से है, जो ब्राजील की रहनेवाली है तथा जब वह केपटाउन में रहती थी तो कोएट्‌जी उसकी बेटी को पढ़ाता था, लेकिन उसका आकर्षण मां की तरफ था। चौथी बातचीत मार्टिन नामक व्यक्ति के साथ है जो १९७२-७५ के दौरान केपटाउन में जॉन के साथ विश्वविद्यालय में पढाता था। पांचवां इंटरव्यू सोफी नामक महिला के साथ है जो उसी विश्वविद्यालय में फ्रेंच पढाती थी जहां जॉन कोएट्‌जी अंग्रेजी पढाते थे। दोनों ने उस दौरान मिलकर अफ्रीकी साहित्य का पाठ्‌यक्रम भी पढाया था तथा इस दौरान दोनों के बीच संबंध भी विकसित हुए। इन पांचों में एक सामान्य बात यह भी है कि इन सबसे कथा-नायक की मुलाकात गर्मियों के दिनों में हुई थी। शायद इसीलिए उपन्यास का नाम लेखक ने समरटाईम रखा है।
इन्हीं पांच लोगों की बातचीत एवं जॉन की अपनी डायरियों के आधार पर विंसेंट ने लेखक के जीवन के उन वर्षों का खाका खड़ा करने की कोशिश की है जब कोएट्‌जी की लेखक के रूप में कोई खास पहचान नहीं बन पाई थी। मार्टिन से बातचीत के दौरान जीवनीकार विंसेंट कहता है कि जीवनी में जीवनीकार को कथा एवं उस व्यक्ति के बारे में लोगों की राय के बीच संतुलन बनाकर रखना चाहिए। वह कहता है कि आज ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो यह बताने के लिए तैयार हैं कि वे कोएट्‌जी के बारे में क्या सोचते हैं- लेकिन किसी की जीवन-कथा को सामने लाने के लिए कुछ इससे अधिक की आवश्यकता होती है। वह उसकी जीवनी लिखने के लिए इतने लोगों से बातचीत क्यों कर रहा है, जब मार्टिन उससे पूछता है तो वह जवाब में कहता है कि उसका उद्देश्य कोएटजी के बारे में किसी प्रकार के अंतिम निर्णय पर पहुंचना नहीं है। वह तो केवल इतना कर रहा है कि उसके जीवन के एक खास दौर की कहानी प्रस्तुत कर रहा है, और कोई कहानी एक कहानी नहीं हो सकती, अनेक अनेक कहानियां होती हैं जो मिलकर एक कहानी बनाती हैं। उपन्यास में इस प्रकार का विमर्श साथ-साथ चलता रहता है।
उपन्यास एक प्रकार से उस नायकत्व के अंत की कथा भी कहता प्रतीत होता है जो आधुनिक उपन्यासों की प्रमुख विशेषता रही है- नायक की संघर्ष-कथा के रूप में उपन्यास। दिलचस्प बात यह है कि जिस लेखक के जीवन की खंड-कथा कहने के उपक्रम के रूप में उपन्यास का ताना-बाना बुना गया है उसका चरित्र ही उपन्यास में सबसे कमजोर दिखाई देता है। एड्रियाना जिससे वह डांस सीखने जाता था, उसे याद करती हुई कहती है कि उसका शरीर लकड़ी के उस पुतले की तरह था जिसे रस्सी से बांधकर झुलाया जाता है, जबकि उसका वास्तविक आत्म कहीं और उससे अलग बैठा हो, जिसे आप नहीं देख सकते, जिस तरह पुतले की रस्सी खींचनेवाले को आप नहीं देख सकते। वह इस बात को नहीं समझ पाती है कि इतना अमानवीय प्रतीत होनेवाला व्यक्ति किस प्रकार महान शखि्सयत हो सकता है… और जो व्यक्ति प्रेम से इतना अनभिज्ञ लगता हो वह एक महान लेखक किस तरह हो सकता है। जूलिया उसे एक ऐसे प्रेमी के रूप में याद करती है जो इतने निर्वैयक्तिक ढंग से संभोग करता था मानो वह स्त्री से नहीं अपने दिमाग में स्त्री की किसी छवि के साथ रतिक्रिया कर रहा हो।
दिलचस्प है कि स्वयं जीवनीकार विंसेंट भी उस महान लेखन के लिखे पर पर उतना भरोसा नहीं करता दिखाई देता जिनकी वह जीवनी लिख रहा है। उपन्यास में सबसे अंत में विंसेंट सोफी से बातचीत करता है। वह बातचीत के दौरान उससे पूछती है कि उसकी डायरियां होंगी? चिट्ठियां होंगी? उसके नोटबुक होंगे? आखिर इंटरव्यू पर ही आप इतना जोर क्यों दे रहे हैं? जवाब में विंसेंट कहता है कि मैंने इसके बारे में सोचा था। लेकिन उनको सच तो नहीं माना जा सकता न। इसलिए नहीं कि वे कोई झूठे थे, लेकिन वे गल्पकार थे। हो सकता है अपने पत्रों, अपनी डायरियों में वे स्वयं अपना कोई चरित्र ही गढ़ रहे हों। वह एक ऐसा नायक साबित होता है जो किसी के लिए विश्वसनीय नहीं था, जिससे उसके जीवन के उस दौर के किसी अंतरंग को कोई उम्मीद नहीं थी।
किसी प्रसिद्ध व्यक्ति की मृत्यु के बाद अनेक लोगों से बातचीत के आधार पर उसके जीवन के रहस्यावरण की तकनीक आर्सन वेल्स की फिल्म सिटिजन केन की तरह प्रतीत होती हो, लेकिन वास्तव में आज के दौर में मनुष्य के क्षरण की कथा कहती भी लगती है, पूंजी के सामने उसका रूप कितना बौना हो गया है इसके अनेक संकेत उपन्यास में आते हैं। उपन्यास के आरंभ में जॉन की डायरी में उसके अपने एक मित्र से बीस साल बाद मिलने का प्रसंग आता है। इन बीस सालों में उसका स्कूल की पढ़ाई में वह फिसड्‌डी दोस्त मार्केटिंग जगत का एक सफल व्यक्ति बन चुका है और वह जिसने अच्छी तरह अंकगणित और लैटिन की पढाई की, एक संघर्षरत बुद्विजीवी। वह टिप्पणी दर्ज करता है कि भौतिक सफलता का रास्ता लैटिन और अंकगणित की पढाई से होकर नहीं गुजरता। आज के दौर में समाज में बुद्धिजीवी की भूमिका कितनी कम होती जा रही है उस पर सटीक टिप्पणी की तरह इसे पढा जा सकता है।
अगर इसे आत्मकथात्मक उपन्यास के रूप में पढ़ा जाए तो यह एक ऐसा आत्मकथात्मक उपन्यास कहा जा सकता है जिसमें आत्म ही सबसे अधिक अविश्वसनीय बनकर उभरता है। उपन्यास इस तकनीक प्रधान-दौर में व्यक्ति के गुम होते जाने की कथा भी कहती है। यह अपने आपमें कथा है और अकथा भी। इसमें एक ऐसी कथा कहने का उपक्रम है जिसका खाका अंत तक स्पष्ट नहीं हो पाता। जे. एम. कोएट्‌जी प्रयोगधर्मी उपन्यास हैं। उनके पिछले उपन्यास एलिजाबेथ कोस्तैलो की कथा पशुधन रक्षण को लेकर दिए गए तीन व्याखयानों के रूप में संयोजित की गई थी। समरटाईम में कथा के भीतर उसकी व्याप्ति, उसके रूपों को लेकर विमर्श भी चलता रहता है।
समरटाईम विधाओं की अंतर्पाठीयता की बेहतरीन मिसाल कही जा सकती है। इसे उपन्यास कहा गया है, उपन्यास के भीतर जीवनी लिखने की तैयारी चल रही है, इसके अनेक प्रसंगों के आधार पर इसे आत्मकथा भी कहा जा सकता है, इसमें डायरियों के अंश हैं, कोएट्‌जी के अनेक उपन्यासों को लेकर टिप्पणियां हैं, उसके एकाकीपन को लेकर टिप्पणियां हैं, लेखक की सामाजिकता को लेकर टिप्पणियां हैं। कथा के केंद्र में जीवन का एक खंड है और उसके इर्द-गिर्द विधाओं की अंतर्पाठीयता का यह पाठ कोलाज की तरह प्रतीत होता है। इसे बुकर पुरस्कार भले न मिल पाया हो लेकिन अपने प्रयोगों के कारण इसे याद रखा जाना चाहिए।
समरटाईम, लेखक- जे.एम कोएट्‌जी,
प्रकाशक- रैंडम हाउस, लंदन
मूल्य- ७०० रूपए।

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