सामंती समाज का पाकिस्तानी चेहरा

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दो साल पहले पाकिस्तानी लेखक दनियाल मुईनुद्दीन और उनके पहले कहानी संग्रह इन अदर रूम्स, अदर वंडर्स की अमेरिका और यूरोप के अंग्रेजीभाषी देशों में जबर्दस्त चर्चा हुई। संग्रह के प्रकाशन से पूर्व उनकी कहानियां ग्रांटा, न्यूयॉर्कर जैसी अंग्रेजी की प्रमुख पत्रिकाओं में प्रकाशित होकर प्रसिद्ध हो चुकी थीं। कहा जा रहा है कि उसकी कहानियों में आर. के. नारायण की कहानियों की तरह परिवेश पर पकड़ दिखाई देती है तो जिस तरह उच्चवर्गीय जीवन का खोखलापन इन कहानियों में दिखाया गया है वह चेखव की याद दिलाता है। 
          उनके इस कहानी संग्रह में अमेरिका और यूरोप के अंग्रेजी प्रकाशकों ने जैसी दिलचस्पी दिखाई वह अप्रत्याशित है। अमेरिका के एक-दो नहीं दस-दस नामचीन प्रकाशक इस पुस्तक को प्रकाशित करना चाहते थे। उनकी रुचि इस पुस्तक में इतनी अधिक थी कि अमेरिका में इसके प्रकाशन अधिकार को लेकर नीलामी करवाई गई। नीलामी में नॉर्टन नामक प्रकाशक ने बीस लाख डॉलर में केवल अमेरिका में पुस्तक के प्रकाशन-अधिकार खरीदे। इंग्लैंड में भी प्रकाशकों की रुचि का कमोबेश यही आलम रहा। वहां भी तीन नामचीन प्रकाषकों ने दिलचस्पी दिखाई। अंततः सलमान रुश्दी की पुस्तकों के प्रकाशक रैंडम हाउस ने मोटी रकम चुकाकर प्रकाशन के अधिकार प्राप्त किए। प्रसंगवष, सलमान रुश्दी ने वर्ष 2008 की प्रमुख अमेरिकी कहानियों के संकलन में इस लेखक की कहानी को भी स्थान दिया था। अंग्रेजी साहित्य की दुनिया में पहले भारतीय मूल के अंग्रेजी लेखक एडवांस में मोटी राशि प्राप्त कर खबरों में छा जाते थे। लेकिन लगता है अब पाकिस्तानी मूल के अंग्रेजी लेखक धीरे-धीरे उनकी जगह लेते जा रहे हैं। दानियाल मुइनुद्दीन पाकिस्तानी अंग्रेजी लेखन का पोस्टर बॉय बन गए हैं.
          कहा जा रहा है कि सलमान रुश्दी के अलावा भारतीय उपमहाद्वीप के किसी और लेखक को लेकर वेस्ट ने ऐसा भरोसा और उत्साह नहीं दिखाया था। वैसे भी किसी लेखक के कहानी-संग्रह को प्रकाशन से पूर्व इतना नाम-दाम शायद ही मिला हो। सहज ही यह जिज्ञासा जगती है कि करीब तीस वर्षीय इस अमेरिका-पलट लेखक की रचनाओं में ऐसा क्या है कि उसे ऐसी अप्रत्याशित प्रसिद्धि और इतना अपार प्रचार-प्रसार मिला। जवाब उनकी कहानियों में ढूंढा जा सकता है। 247 पन्नों के कथा-संग्रह इन अदर रूम्स, अदर वंडर्स में आठ कहानियां हैं। इन कहानियों में लेखक ने पाकिस्तान के यथास्थितिवादी समाज की विडंबनाओं की कुछ झांकियां दिखाई हैं। कहानियों के माध्यम से लेखक मानो यह संकेतित करना चाहता है कि वास्तव में वहां की अराजक राजनीति के लिए वह सामंती समाज ही जिम्मेदार रहा है जिसके संदर्भों से इन कहानियों का ताना-बाना बुना गया है।  
          इन कहानियों के केंद्र में लाहौर के गुलफिशां नामक विशाल हवेली में रहनेवाले के. के. हारुनी नामक एक बुढ़ाते सामंत का देश-विदेश में फैला कुनबा है, उसके नौकर-चाकर हैं, अलग-अलग शहरों-गांवों में बिखरी जमींदारियां हैं, शामों की रंगीनियां हैं और उन सबसे जुड़े अनेक प्रसंग हैं जो इन कहानियों की शक्ल में ढले हैं। लेकिन आरंभ में ही इस बात को मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि यह संग्रह किसी एक परिवार से जुड़ी कहानियों का समुच्चय नहीं है। कह सकते हैं कि के. के. हारुनी एक प्रतीक हैं- उस सामंती समाज का जिसके कारण पाकिस्तान में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत नहीं हो पाईं, जिसके कारण वहां तानाशाही के लंबे-लंबे दौरों के बावजूद न तो किसी प्रकार के सामाजिक आंदोलन की सुगबुगाहट हुई न ही सामाजिक परिवर्तन की कोई जमीन तैयार हो सकी। 
          पाकिस्तान के समाज की तरह ही इनमें कथा के कई स्तर हैं। एक ओर सामंतों की दुनिया है, उनकी पार्टियां हैं, उनके विदेशों में रहते बच्चे हैं, दूसरी ओर उनके खेतों में, उनकी हवेलियों में काम करनेवालों की दुनिया है, भ्रष्ट अफसरषाही का चेहरा है, जो हारुनी जैसे सामंतों की महफिलों की शान बढ़ाने के काम आता है और उनके पैसे पर उनके लिए कुछ भी करने को तैयार रहता है। अदालतें भी इस भ्रष्टाचार में गहरे लिप्त हैं। अबाउट ए बर्निंग गर्ल में जज की टिप्पणी मानीखेज है कि इस देश में किसी भी चीज का प्रबंध किया जा सकता है। किस तरह पैसे के बल पर पाकिस्तान के सख्त कानूनों को अपने अनुकूल बनाया जा सकता है अबाउट ए बर्निंग गर्ल नामक कहानी में लेखक ने बहुत अच्छी तरह इसको दिखाया है। पैसे और पहचान के बल पर पाकिस्तान में कुछ भी संभव है। इस कहानी में दिखाया गया है कि एक जज का कारिंदा उसके नौकर को हत्या के आरोप से बरी करवाने के लिए किस-किस तरह की चालें चलता है। मियां साहेब नामक नामक जज के इस कर्मचारी के रूप में लेखक ने एक यादगार चरित्र की रचना की है जो पाकिस्तानी कानून की बारीकियों से तो वाकिफ है ही उसे तोड़ने के सारे तरीके भी जानता है।
          इन कहानियों के विषय में एक उल्लेखनीय बात यह है कि इनके केंद्र में भले एक बड़े सामंत का रुतबा हो मगर जिन कहानियों के कारण इस संग्रह को उल्लेखनीय कहा जा सकता है उनका संबंध पाकिस्तानी समाज के निम्नवर्ग से है। वहां के निम्नवर्ग में स्त्रियों की दशा कितनी दयनीय है लेखक ने कई कहानियों में दिखाया है। सलीमा कहानी में सलीमा हारुनी के खास कारिंदे रफीक की रखैल बन जाती है, उसका गुजर-बसर ठीक-ठाक चलने लगता है कि अचानक हारुनी साहब गुजर जाते हैं, मालिक के मरते ही नौकरों की दुनिया बिखऱ जाती है, बूढ़ा रफीक कहीं और नौकरी करने चला जाता है और जवान सलीमा की दुनिया उजड़ जाती है और वह लाहौर की सड़कों पर भीख मांगने को मजबूर हो जाती है।
          पाकिस्तानी निम्नवर्गीय समाज में पुरुश के बिना स्त्री किस तरह दरबदर हो जाती है यह संदर्भ कई कहानियों में आता है। इन अदर रूम्स, अदर वंडर्स में हुस्ना हारुनी साहब की दूर की रिश्तेदार है, गरीबी की शिकार  होकर उनके पास नौकरी के लिए आती है, बुढ़ापे में अपनी पत्नी से अलग रह रहे जमींदार साहब को हुस्ना के हुस्न में अपना दूर होता अकेलापन दिखाई देने लगता है और हुस्ना को अपनी गरीबी दूर होती दिखाई देने लगती है। लेकिन हुस्ना की किस्मत उसे एक बार फिर दगा दे जाती है। अचानक जनाब के. के. हारुनी का इंतकाल हो जाता है और हुस्ना फिर से गुमनामी और गुरबत में जीने को मजबूर हो जाती है क्योंकि हारुनी साहब ने अपनी जिंदगी में तो उसे शामिल किया लेकिन अपनी वसीयत में शामिल करना भूल गए थे। इसलिए उनके मरते ही उसके प्रति उनके रिश्तेदारों की निगाहें बदल जाती हैं।
          इसी तरह, ए स्प्वाइल्ड मैन कहानी में रज्जाक हारुनी के भतीजे के पहाड़ी बागानों में काम करता है और उसकी अमेरिकी बेगम का सबसे खास माली बन जाता है। जब उसके पास कुछ पैसा जमा हो जाता है तो वह बुढ़ापे में एक सुंदर लड़की से शादी कर लेता है। एक दिन वह खेतों में काम कर रहा होता है तो अचानक उसकी सुंदर पत्नी गायब हो जाती है और उसका कुछ पता नहीं चल पाता है। कहानी से पता चलता है कि पाकिस्तान के पहाड़ी इलाके में गरीब परिवारों की सुंदर लड़कियों को इलाके के बदमाशउठाकर जबरन चकलाघरों में बेच आते हैं और उनका कभी कुछ पता नहीं चल पाता।
          अनेक कहानियों में इस तरह से अचानक आने वाले संयोग के तत्व का लेखक ने एक युक्ति की तरह से इतेमाल किया है। लेखक इन कहानियों के माध्यम से मानो बताना चाहता है कि पाकिस्तान में वास्तव में आधुनिक समाजों की तरह तर्काधारित कानून का शासन नहीं चलता है, पैसा, पैरवी, भ्रष्टाचार के बल पर चलने वाले समाज में इसी तरह के संयोग घटित हो सकते हैं। कथा-संग्रह के आरंभ में लेखक ने एक पंजाबी कहावत को उद्धृत किया है- तीन चीजें ऐसी हैं जिनके लिए हम हत्याएं करते हैं- जर, जमीन,  और जोरू। ऐसे समाज में वास्तव में कभी भी कुछ भी घटित हो सकता है। प्रोवाइड, प्रोवाइड कहानी में हारुनी परिवार के मैनेजर को गांव के किसी किसान की पत्नी पसंद आ जाती है और वह उसे जबर्दस्ती अपने साथ रख लेता है। कुल मिलाकर, ये कबीलाई समाज की छवियां हैं जहां कभी भी कुछ भी हो सकता है।
          एक तरफ पाकिस्तान का गरीब तबका है जिसकी समाज में इसके सिवाय कोई हैसियत नहीं है कि वह जमींदारों, साहबों के काम आता रहे, उनके रहमो-करम पर जीता रहे। कहानी नवाबदीन इलेक्ट्रिशियन में ग्यारह लड़कियों के पिता नवाबदीन पर जमींदार खुश हो जाता है और उसे मोटरसाइकिल खरीदने के लिए पैसा दे देता है। लेकिन उसके जीवन की यह सबसे बड़ी खुशी अधिक दिन टिक नहीं पाती है। उसी मोटरसाइकिल के कारण एक दिन उसके ऊपर जानलेवा हमला हो जाता है। जमींदारों, फौजियों, अफसरों के अलावा अगर पाकिस्तान में किसी के पास किसी तरह से संपत्ति  आ भी जाए तो उसके लिए उसे बचाकर रख पाना ही बहुत बड़ी बात होती है।
          दूसरी तरफ पाकिस्तान का उच्च तबका है जो लंदन, पेरिस में छुट्टियां मनाता है, जिनके बच्चे अमेरिका के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करते हैं। यह वह तबका है जिसके लिए नाईट ऑफ सुनामी की थीम पार्टी के लिए इस्लामाबाद में ट्रकों में भरकर बालू मंगाया जाता है ताकि कृत्रिम तौर पर समुद्रतट बनाया जा सके। एक तरफ निम्नवर्ग की स्त्रियों का जीवन है जिसकी कोई कद्र नहीं है, उसके सुरक्षित जीवन के लिए यह बहुत आवश्यक है कि वह किसी पुरुष के सहारे रहे। वहीं दूसरी ओर उच्चवर्ग में लिली कहानी की लिली है जो अपने पिता की अकूत संपत्ति की वारिस है, जो अपनी मर्जी से देश-विदेश की पार्टियों में चहकती फिरती है और अपनी पसंद के लड़के से विवाह भी कर लेती है।
          दनियाल की कहानियों का उच्च-वर्ग ऊबे हुए लोगों का समाज है। वे पार्टियों में चहकते हैं, लेकिन वास्तव में एक्सटैसी, रॉकेट से लेकर गांजा-हशीश जैसे मादक-द्रव्यों में जीवन का आनंद ढूंढते हैं, भ्रष्टाचार में यह समाज इस तरह डूबा हुआ है कि उनको पाकिस्तान छोड़कर भागना पड़ता है और वे यूरोप में गुमनामी का जीवन जीते हुए ऐयाशी करते हैं। जमींदार ऐयाशी में डूबे रहते हैं और उनके मैनेजर, कारिंदों का प्रभुत्व बढ़ता जाता है। प्रोवाइड, प्रोवाइड कहानी में मैनेजर जगलानी विधानसभा का चुनाव जीत जाता है। इसी तरह ए स्प्वाइल्ड मैन कहानी में कारिंदे गुलाम रसूल के बारे में हारुनी के दोस्त कहा करते थे कि उसकी ताकत किसी केंद्रीय मंत्री से भी अधिक है। लेखक ने इस उच्चवर्ग के खोखलेपन को लेकर अनेक कहानियों में काफी चुटीली टिप्पणियां की हैं।
          इस्लाम, तालिबान, धार्मिक कट्टरता, आतंकवाद, राजनीतिक हत्याएं, सैनिक तानाशाही, परंपरागत कबीलाई सामाजिक ढांचा आदि कुछ ऐसे पहलू हैं जिनकी वजह से पाकिस्तान के जीवन में पश्चिमी समाज की रुचि बढ़ी है। शायद यही कारण है कि पाकिस्तान के अंग्रेजी लेखकों की पहचान भी व्यापक स्तर पर मुखर हो रही है। लेकिन दनियाल मुईनुद्दीन की कहानियों में ये सारे तत्व नहीं हैं। इन कहानियों में न तो आतंकवाद का कोई संदर्भ आता है न ही धार्मिक कट्टरता का जिसका आज पाकिस्तान पर्याय बनता जा रहा है। इसके बावजूद इन अदर रूम्स, अदर वंडर्स की कहानियों की लोकप्रियता बताती है कि जिस तरह से पाकिस्तान के सामंती समाज की विश्वसनीय छवियां इन कहानियों में उकेरी गई हैं पाठकों ने उसे पसंद किया है। ये कहानियां इस मिथ को भी तोड़ती हैं कि पाकिस्तान के नाम पर आतंक और जेहाद की कहानियां लोकप्रिय हो रही हैं।
  
  

3 COMMENTS

  1. प्रभात जी, बहुत अच्छा और ज्ञानवर्धक। समकालीन पाकिस्तानी कथा लेखन का यह एक छोटा-सा झरोखा है। -RAVI buley

  2. इस परिचय कराने का शुक्रिया. कुछ कहानियां लेखक की वेबसाइट http://inotherrooms.com/ पर मौजूद हैं. प्रभात भाई, मेहरबानी करके इन्हें हिंदी पाठकों को भी उपलब्ध कराइए.

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