‘सभ्यताओं के संघर्ष’ की औपन्यासिक कथा

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जॉन अपडाइक अमेरिका के बड़े लेखकों में गिने जाते थे. 2009 में उनका देहांत हुआ. अमेरिका में ९/११ की घटना के बाद उन्होंने एक उपन्यास लिखा था ‘टेररिस्ट’. २००७ में प्रकाशित इस उपन्यास में उन्होंने यह समझने का प्रयास किया है कि आखिर अमेरिका जैसे जनतांत्रिक और सहिष्णु समझे जाने वाले समाज में आखिर लोग क्यों एक-दूसरे की ‘पहचानों’ के दुश्मन हो गए, क्यों वहां ‘सभ्यताओं का संघर्ष’ शुरु हुआ. प्रस्तुत है उसी उपन्यास का एक अंश- जानकी पुल.




वह पांचवां लड़का था, उस उदास लंबी सुबह आधे घंटे के इंटरव्यू के लिए आने वाला, स्कूल का सीनियर छात्र था. उस गहरे रंग वाले लड़के ने काली जींस और सफ़ेद शर्ट पहन रखी थी, शर्ट इतनी सफ़ेद थी कि जैक लेवी की आँखों में चुभ रही थी, सुबह ज़ल्दी उठने के कारण उसका सिर भी कुछ भारी लग रहा था. उसने रजिस्टर में देखा उस लड़के का नाम अहमद ऐशमावी लिखा था.
‘तुम्हारा नाम तो काफी दिलचस्प है’, लेवी ने उस लड़के से पूछा. ‘ऐशमावी का क्या मतलब है तुम्हारे नाम में?’
‘सर, मैं बताऊँ?’
‘हाँ ज़रूर.’
‘मैं श्वेत अमेरिकी माँ और मिस्र से यहाँ पढ़ने आये आदमी की संतान हूँ; उन दोनों की मुलाकात न्यू जर्सी के स्टेट युनिवर्सिटी में पढ़ने के दौरान ही हुई थी. मेरी माँ, जो बाद में एक नर्स की सहायिका के रूप में काम करने लगी, उस समय पेंटिंग की पढ़ाई कर रही थी. वह अब भी खाली समय में पेंटिंग करती है और गहने डिजाइन करती है, जो थोड़ी-बहुत बिक भी जाती है, लेकिन इतनी नहीं हमारा गुज़र-बसर अच्छी तरह से ही सके.’ लेवी ने महसूस किया कि बहुत संभल-संभल कर बोलने के बावजूद उसकी आवाज़ में गहरा दर्द छिपा था.   
‘मेरी माँ ने मुझे बताया था कि मेरे पिता मैनेजमेंट और मार्केटिंग की पढ़ाई कर रहे थे. लेकिन वह उतना आसान नहीं था जितना कि उनको बताया गया था. उनका नाम था-है; मुझे अभी भी लगताहै कि वे जीवित हैं- उमर ऐशमावी, और माँ का नाम टेरेसा मुलोय. वह आयरिश मूल की अमेरिकन है. उनकी शादी मेरे पैदा होने से बहुत पहले ही हो गई थी. मैं उनकी जायज़ औलाद हूँ.’
‘मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है. न ही इससे कुछ फर्क पड़ता है. कोई बच्चा कभी नाजायज़ नहीं होता, मेरा तो यह मानना है.’
‘जी, शुक्रिया सर. मेरे पिता इस बात को अच्छी तरह से जानते थे कि किसी अमेरिकन से शादी करने से उनको अमेरिका की नागरिकता मिल जायेगी, जो उनको मिल भी गई. लेकिन न तो वे अमेरिकी रंग-ढंग से वाकिफ थे, न ही उनकी यहाँ कुछ खास जान-पहचान थी, इसलिए वे अमेरिकी समृद्धि नहीं पा सके, जिसके लिए लोग अमेरिका आते हैं. जब गुज़र-बसर लायक पैसे वे नहीं कम सके तो एक दिन जब मैं तीन साल का था, वे घर से भाग खड़े हुए. क्या यह सही शब्द है? मैंने यह शब्द महान अमेरिकी लेखक हेनरी मिलर के आत्मकथात्मक संस्मरण में पढ़ा था, जो अंग्रेजी की टीचर मिस मैकेंजी ने हमें इसलिए पढ़ने के लिए दिया था ताकि हमारी अंग्रेजी कुछ बेहतर हो सके.’ 
‘उन्होंने दिया था? हे भगवान, वक्त कितना बदल चुका है. पहले तो हेनरी मिलर की किताबें टेबल के ऊपर रखकर नहीं टेबल के नीचे छिपाकर पढ़ी जाती थीं. तुम टेबल के नीचे छिपाकर पढ़ने के मतलब तो समझते हो न?’  
‘समझता हूँ सर, मैं कोई विदेशी नहीं हूँ. मैं कभी अमेरिका से बाहर नहीं गया.’
‘तुमने भगोड़ा शब्द के बारे में पूछा था. यह एक पुराना शब्द है, लेकिन ज़्यादातर अमेरिकी इसका मतलब जानते हैं. इसका असली मतलब है फौज से भाग खड़े होना.’
‘लेकिन हेनरी मिलर ने इसका प्रयोग किया है, एक ऐसी पत्नी के लिए जिसने उनको छोड़ दिया था.’
‘मेरी माँ कहती हैं कि मुझे अपने पिता के बारे में कुछ भी याद नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि याद है’, अहमद ने कुछ रुकते हुए कहा.
‘तुम तब तीन साल के थे, हो सकता है कुछ स्मृतियाँ तुम्हारे अंदर रह गई हों’, जैक लेवी ने कहा.
‘हाँ, वे गहरी रंगत वाले थे, मुझसे भी कुछ अधिक. मैं जब उनको याद करता हूँ एक भीनी-सी खुशबू मुझे याद आ जाती है, जो शायद आफ्टरशेव लोशन की खुशबू रही हो शायद या शायद उन मसालों की जो मध्य-पूर्व के किसी खाने की खुशबू रही हो शायद, जो वे खाते रहे हों. वे छरहरे थे. मैं भी उनकी ही तरह अपने बालों में कंघी करता हूँ, बीच से मांग फाडकर.’  अहमद बोलते-बोलते कुछ भावुक हो रहा था.
‘मुझे लगता है तुमने तस्वीरों में उनको जैसा देखा होगा उसी को अपनी स्मृति समझ रहे हो’, जैक लेवी ने कहा.
‘मेरे पास उनकी बस दो तस्वीरें हैं. हो सकता है माँ के पास और हों जो उन्होंने छुपाकर रखी हों, वे उनके बारे में कुछ भी बात करने से मन कर देती हैं, शायद पिता के भाग जाने के कारण वे उनसे बहुत नाराज़ हो गई थी. मैं चाहता हूँ कि उनको ढूंढकर एक दिन उनसे मिलूं, किसी दावे के लिए नहीं, बस मैं उनसे बातें करना चाहता हूँ, उसी तरह जैसे दो मुसलमान आपस में बातें करते हैं.’
अहमद ने कुछ रूककर फिर कहना शुरु किया, ‘जानते हैं, मेरी माँ ने मेरे पहचान पत्र पर, मेरे ड्राइविंग लाइसेंस में मेरा उपनाम मुलोय लिखवाया, अपना उपनाम. लेकिन जब मैंने स्कूल की पढ़ाई छोड़ दूँगा और जब पूरी तरह स्वतंत्र हो जाऊँगा तब मैं अपना नाम अहमद ऐशमावी ही रखूँगा. उसी नाम से जाना जाना चाहूँगा.’
‘वैसे अपनी इस स्वतंत्रता को किस तरह से मनाना चाहते हो, मैथ और केमिस्ट्री में तुम्हें काफी अच्छे नंबर आये थे, लेकिन पिछले साल तुमने पढ़ाई की तरफ से अपना ध्यान ही हटा दिया, एक अलग ही रास्ता अख्तियार कर लिया. किसने सुझाव दिया था तुम्हें?’
‘मेरे उस्ताद ने’, अहमद ने नज़रें नीची करके कहा.
‘कौन है वह उस्ताद? तुमको इस तरह से धार्मिक पढ़ाई शुरु करने से पहले मुझसे पूछना चाहिए था? क्या हुआ अगर मैं भी तुम्हारी तरह मुसलमान नहीं हूँ.’
‘मेरे उस्ताद यहाँ नहीं हैं. वे मस्जिद में रहते हैं. शेख राशिद, वे वहां इमाम हैं. हम दोनों पवित्र कुरआन का पथ साथ ही करते हैं.’
‘वही मस्जिद जिसे ६० के दशक के दंगों में अश्वेत मुसलमानों ने मलबे में बदल दिया था.’ लेवी बोला. ‘और उसके इमाम ने तुमसे कहा कि तुम धार्मिक पढ़ाई करो?’
अहमद ने कुछ देर रूककर निर्भीकता के साथ कहना शुरु किया, लेवी की आँखों में आँखें डालकर, ‘उन्होंने मुझसे कहा कि कॉलेज की पढ़ाई मुझे गलत रास्ते पर ले जायेगी- गलत दर्शन, खराब साहित्य की ओर. पश्चिमी सभ्यता ईश्वरविहीन है.’ कुछ रूककर उसने फिर कहना शुरु किया, ‘और चूँकि इसका कोई ईश्वर नहीं है इसीलिए यह सेक्स और सुख-साधन के भोग में फंसा हुआ है. आप टेलीविजन देखते हैं न मिस्टर लेवी? किस तरह से उस पर वैसी चीज़ों को बेचने के लिए सेक्स का इस्तेमाल किया जाता है जिसकी आपको ज़रूरत भी नहीं होती. स्कूलों में जो इतिहास पढ़ाया जाता है, उसमें क्या है? वह पूरी तरह से औपनिवेशिक है. आ़प तो जानते हैं न कि ईसाइयत ने किस तरह से अमेरिका के मूल निवासियों का कत्लेआम किया, एशिया और अफ्रीका को रौंद डाला, और अब वे इस्लाम के पीछे पड़ गए हैं.’
‘लेकिन तुमको शेख राशिद ने कभी यह नहीं कहा कि तुम्हारे जैसे होशियार लड़के को इस तरह के सहिष्णु और विविधतापूर्ण समाज में रहने के लिए तुम्हें अलग-अलग तरह की दृष्टियों को समझना, उसके साथ रहना आना चाहिए’, जैक ने अहमद को समझाने के अंदाज़ में कहा.
‘अमेरिकी दृष्टि यह है न कि तुम अपने विश्वास के साथ रहो, मैं अपनी आस्था के साथ रहता हूँ, हम सब अमेरिकी हैं?’
‘हाँ, लेकिन क्या शेख राशिद को यह ढंग पसंद नहीं है?’ लेवी ने पूछा.
‘वह इससे घृणा करते हैं’, अहमद बोला.
‘और तुम? लेवी ने सवाल दागा.
‘मैंने सभी अमेरिकियों से घृणा तो नहीं करता. लेकिन अमेरिकी ढंग काफिरों का ढंग है. यह विनाश की तरफ बढ़ रहा है,’ अहमद जोश में आ गया था.
‘लेकिन तुम पढ़ाई क्यों छोडना चाहते हो? इस सबका तुम्हारी पढ़ाई से क्या लेना-देना है?’ लेवी ने सीधे-सीधे पूछा.
‘सर, मेरे पास कॉलेज की पढ़ाई के लिए पैसे नहीं हैं. मेरी माँ इतने पैसे नहीं कम पाती हैं कि मेरी पढ़ाई का खर्च उठा सकें. उन्होंने भी कला के लिए अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी.’
‘ओके. वैसे तो बढती सुरक्षा और बुश के युद्धों के कारण अब पहले वाली बात अमेरिका में भी नहीं रही. धीरे-धीरे स्कॉलरशिप्स बंद हो रहे हैं. लेकिन होनहार अश्वेत छात्रों के लिए अब भी कुछ स्कॉलरशिप बचे हैं. मुझे पक्का यकीन है कि अगर तुम फिर से अपना ध्यान पढ़ाई की तरफ लगाओ तो तुमको किसी न किसी विश्विद्यालय में पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप मिल सकती है. या तुम चाहो तो नौकरी भी? स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद, जैक लेवी ने अहमद को समझाते हुए कहा.
फिर थोड़ा रूककर लेवी ने खांसते हुए कहा, ‘फौज में जाने के बारे में क्यों नहीं सोचते. ठीक है अब उसमें पहले वाली बात नहीं रही, लेकिन तुमको अच्छा पैसा मिल जायेगा. अमेरिका में सम्मान मिल जायेगा… देखो, तुमको अरबी भाषा का ज्ञान भी है, तुमको ज़रूर फौज में नौकरी मिल जायेगी…’
‘वे फौजी बनाकर मुझे अपने ही भाइयों से लड़ने के लिए भेजेंगे’, अहमद कुछ उखाड़ने लगा था.
‘या अपने भाइयों के लिए लड़ने के लिए. देखो, तुम जानते हो सभी इराकी आतंकवादी नहीं हैं. उसको तो बस सद्दाम के बुरे प्रभाव से मुक्त करवाना है. इराक की पुराणी सभ्यता है, वे तो उसको बचाना चाहते हैं… लेवी ने अहमद को समझाते हुए कहा.
अहमद यह सुनकर खड़ा हो गया.
‘फौज में जाने की बजाय में ट्रक चलाना पसंद करूँगा. उससे अमेरिका में मेरी आजादी बनी रहेगी.’
अहमद ने कहा और कमरे से बाहर निकल गया. 

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  1. ‘जी, शुक्रिया सर. मेरे पिता इस बात को अच्छी तरह से जानते थे कि किसी अमेरिकन से शादी करने से उनको अमेरिका की नागरिकता मिल जायेगी, जो उनको मिल भी गई. लेकिन न तो वे अमेरिकी रंग-ढंग से वाकिफ थे, न ही उनकी यहाँ कुछ खास जान-पहचान थी, इसलिए वे अमेरिकी समृद्धि नहीं पा सके, जिसके लिए लोग अमेरिका आते हैं. जब गुज़र-बसर लायक पैसे वे नहीं कम सके तो एक दिन जब मैं तीन साल का था, वे घर से भाग खड़े हुए…..
    कितनी सहजता से अमेरिका के आकर्षण के सच को प्रकट किया है …सम्पूर्ण अंश पढ़ने के बाद पूरा उपन्यास पढ़ने की इच्छा हो रही है

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