दुःख में हो मोनालिसा?

22
31
कुछ दिनों पहले वरिष्ठ कवयित्री सुमन केसरी ने मोनालिसा को लेकर कुछ कवितायेँ लिखी थी. आज समकालीन कवयित्री कलावंती की कुछ कवितायेँ, एकदम अलग रंग-ढंग में- जानकी पुल.  
———————————————————————————————++++++++++++++++++++++++++++

       
मोनालिसा  (सात चित्र)
एक

मोनालिसा
लोग सदियों से ढूंढ रहे हैं
तुम्हारी मुस्कान का अर्थ!
मुस्कान में ख़ुशी है या क्लेश
किसी की प्रषंसा है या द्वेष
मुग्धा नायिका हो मोनालिसा या विरहिन अशेष
तुम्हारी मुस्कान का अर्थ क्या है मोनालिसा?
दो

मोनालिसा किसी बहुत
गहरे भाव में डूबी हो
क्या अपने प्रिय को देख लिया है
किसी दूसरी प्रिया के साथ
दुःख में हो मोनालिसा?

तीन

मोनालिसा
क्या बहुत गहरे दुःख में हो!
या यह दुःख किसी सुन्दर सृजन से
पहले का दुःख है
जो
सुख से भी ज्यादा सुन्दर होता है
चार

किसी के प्यार में हो
आजकल
क्या मोनालिसा
तुम्हारी मुस्कान कितनी दिव्य हो गयी है
इस नश्वर संसार में
बस यही अनश्वर बचा है
मोनालिसा !
इन दिनों तुम थोडी दार्शनिक हो गयी हो

पांच

मोनालिसा लोगों ने तुम्हारे मुस्कान की
अलग अलग व्याख्यायें की हैं
पर अभी बची है शेष व्याख्या
अनखुला अर्थ
जिसमें हर स्त्री ढूंढती है
अपने होने के मायने
अपना अस्तित्व!


छः

मोनालिसा
जाने कितने बरसों तक
बस अभी बस यहीं
बस आज तक ही क्या रहेगी यह जिजीविषा
इन लौकिक अर्थों से परे कोई
अलौकिक अर्थ और मुस्कान लिए या
किसी के नेह में अपने प्राण लिए- ढूंढती तुम
किसी की याद में जलती कोई दीपशिखा
कौन -कौन से अर्थ हैं
तुम्हारी मुस्कान के मोनालिसा

सात

तुम्हारी मुस्कान से मोहित हैं सब
तुम्हारी मुस्कान से भ्रमित हैं सब
यह सांझ ढले की उदासी है या सुबह की अलस नींद
क्या है तुम्हारे मुस्कान का अर्थ!
तुम्हीं बताओ मोनालिसा!

22 COMMENTS

  1. ladkiyan neh me hi apne pran deti hain,badi bewkoof hoti hain na shelley!sukriya tumhara mujhhe likhne ke liye tumne bahut prerit kiya.

  2. बस आज तक ही क्या रहेगी यह जिजीविषा
    इन लौकिक अर्थों से परे कोई
    अलौकिक अर्थ और मुस्कान लिए या
    किसी के नेह में अपने प्राण लिए- ढूंढती तुम
    किसी की याद में जलती कोई दीपशिखा

    savi kavitanyen kavi achhi or gahri hain. jis vishay par pahle hi kafi kuch likha ja chuka ho us vishay par naya likhne ke liye badhai

    तुम्हारी मुस्कान से मोहित हैं सब
    तुम्हारी मुस्कान से भ्रमित हैं सब
    यह सांझ ढले की उदासी है या सुबह की अलस नींद

  3. लियोनार्डो द विंची की पेंटिंग मोनालिसा पर इतने भाव मैं महसूस तो करता था पर लिखना सायद बहुत मुसकिल था।आपने बहुत खूबसूरती से लिख दिया इसे ।बधाई।

  4. लियोनार्डो द विंची की कालजयी कृति मोनालिसा एक स्त्री भी है इस नजरिए से किसी ने नहीं देखा सबने एक पेंटिंग समझकर इसकी व्याख्या की । कलावंतीजी ने इन कविताओं के माध्यम से इसे एक जीती जागती स्त्री के नजर से देखा है, और इसमें एक नया आयाम जोड़ दिया है और एक बार फिर से इसे प्रासंगिक कर दिया है। मोनालिसा की मुस्कुराहट का रहस्य और गहरा हो गया है !

  5. मैंने इससे पहले मोनालिसा की मुस्कुराहट पर इतना ध्यान नहीं दिया था,जितना आज इन क्षणिकाओं को पढ़ते हुए दिया. स्वाति अर्जुन.

  6. लिओनार्दी की एक कृति को आपने सात रंग दे दिए. स्त्री के दर्द और ज़माने के ग़म को मोनालिसा की मुस्कान् के बहाने आपने बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति दी है. शब्दों का चयन तो आपकी हर कविता में इतना सटीक होता है कि दूसरा पर्याय खोजे नहीं मिलता. … “यह सांझ ढले की उदासी है या सुबह की अलस नींद” – ये “सबेरे की नींद” की जो तस्वीर आपने शब्दों में चित्रित किया है – “मोनालिसा की मुस्कान” से ज्यादा मोहक है.

  7. एक संवेदनशील रचनाकार कैसे एक चित्र को कितने विभिन्‍न कोणों से देखकर उसमें कविता की ऐसी विपुल संभावनाएं साकार कर देता है, यह कलावंती जी के काव्‍य-कौशल और मेधा का ही प्रतिफल है, जो इन कविताओं में बहुत गहरे से दिखाई देता है। मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।

  8. monalisa kee muskaan me ek stree ke virah sukh dukh prteeksha aur astitv ka sundar samagam dikhta hai .. sach much ek stree kee muskaan vah parda hoti hai jiske neeche dukh kee kai tahen udhadti hain.. badhai kalavanti ji ko

  9. तुम्हारी मुस्कान से मोहित हैं सब
    तुम्हारी मुस्कान से भ्रमित हैं सब
    यह सांझ ढले की उदासी है या सुबह की अलस नींद

  10. वाह …. बहुत सुंदर …. मोनालिसा की मुसकार का अर्थ खोजती सुंदर क्षणिकाएं

LEAVE A REPLY

ten − 9 =