दुष्यंत की कहानी ‘उलटी वाकी धार’

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हाल में ही युवा लेखक दुष्यंत का कहानी संग्रह पेंगुइन से आया है ‘जुलाई की एक रात’. समकालीन जीवन के स्नैप शॉट्स की तरह कहानियां लिखने वाले इस प्रतिभाशाली लेखक की एक कहानी उसी संग्रह से- मॉडरेटर.
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दिन के दो बजकर दस मिनटलंच खत्म होने के तुरंत बाद का समय है। दफ्तर के ज्यादातर लोग लंच लेकर लौट चुके हैं। विकास सिगरेट पीने रुक गया है तो रीना लंच के बाद सेव का ज्यूस और वर्मा कॉफी के लिएलगभग 15 मिनट लेंगे अभी और।

पलपल दिल के पास तुम रहती हो

गाना बजावह किशोर का हद दर्जे का दीवाना हैअपने मोबाइल की इस रिंगटोन के लिए उसने कहांकहां नहीं कोशिश की थी।

उसका फोन लगातार बज रहा थावो कई देर तक फोन सिर्फ इसलिए नहीं उठाता कि गाने का आनंद ले पाये। अकसर पास में बैठे लोग उसकी इस आदत से झल्ला जाते हैं और उसकी ओर घूरती निगाहों से देखते हैंतब वह एक मुस्कुराहट ऐसे बिखेरता है जैसे कह रहा हो कि यार मैं ऐसा ही हूंक्या करूं।

इस वक्त कंपनी के अपने ईमेल आई डी पर मेल चेक कर रहा था राहुल। काम में मसरूफ था तो वही प्रिय गाना जैसे उसे चुभ रहा था।

हू द ब्लडी हेल इज दिस

कहते हुए आखिरकार उसने फोन उठा ही लिया –

राहुलमैं तुमसे तुरंत मिलना चाहती हूँ
अभीअभी पॉसिबल नहीं है यारअभी लंच से लौटा ही हूंऔर बहुत काम है अभी
इट्स अर्जेंटआय इमिजिएटली नीड टू टॉक
ऐसा भी क्या है श्वेताहम आज शाम को मिल रहे हैं ना 7 बजे
मैं शाम को नहीं मिल पाऊंगीऔर आज और आज ही मिलना बहुत जरूरी है
उसने ‘बहुत‘ शब्द पर बहुत जोर दिया।
वाट हैपन्डतुम इतनी परेशान क्योंहो डियरलगभग उतना ही जोर उसने ‘इतनी‘ पर दिया।
बात है राहुलसीरियस बात हैफोन पर बिल्कुल भी नहीं बता सकतीजल्दी बताओ कितनी देर में कहां मिल रहे होबंक मारोबॉस को पटाओछुट्टी लोकुछ भी करोआय जस्ट डोंट नोजस्ट मैनेज इट

ओकेलैट मी ट्राईआय विल लैट यू नो विदिन मिनट्स

राहुल सोचता हैदफ्तर के माहौल की ओर एक नजर डालता हैबहाना तो कोई नहीं चलेगाबंक भी मुश्किल हैबॉस को कैसे पटाऊँ यही एकमात्र रास्ता है’ इसी उधेड़बुन में राहुल एकदम चौकता है –

यादैट्स इटइट विल वर्क डेफिनेटली
अपने किसी चमत्कारिक किस्म के खयाल के साथ राहुल बॉस के केबिन में दाखिल हो जाता है। उसका बॉस लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था या लग रहा था कि काम में मशगूल है।

राहुलजस्ट कम
थैंक्यू सर
यस राहुलतुम्हें ही याद कर रहा थातुम कुछ खास कर रहे हो?’ कुछ और खास शब्दों के बीच अंतराल और  ध्वनि का विस्तार केबिन में गूंज गया।

नहीं सरबस यूं ही
गणपति प्लाजा जा सकते होमेरे एक दोस्त ने बॉम्बे से कुछ भेजा है

सरश्योरबट सर…’

बोलो राहुलहिचकिचा क्यों रहे हो। कोई गर्लफ्रेंड का चक्कर है क्यामे आई हेल्प यूतुम लडकों की यही प्राब्लम हैसालोप्यार भी करते होफटती भी है

सरशी इज इन सम प्रॉब्लमउसे कुछ जरूरी बात करनी है मुझसेगणपति प्लाजा से पैकेट लेकर उससे मिल लूंअगर आप परमिट करें तो ?’ हिचकिचाते शरमाते हुए बोल गया राहुल।

श्योरराहुल बस इतनी सी बात…. इफ पॉसिबल कंफर्टेबली डू कम अदरवाइजमेरा पैकेट कल लेते आना ऑफिस आते हुएगुड लकओके

राहुल मन में सोच रहा था – मेरे आइडिया की जरूरत ही नहीं पडी वैसे भी यही सोचा था कि कह दूंगा गर्लफ्रेंड से मिलना हैजरूरी काम सेदिन के काम में कुछ बचा नहीं हैपर पता नहीं इससे बॉस कन्विंस होते भी या नहीं आयआयएम बोम्बे से पास आऊट प्रोबेशनर मैनेजमेंट ट्रेनी भीतो बॉस की परमिशन को मोहताज है ना वो समझती कहां है बेवकूफएनी वे आय एम सो लकीबॉस को शायद ईश्वर ने शायद कोई भविष्यवाणी की हो।

उसने श्‍वेता को अपने मोबाइल से रीडायल किया

श्वेतामैकडानल्ड्स में साढ़े तीन बजे मिलते हैंइज इट ओके
श्योरथैंक्‍स।‘ फोन कट गयाराहुल कुछ क्षण मोबाइल को कान से नीचे लाकर उसकी स्क्रीन को यू ही देखता रहा।

राहुल गणपति प्लाजा से बॉस का पैकेट लेते हुए मैक्डॉनल्ड पहुंचता है दिन काफी गर्म हैमई का पहला हफृता है इस हर में मानसून से महीने भर पहले ही तेज गर्मी पडती है। इधर उधर देखता हैश्वेता अभी नहीं आई है अपनी बहुत महंगी सी स्विस वॉच में समय देखता हैजिसे पापा ने इसी साल बर्थडे पर गिफ्ट किया था साढ़े तीन बजने में अभी दस मिनट कम हैं।

क्यों बुलाया हैऐसी क्या आफत आ गई श्वेता भी नाइतनी दोपहर में बुलाने की क्या जरूरत थी ये लड़की भी बस पागल ही है खुद तो एमएनसी में पीआर मैनेजर हैकैसे भी मैनेज कर सकती है ये तो शुक्र है कि बॉस का काम थावरना कहां आ सकता थाऔर फिर इसने नाराज होना ही थापक्का। 

राहुल इसी सोच में गुम था विरोधाभासी रूप से मैकडानल्ड्स के शोर में। तभी
हे राहुल’  कहते हुए श्वेता धम्म से आके बैठ गई।
कब से बैठे होमुझे देर तो नहीं हुई ना ?’ बनावटी मुस्कुराहट उस लड़की के चेहरे पर साफ झलक रही थी।

नहींमैं ही थोड़ा सा पहले आ गया थायू आर आल्वेज राइट

थोडा सा पॉज दिया और बोला, ’एंड एट राइट टाइम

ओह वो थोडा सा सकपका गईजैसे चोरी पकडी गई हो। उसका अतिरिक्त मेकअप जाहिर हो रहा था,राहुल को इस परअचरज हुआ पर उसने कुछ कहा नही

फिर थोडा सहज होने की कोशिश करते हुए उसने अपना हैंडबैग टेबल पर रखा और मोबाइल निकालकर अलग से रख दिया और अपने बालों से क्लचर निकालकर दांतों के बीच दबाया और बालों को फिर से एडजस्ट करते हुए फिर से क्लचर को अपनी जगह पर करीने से बिठा दिया।

तो क्या लोगीबाहर बहुत गर्मी हैइजन्ट इट!’

हांकोक लूंगी और तुम!’

मैं भी

कहते हुए राहुल उठा और सेल्फ सर्विस काउंटर से दो कोक लेकर आया और बैठ गया .बीच में तीन बार टकराते हुए बचाअजीब सी उहापोह और आशंकाओं से घिरा राहुल।

दोनों के बीच एक मुस्कुराहट की बहुत कुछ कृत्रिम सी एक लकीर का आदानप्रदान हुआ और फिर एक सन्नाटा सा पसर गया दोनों के बीचकुछ क्षणों के लिएमैक्डोनल्ड के भीतर के माहौल में शोर गुल के बीच दो लोगों के बीच पसरा सन्नाटा।

थोडी देर बाद राहुल ने चुप्पी तोड़ी जैसे इतना वक्त मुकर्रर थाकिसी स्क्रिप्ट के तहत
हांश्वेतावाट वैंट राँगसब ठीक तो है?’

राहुलआय एम प्रेगनेंट

श्वेता ने एकटक बिना पलक झपकाए कहा और राहुल के जवाब की प्रतीक्षा करने लगी।

वाओग्रेट न्यूज!’ राहुल ने तुरंत लपकते हुए कहा।
सर्टेनली नॉट’ श्वेता के चेहरे के भाव बदल गए और उसने अपने दांये हाथ को क्रिकेट में एम्पायर के चौके के निशान की मुद्रा को आधा अपनाते हुए कहा।

वाय नॉटश्वेतापापा मम्मी 15 तक आ ही रहे हैं और वी विल गेट मैरिडसिम्पल!’ आश्चर्यप्रश्न और समाधान की मुद्रा में राहुल ने कहा।

बट मैं ये बच्चा नहीं चाहती’ यानी उसका अपना कोई समाधान था।

क्या ये बहुत जल्दी है ?’ मैक्डोनल्ड के वातानुकूलित माहौल में भी अपने माथे पर आई पसीने की बूंदों को पोंछते हुए राहुल ने फिर पूछा।

नहींये बात नहीं है

तोबात क्या है श्वेताडॉक्टर्स ने मना किया है क्या!’

नहींराहुल ये बात भी नहीं है

तो मैं लड़की चाहता हूं और तुम लड़काअल्टासाउंड की रिपोर्ट में लड़की हैइसलिए!’ राहुल ने मजाक में कहा और माहौल को थोडा सहज बनाने की कोशिश की।

नहींराह

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