पाट गंगा का तट गंगा का और ये घाट किसके हैं ?

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वरिष्ठ कवि निलय उपाध्याय अभी हाल में ही गंगा की साइकिल यात्रा पूरी कर मुंबई लौटे हैं. इधर बनारस का माहौल गरमा गया है. गंगा के घाटों पर पानी में उफान आ रहा है. बनारस को लेकर उनकी कुछ ताजा कविताएँ इसी बदलते माहौल, इन्हों हलचलों को कैद करने की कोशिश हैं. ख़ास तौर पर आपके लिए- मॉडरेटर 
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कितना बनारस बचा है बनारस में
कितनी गंगा बची है बनारस की गंगा में
मनेरी
उतर काशी टिहरी गढकोटेश्वर
ऋषिकेश और हरिदवार में वर्षो तक बंधे रहने
और बिजली निकल जाने के बाद जितना बचा है
पानी में गुण धर्म गंगा का
उतना ही बचा है
इस देश में भारत
हरिद्वार में बंटवारे के बाद
हरकी पौडी में पूजी गई..दिल्ली ले जाई गई
और बहती रही लोगो की प्यास से अधिक
शौच घरो मे,
और जितनी बची गंगा
उतनी बची है दिल्ली मे दिल्ली
गर्दन में रस्सी बांध कर
अनेरिया गाय सी हर आश्रम के
दरवाजे दरवाजे चक्कर काटती जितनी बची गंगा,
बेरहमी से उलीचा गया खेत खेत,जितनी बची गंगा,
जितनी बची
नरोरा के एटमिक प्लांट से निकलने के बाद
बस उतना ही बचा है अब उत्तर प्रदेश
जितनी बची है
जीवन में नैतिकता
बस उतनी ही बची है गंगा
उतना ही बचा है बनारस
कन्नौज में राम गंगा और काली नदी
कानपुर के भोथरे छूरे के धार से चालीस नाले
लखनऊ की पाण्डु नदी
और कोढ में
खाज सी दिल्ली की यमुना
यह मिथको के टूटने समय है
विचार विचारो को प्रदूषित कर रहे है
नगर नगरो को प्रदूषित कर रहे है
और नदियां
नदियों को
बाजार में जितनी हया बची है
जितना बचा है आंख में पानी
बस उतनी ही बची है
बनारस में गंगा
उतना ही बचा है बनारस में बनारस
बनारस को बसना था
कोशी और गंगा के संगम के पास
जहां नर्तन में सती के कटि से
गिरा था हार
और बसा कटिहार
इसी लिए आश्रम बना
इसी लिए तप करते रहे थे
महाराज बशिष्ट
बटेश्वर स्थान में,कहलगांव के पास
कोशी के स्वभाव पर
भरोसा नही था गंगा को
बिठूर और नैमिशारण्य ने रचा व्यूह
नापी के वक्त जरा आगे सरक गई गंगा
नौ हाथ कम पड गई जमीन
और यहां आ गई
भरोसा किया अस्सी पर
वरूणा पर भरोसा किया
और बसी
वरूणा और अस्सी के बीच
आपने देखा है
पूछा कभी आपने
कि इस तरह क्यो विलख रही है
आज अस्सी
आपने सोचा कभी
कि कहां गई शांत कछार वरूणा की
हर अस्सी और हर वरूणा के साथ है गंगा
हर अस्सी से पहले और हर वरूणा के बाद भी है गंगा
वरूणा और अस्सी का गुस्सा,
वरूणा और अस्सी की करूणा के साथ
बनारस में
हर आदमी के भीतर बहती है गंगा
यह मिथको के टूटने का समय है
पाट गंगा का
तट गंगा का
और ये घाट किसके हैं ?
ये अस्सी,
ये गंगामहल और रीवां,
ये तुलसी ,भदैनी ,जानकी
ये आनंदमयी ,जैन ,पंचकोट,प्रभु ,चेतसिंह
ये अखाड़ा निरंजनी,निर्वाणी,शिवाला,गुलरिया,दण्डी,हनुमान
ये मैसूर ,हरिश्चंद्र लाली केदार.चौकी .क्षेमेश्वर
ये मानसरोवर ,नारद ,राजा ,गंगा महल ,पाण्डेय घाट,दिगपतिया
ये चौसट्टी ,राणा महल ,दरभंगा ,मुंशी
और अहिल्याबाई घाट किसके है
पानी गंगा का.,
धार गंगा की
और ये घाट किसके है ?
ये शीतला

1 COMMENT

  1. बाजार में जितनी हया बची है
    जितना बचा है आंख में पानी
    बस उतनी ही बची है
    बनारस में गंगा
    उतना ही बचा है बनारस में बनारस

    Achchi kavitaein

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