‘मम्मा की डायरी के बहाने’ एक अलग तरह का प्रोग्राम

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सभी मम्माओं-पापाओं को यह सूचित किया जाता है कि आज शाम 6.30 बजे इण्डिया हैबिटेट सेंटर के कैजुरिना हॉल में अनु सिंह चौधरी की किताब ‘मम्मा की डायरी’ के बहाने कुछ पैरेंटिंग के अनुभवों को साझा करने-सुनने का मौका है. एक अलग तरह की दुनिया का यह अलग तरह का प्रोग्राम है. आज नगरों-महानगरों में पैरेंटिंग एक बड़ी चुनौती है, कि किस तरह से दौड़ती-भागती जिंदगी के बीच अपने बच्चों को संभाला जाए, उनको समय दिया जाए. कल मेरी एक महिला मित्र से बात हो रही थी तो उनका कहना था कि हमारे बच्चों के लिए आजकल सबसे बड़ी ट्रीट यही हो गई है कि हम उनके लिए समय निकाल पायें, दिन बिता पायें.

अब पैरेंटिंग सिर्फ माँ की जिम्मेदारी नहीं रह गई है, पुरुष भी इस चुनौती को समझ रहे हैं अपना योगदान दे रहे हैं. अनु सिंह चौधरी की किताब ‘मम्मा की डायरी’ एक कामकाजी महिला के अनुभवों की दास्तान है. कैसे जीवन की चुनौतियों का सामना करते हुए अपने बच्चों की बेहतर परवरिश की जाए. हमने जो अपने माँ-पापाओं से लिया था कैसे उन संस्कारों को अपने बच्चों तक पहुंचाया जाए, उनको अपने समय का मुकाबला करने के लिए कैसे तैयार करवाया जाए. यह एक बड़ी चुनौती है जिससे बचा नहीं जा सकता है.

माँ-पापा बनना स्वर्गिक ख़ुशी देता है तो एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी देता है. आज अपने अपने अनुभवों को साझा करने, दूसरों के अनुभवों को सुनने-गुनने का दिन है.

क़िस्से बाँटनेवालों के नाम-
नताशा बधवार
सायरी चहल
प्रीति अग्रवाल मेहता
रमा भारती
विजय त्रिवेदी
मंजीत ठाकुर
रंजना सिंह
निरुपमा सिंह
विनीता सिन्हा
क्षितिज रॉय
प्रियंका मंजरी
नीलम मिश्रा
तूलिका
और मनीषा पांडे

कार्यक्रम में MCBC FILMY द्वारा निर्मित लघु फ़िल्म आओगी ना माँकी स्क्रीनिंग भी होगी।

मुझे नहीं लगता है कि यह अलग से बताने की जरूरत है कि ‘मम्मा की डायरी’ पुस्तक का प्रकाशन हिन्द युग्म प्रकाशन ने किया है. आप चाहें तो पुस्तक की एक प्रति भी लेखिका के हस्ताक्षर के साथ खरीद सकते हैं.

मैं तो जा रहा हूँ. आप भी समय निकाल कर आइये. रोजमर्रा के कार्यक्रमों से अलग हटकर इस आयोजन का हिस्सा बनिए. 

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