‘गंदी बात’ के बहाने कुछ अच्छी गन्दी बात

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क्या ज़माना आ गया है! पहले लिखने का मतलब होता था कुछ अच्छी अच्छी बातें. आजकल लेखक उपन्यास लिखते हैं और उसका नाम ही रख देते हैं ‘गंदी बात’. क्षितिज रॉय का उपन्यास ‘गंदी बात’ चुटीली भाषा में लिखा गया एक उपन्यास है, उसको पढ़कर कटीली भाषा में युवा पत्रकार-लेखिका अणुशक्ति सिंह ने लिखा है- मॉडरेटर

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हर साल जनवरी का महीना आता है। जनवरी मे विश्व पुस्तक मेला होता है। पुस्तक मेले मे बहुत सारी किताबें आती हैं। कुछ किताबें गुमनाम रह जाती हैं। कुछ पर बहुत सारी बातें होती हैं। 2017 की जनवरी मे भी एक किताब आई। गंदी बात नाम की यह किताब  राजकमल प्रकाशन की ओर से आई थी, जिसे किताबों का ‘यशराज’ भी कह सकते हैं।

जिस तरह से यशराज से आने वाली फिल्मे रिलीज़ से पहले ही हिट करार दे दी जाती हैं, कमोबेश राजकमल से आने वाली किताबों के बारे मे भी वही कहा जा सकता है। कंटैंट/ कहानी क्या है, वह बाद की बात है, इतना तो तय है कि निर्देशन/सम्पादन बढ़िया लेवेल का होगा।

गंदी बात, क्षितिज रॉय की लिखी हुई किताब है। क्षितिज बिहार के कस्बाई शहर सहरसा से वीया भागलपुर/ पटना और नेतरहाट दिल्ली पहुँचे हैं। क़ाबिल मिल्लेनियल हैं। डी स्कूल से पढ़ाई करने के बाद भी कोई अगर लेखन को अपना ध्येय और पेशा बनाता है तो उस इंसान की हिम्मत और जज़्बे की दाद देनी पड़ेगी।

क्षितिज का यही जज़्बा उनकी किताब के नायक गोल्डेन मे भी दिखता है। गंदी बात दरअसल चिट्ठियों के जरिये कही गयी प्रेम कहानी है। चिट्ठियों वाली प्रेम कहानी से आपको तुम्हारी अमृता याद आएगी। फारुख शेख और शबाना आज़मी याद आएंगे। अगर अङ्ग्रेज़ी साहित्य मे दिलचस्पी है तो ए.आर.गर्ने का पुलितजर पुरस्कार की फ़ाइनल लिस्ट मे शामिल नाटक ‘लव लेटर्स’ याद आएगा। यहाँ दीदार-ए-नज़र दो बातें हैं, पहली यह कि तुम्हारी अमृता ‘लव लेटर्स’ पर आधारित जावेद सिद्दीकी की रचना थी। दूसरी, गंदी बात और तुम्हारी अमृता मे किसी तरह की तुलना नहीं की जा रही।

हाँ तो बात गोल्डेन और डेज़ी की हो रही थी। अब ये दोनों गंदी बात के दो मुख्य किरदार हैं। जो बिलकुल बेलाग खत लिखते हैं। गोल्डेन डेज़ी को चिट्ठियाँ लिखता है। डेज़ी गोल्डेन को लेटर लिखती है।

डेज़ी मस्ती-खोर पटनिया लड़की है जो पूरे दिन इधर-उधर डोलते रहने के बाद भी दक्षिणी दिल्ली के सबसे ज़बरदस्त कॉलेज मे एड्मिशन ले लेती है। गोल्डेन उसका ऑल्मोस्ट नकारा बॉयफ्रेंड है जो उसका बेहद ध्यान रखता है। डेज़ी दिल्ली आती है। गोल्डेन उसके पीछे-पीछे चला आता है। स्वीट टीनएज रोमांस!

इस रोमांस के दोनों स्टेकहोल्डर बड़े धाकड़ हैं। लड़की ट्रेन के वाशरूम मे लड़के को किस कर सकती है। लड़का लड़की से पहली बार उसके कॉलेज हॉस्टल मे मिलने आता है, किसी आम सवारी पर नहीं, ब्याह की बग्घी लेकर। इस क्रांतिकारी कल्पना के लिए किताब के लेखक बधाई के पात्र हैं।

मैं लेखक को किताब को चिट्ठीयों की सिरीज़ के तौर पर प्रस्तुत करने के लिए भी बधाई देती हूँ। लगभग अपनी ही उम्र के किसी पात्र को गढ़ देना, उसके मन की बातों को लिख देना आसान नहीं है। पर क्षितिज यह काम बखूबी करते हैं। उन्होने न सिर्फ गोल्डेन और डेज़ी  बल्कि अपनी उम्र के हर लड़के-लड़की की नब्ज़ पहचानने की, रोग ढूँढने की सुंदर कोशिश की है। उन कोशिशों को चिट्ठियों मे बखूबी समेटने की कोशिश भी की है। गोल्डेन और डेज़ी की पहली चिट्ठी से अंतिम चिट्ठी तक की यात्रा दिल को छू लेती अगर बीच-बीच मे किताब ढर्रे से बाहर नहीं चली जाती।

शायद सब कह देने की कोशिश मे लेखक कुछ ज़्यादा कह देते हैं। या फिर कहीं-कहीं भूल जाते हैं कि उन्हें क्या कहना है। पर इसमे लेखक का दोष कम दिखता है। कहानी सुनाने वाले हमेशा खूब लंबी-लंबी कहानियाँ सुनाते हैं। संपादक इन कहानियों को अपने अनुसार काट-छाँट देता है। खैर!

वैसे लेखक की तारीफ उनके बेलौस देशज लेखन के लिए भी खूब होनी चाहिए। पर मेरा उनसे एक सवाल है, किताब को लिखते वक़्त उनका टार्गेट ग्रुप क्या था? अगर इस किताब का उद्देश्य स्कूल-कॉलेज के लोगों तक ही पहुंचना था तो पूरे नंबर। परंतु अगर लेखक और संपादक ‘गंदी बात’ को कल्ट की लिस्ट  मे अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेयपुर’ के समानान्तर देखना चाहते थे तो थोड़ी सावधानी आवश्यक थी। गालियों की भी अपनी गरिमा होती है। उन्हें अगर करीने से सजाया जाये, संभाल कर, फुल्ल अदायगी मे निकाला जाये तो वाह-वाह है, वरना…

इस किताब को पूरा पढ़ते-पढ़ते मुझे पिछले साल आई फिल्म ‘मिर्ज्या’ की याद आ रही है। सुना है कि इस फिल्म को गुलज़ार ने लिखा था। कभी-कभी गुलज़ार भी नब्ज़ पकड़ने मे गलती कर देते हैं। गंदी बात को पाठकों तक लाने वाले तो फिर भी कम पुराने हैं। वैसे, मिरज्या ने ‘हर्षवर्धन कपूर’ नाम का बड़ा प्रतिभाशाली अभिनेता दिया है सिने जगत को। मुझे क्षितिज मे लेखन का ‘हर्षवर्धन’ नज़र आता है, जो आने वाले दिनों मे उभर कर सामने आएगा।

 

 

 

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