अंतरराष्ट्रीय गोरैया दिवस और ‘दाना-पानी’

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आज अंतरराष्ट्रीय गोरैया दिवस है. शहरों में गोरैया गायब होती जा रही हैं. हमारा जीवन प्रकृति से दूर होता जा रहा है. अन्तरराष्ट्रीय गोरैया दिवस के माध्यम से इसी तरफ हमारा ध्यान दिलाने की कोशिश की जाती है. दिल्ली में ‘दाना-पानी’ नामक एक संस्था है जो चिड़ियों के साथ इंसान के रिश्ते की याद दिलाने का काम करती है और हमें यह याद दिलाने का काम भी करती है कि चिड़ियों की चिंता के बिना पर्यावरण की चिंता अधूरी है. दाना पानी का मकसद है कि आने वाली पीढियां चिड़ियों को देख सकें. उनके साथ इंसान के आदिम जुड़ाव को समझ सकें.

इस मुहिम को गौरव मिश्र ने स्कूलों से जोड़ने की दिशा में पहल की है, चिड़ियों को लेकर कविताओं के माध्यम से चेतना जगाने की कोशिश की गई है. सबसे मजेदार पहल है स्केयर क्रो की अवधारणा का बदला हुआ रूप. स्केयर क्रो खेतों से चिड़िया को भगाने के लिए लगाया जाता है, जिसे कागभगोड़ा भी कहा जाता है. उस डरवाने से दिखने वाले स्केयर क्रो को दाना पानी ने कलाकारों के माध्यम से केयर क्रो का रूप दिया है. खेतों में लगा हुआ यह पुतला चिड़ियों को अपनी तरफ आकर्षित करता है.

बच्चों के साथ मिलकर दाना-पानी भविष्य के लिए चिड़ियों को बचाने के काम में तीन साल से लगा हुआ है. शहरों में चिड़ियों को भगाने की नहीं उनको बुलाने की जरूरत है. दाना पानी के कल्पनाशील कार्यकर्ता गौरव मिश्र की धुन है और उनकी कल्पनाशीलता है जो चिड़ियों को लेकर जागरूकता फैलाने के काम में लगी हुई है.

आज अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर हम भी यह संकल्प लें कि और नहीं कुछ तो अपने घर या सोसाइटी के बाहर चिड़ियों के लिए दाना पानी रखेंगे. महानगरों में इंसानों के लिए गगनचुम्बी आश्रय बनते जा रहे हैं और चिड़ियों से उनका गगन छिनता जा रहा है. दाना पानी आन्दोलन हमें इसी की याद दिलाता है.

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