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मृणाल पांडे का उपन्यास ‘सहेला रे’ माइक्रोहिस्टोरिकल फ़िक्शन है

मृणाल पांडे का उपन्यास ‘सहेला रे’ एक दौर की कला की दास्तानगोई है. महफ़िल गायकी की छवि को दर्ज करने की एक नायाब कोशिश. इस उपन्यास पर नॉर्वेवासी अपने लेखक डॉक्टर प्रवीण झा ने लिखा है. उपन्यास राधाकृष्ण प्रकाशन से प्रकाशित है. आप भी पढ़िए- मॉडरेटर ============================= कुछ किताबों के …

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गौतम राजऋषि की कहानी ‘तीन ख्वाब, दो फोन-कॉल्स और एक रुकी हुई घड़ी’

गौतम राजऋषि सदाबहार लेखक हैं, शायर हैं. आज उनकी एक दिलचस्प कहानी पढ़िए- मॉडरेटर ==========  सर्दी की ठिठुरती हुई ये रात बेचैन थी| गुमशुदा धूप के लिए व्याकुल धुंध में लिपटे दिन की अकुलाहट को सहेजते-सहेजते रात की ठिठुरन अपने चरम पर थी| …और रात की इसी बेचैनी में एक …

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अंकिता आनंद की आठ कविताएँ

अंकिता आनंद का नाम अंग्रेजी पत्र पत्रिकाओं में सुपरिचित है. हिंदी में कविताएँ लिखती हैं. उनकी कविताओं में जो बात सीखने लायक है वह है शब्दों की मितव्ययिता. चुन चुन कर शब्द रखना और भावों को कविता की शक्ल देना. लम्बे अंतराल के बाद उनकी आठ कविताएँ पढ़िए- मॉडरेटर ========= 1. …

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