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फ़िराक़ गोरखपुरी पर मनीषा कुलश्रेष्ठ की टिप्पणी

फ़िराक़ गोरखपुरी के रुबाई संग्रह ‘रूप’ पर यह टिप्पणी जानी मानी लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ ने लिखी है। इस लेख को पढ़ते हुए फ़िराक़ साहब की कई रुबाइयाँ मुझे याद आ गई। जैसे, जादू भरे भरे ये नैना रस के/साजन कब ऐ सखी थे अपने बस के/ये चाँदनी रात ये बिरह …

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‘सोचो अगर हम इंडिया न गए होते, तो इंडिया आज कहाँ होता?’

नॉर्वे प्रवासी डॉक्टर प्रवीण कुमार झा ने ‘कुली लाइंस’ किताब लिखकर इंडियन डायस्पोरा की दास्तान सुनाई। आज स्वाधीनता दिवस के दिन वे परदेस में भारतीय होने का मतलब समझा रहे हैं। उनकी और जानकी पुल की तरफ़ से सबको आज़ादी मुबारक-मॉडरेटर ======================================== गाड़ियों की सस्ती-टिकाऊ सर्विस के चक्कर में गाड़ी-मिस्त्री …

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‘जापानी सराय’ पर मनीषा कुलश्रेष्ठ की टिप्पणी

जब आपकी पहली किताब पर जाने माने लेखक-लेखिकाएँ लिखने लगें तो समझ लीजिए कि आपको बहुत गम्भीरता से लिया जा रहा है, आपको बहुत उम्मीदों से देखा जा रहा है। अनुकृति उपाध्याय के पहले कहानी संग्रह ‘जापानी सराय’ की यह समीक्षा प्रसिद्ध लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ ने लिखी है- मॉडरेटर ============================= …

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