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सोनाली मिश्र की कहानी ‘चिड़िया की उड़ान’

हिन्दी लेखिकाओं पर यह आरोप लगाया जाता है कि वे राजनीतिक कहानियाँ नहीं लिख सकती। युवा लेखिका सोनाली मिश्र की कहानियों में यही बात आकर्षित करती है कि समकालीन राजनीति के दांव-पेंच उनकी कहनियों में बखूबी आते हैं। जैसे यह कहानी- मॉडरेटर 
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अभी अभी विधान सभा के चुनाव हुए थे। रिकोर्डतोड़ मतों से जीते थी अम्बर जी! जीत का स्वाद कितना सुन्दर होता है! वह जब सारे अवरोध तोड़कर झोली में गिरती है तो मानो दुनिया भर के चाँद सितारे अपने साथ ले आती है! कितने पापड़ बेले थे अम्बर जी ने! बहुत मेहनत की थी। इतनी मेहनत के बाद तो जीत होनी ही थी। इस जीत के साथ साथ न जाने उनके फौलोवर (वैसे पहले उन्हें चमचा कहा जाता था, मगर ये डिजिटल युग है, सोशल मीडिया का युग है तो फौलोवर ही ठीक!) के भी भाग्य खुल गए थे।
“उहं! न जाने कितने लोग अम्बर जी की फोटो दिखा दिखा कर लोगों को बरगला रहे हैं!” राधिका जी, मन ही मन सोचती आ रही थीं।
“अब देखो तो मैं कितनी नज़दीक हूँ, अम्बर जी के! मगर मज़ाल जो मैंने कभी कुछ दिखाया हो!” राधिका जी अपने मन में कहती हुई जा रही थींलेखिकाओं । अम्बर जी के साथ नज़दीकी का बहुत गुमान था राधिका जी को! अब देखो न! क्या थीं राधिका जी? कुछ भी तो नहीं! और आज? आज देखो! मजाल कि मोहल्ले का किसी भी काम का ठेका उनके घर पर चढ़ावे के बिना किसी को मिल जाए? उहं! देखा कितनी नज़दीकी है? अम्बर जी ने उन्हें बहुत अधिकार दे रखे हैं, अम्बर जी ही तो थे जिन्होंने उनकी मुलाक़ात इत्ते बड़े बड़े ठेकेदारों से कराई थी! वरना! ये मुए मोटे मोटे ठेकेदार तो दूसरी पार्टी के ही लोगों के घर पर अपना माथा टिकाते थे!
मगर अम्बर जी की अक्ल की तो दाद देनी होगी! उनके महिला मंडल के साथ मिलकर ठेकेदारों की घटिया सामग्री का इतना ढोल पीटा और उसके मोहल्ले की औरतें भी कम थोड़े ही नहीं हैं! खूब चप्पल दिखा दिखा कर आन्दोलन और प्रदर्शन किए, न जाने कितने मटके फोड़े! ये मुआ ठेकेदार, मानने के लिए ही तैयार नहीं था! बताइए न! इन ठेकेदारों से पैसे निकलवाने के लिए न जाने कितनी बार रास्ता रोका था!
“पर आज अम्बर जी फोन क्यों नहीं उठा रहे?” राधिका ने सरला जी से पूछा!
सरला जी इस पार्टी की महिला मंडल की बहुत पुरानी कार्यकर्ता थीं! सरला जी के दिखाए गए रास्ते पर चलकर ही महिलामंडल इस आकार में आ पाया था। सरला जी ने इस पार्टी के लिए बहुत त्याग किए थे। सरला देवी ने ही राधिका को मटके फोड़ना, चूड़ी देना, हंगामा करना सिखाया था। सुनते थे कि सरला जी अम्बर जी की बहुत नज़दीक थीं। इतनी नज़दीक कि किस्से आज भी महिला मंडल की कार्यकर्ताओं की जुबां पर हैं। मगर पुरानी कार्यकर्ताओं की, नई कार्यकर्ताओं के लिए तो अम्बर जी देवता हैं। वे तो उनके हर कार्यक्रम में चली ही जातीं हैं! और महिला मंडल का कोई भी कार्यक्रम तो अम्बर जी के बिना हो ही नहीं सकता था!
अम्बर जी ने चुन चुन कर ही महिला मंडल की टीम बनाई थी। सरला जी से लेकर राधिका जी! सारे हीरे उन्होंने ही चुने थे! कभी कभी तो उन्हें भी यकीन नहीं होता था कि ये सब उन्हीं की माया थी। खैर माया का क्या कहना, वो तो हर नेता की व्यक्तिगत बात होती है! उसका मायामंडल होता ही इतना आकर्षक है कि स्त्रियाँ खींची आती हैं! अब आभामंडल का क्या किया जाए! और उस पर महिला मंडल! उसके तो कहने ही क्या? उसकी ख़ूबसूरती तो अब दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की पर थी!
इस सोशल मीडिया ने हर राजनीतिक दल के महिला मंडल को ग्लैमरस बना दिया था। पहले जहां महिला कार्यकर्ताओं को अपनी प्रतिभा दिखाने में कुछ बरस लगते थे और कई बार तो बेचारी राजनीतिक गगन  पर ध्रुव तारा बनने की आस लिए किसी घर की क्रांति बन जाया करती थीं, वहीं अब सोशल मीडिया ने एक क्लिक से ही सारी महिला कार्यकर्ताओं को एक कतार में ला दिया था। अब प्रतिभा निखर कर आ रही थी। नेताओं के सामने प्रतिभा हर तरह से खिलने लगी थी, और उस पर अम्बर जी जैसे नेता!
भगवान उन्हें हर बुरी बला से बचाए!” राधिका जी ने पच्चीसवीं बार उनका नंबर नॉट रीचेबल पाकर अपने साईं बाबा से कहा।
“अरे, राधिका, तुमने सही सुना था न! अम्बर जी यहीं से होकर गुजरेंगे न!” सरला जी ने धूप से बचते हुए पेड़ के नीचे बैठते हुए कहा
“जी दीदी! बात तो पार्टी अध्यक्ष से यही हुई थी कि आज हमारे विजयी विधायक हमारे महिला मंडल की कार्यकर्ताओं का शुक्रिया अदा करने आएँगे! दीदी, देखिये न! हमारी महिलाओं ने कितनी मेहनत की थी! अपने अपने बच्चों को न जाने कहाँ कहाँ छोड़कर अम्बर जी के लिए प्रचार करने गईं थीं! आज तो मीडिया का कवरेज मिलना ही चाहिए!” राधिका ने निराश होते हुए कहा
“कह तो तुम ठीक रही हो!” सरला जी ने हामी भरते हुए कहा
“दीदी, न जाने कितनों ने अपने घर की चायपत्ती पूरी की पूरी एक ही दिन में अपने मोहल्ले के लोगों की खातिर में खर्च कर दी, तो कईयों ने तो नेट डेटा पैक भी अपने पतियों से मार खा खा कर भरवाया था!” राधिका जी का गला रुंध गया! न जाने अपनी कार्यकर्ताओं की कुर्बानी की बात थी या अम्बर जी की बेरुखी! न जाने क्यों उनका फोन नॉट रीचेबल आ रहा था! आखिर ये कैसे हो सकता था? उन्होंने तो अपना प्राइवेट नंबर भी दे रखा था! न जाने प्राइवेट नंबर पर कितना प्राइवेट  टॉक हुआ था उन लोगों का! गला रुंध रहा था, उन प्राइवेट टॉक को याद कर कर के!
“कसम से राधिका जी! बहुत स्त्रियाँ आँखों के सामने से गुजरी होंगी! मगर कसम पार्टी की, जो कभी आपके जैसी कोई कर्मठ और दिल जान से फिदा कार्यकर्ता देखी हो!” अम्बर जी ने एक दिन उससे अपने कार्यालय में कहा था।
सच, जादू ही तो था! जादू था अम्बर जी के शब्दों में! घुल घुल रहा था! उसे तो यकीन नहीं हो रहा था कि वह इतने महान नेता के सामने बैठी है! और वह भी उनके प्राइवेट रूम में! उसकी आँखों में बहुत कुछ आ जा रहा था!
राधिका जी क्या थीं? कुछ भी तो नहीं! किट्टी पार्टी से बोर हो गयी थी, और उनके घर में खर्च इतने थे कि किट्टी पार्टी वे एफोर्ड नहीं कर पा रही थीं! ऐसे में मन बहलाने के लिए एक दिन पार्क में महिला मंडल की बैठक में वह चली गयी थीं। तब उन्हें नहीं पता था कि उनकी ज़िन्दगी इस तरह से नया मोड़ लेगी! मगर ऐसा हो गया था! उस दिन पार्टी की बैठक में ही अम्बर जी को देखा था! और सभी महिला कार्यकर्ताओं की निगाहों में अथाह श्रद्धा भाव तैर रहा था! बहुत मुद्दे थे किसी के बच्चे का इलाज होना था, किसी के बच्चे का एडमिशन होना था!
“जी, आप! आपकी कोई समस्या!” अम्बर जी ने पूछा था
“जी नहीं! जी नहीं! वो तो मैं उधर बैठी थी, तो ऐसे ही इधर आ गयी!” वह अचकचा गयी थी! अम्बर ही सफेद कुरते पजामे में बहुत सुन्दर लग रहे थे! सुदर्शन पुरुष जैसे शब्द तो मानो अम्बर जी जैसे पुरुषों के लिए ही रचे गए होंगे! कसम साईं बाबा की! उस दिन तो जैसे अम्बर जी ने उसके मन की चोरी पकड़ ली थी! उन्होंने एक गहरी निगाह उन पर डाली और कहा
“तो आ जाइए इधर, पार्टी को आप जैसे ही युवाओं की आवश्यकता है! अब हम जैसे लोगों के बाद आप ही को तो आना है! सरला जी, इन्हें भी लीजिए न अपनी टीम में! और इनकी आवश्यकता अनुसार काम दीजिए, बाद में हम इन्हें बताएंगे कि आखिर इनकी क्या जिम्मेदारियां होंगी!”
और अक्क बक्क सी राधिका राजनीति की सफेद चादर पर पैर रखकर आ गयी थी! हालांकि उसके पति ने बहुत मना किया था, मगर वह उस दिन उस सुदर्शन पुरुष का कहना टाल नहीं पाई थी। और अखबारों में वह अम्बर जी के बारे में पढ़ती रहती ही थी, तो इत्ता बड़ा आदमी उससे ये कहे कि आ जाइए, तो वे कैसे टालतीं!
आखिर, पंद्रह दिनों के बाद ही वे उनके ऑफिस में थीं! और न केवल ऑफिस में बल्कि उनके निजी कक्ष में!
“हम्म! तो आप आ ही गईं!” अम्बर जी ने पूछा था
“जी!” अपने भाग्य पर इतराते हुए राधिका ने कहा था
“तो क्या आपको लगता है कि आप क्या कर सकती हैं?” अम्बर जी ने उनकी आँखों में आँखें डालते हुए कहा
“जी सर, जो आप कहें!” राधिका जी ने आँखें नीची करते हुए कहा
“जी! वो तो मैं देखूंगा ही, कि आपको क्या जिम्मेदारी देनी है! तब तक आप सरला जी से काम समझिये!” उन्होंने राधिका जी से विदा लेते हुए कहा था
उस दिन वह एक जादू में भरी हुई आई थी! ओह! क्या नशा था! अम्बर जी! वही अम्बर जी, जिनके द्वारा किए जा रहे आंदोलनों पर अखबार फिदा रहता था, पत्रकार भी जिनके मित्र थे, पार्टी में तो कोई दुश्मन दिखता नहीं था और महिला मंडल तो उनके द्वारा ही बनाया गया था!
ऐसा जादूगर, ऐसा जादूगर राधिका से प्रभावित था और न केवल प्रभावित बल्कि अपने आप पार्टी में बुलाया था!
वह शाम राधिका जी के जीवन में अनूठी शाम थी, उनके मिडल क्लास वजूद को पहचान देने वाली शाम थी! वही उनके पति की साधारण कमाई में बंधे हुए खर्चों में भी गोलगप्पे खाने को भी अय्याशी समझने वाले साधारण जीवन की खास शाम थी! राधिका जी उछल उछल कर आज अपने साधारण  मिडल क्लास जीवन का जश्न मना रही थीं!
बहुत खास था उस शाम!
“मगर आज हुआ क्या है अम्बर जी को?” सरला जी ने उचक कर पूछा! अब उनकी महिला कार्यकर्ताओं के आने का समय होने लगा था! इक्का दुक्का आने लगी थीं! वे भी कार्यकर्ता आने लगी थीं जिन्हें सम्मानित किया जाना था! मंच तैयार था! बस अम्बर जी ही बचे थे! मगर उनका तो फोन ही नहीं लग रहा था! राधिका जी के जी में उनके प्राइवेट मेसेज मचल रहे थे!
“राधिका जी, आप मेरी ज़िन्दगी हैं! आप ने मुझे जो दिया, उससे मैं धन्य हुआ! राधिका जी!”
अपने मेसेज बॉक्स में पड़े हुए ये सभी प्राइवेट मेसेज उसे पगलाए दे रहे थे! जब तक मतगणना नहीं हुई थी, तब तक अम्बर जी के साथ उनके निजी कक्ष में निजी लम्हे संवारते हुए, उसके राजनीतिक कैरियर की योजना बना रहे थे!
“जैसे ही मैं चुनाव जीतूंगा, वैसे ही संगठन में आपको इस बार जिला स्तर पर बड़ा पद दिलवा दूंगा! आप देखिएगा, पहली बार जिला अध्यक्ष बनने का रिकोर्ड आपके ही नाम होगा!” अम्बर जी ने उन्हें अपनी बाहों का हार पहनाते हुए कहा था
राधिका जी, खुद को समर्पित करके खुद को बहुत ही सौभाग्यशाली समझती थीं! इत्ता बड़ा आदमी, उसे अपने साथ ये लम्हें बिताने का सौभाग्य दे, ये तो बिल्ली के भाग्य छींका फूटना ही हुआ न!
राधिका जी, उन प्राइवेट मेसेज और कक्ष में ही थीं अभी कि उन्हें फोन आया “क्षमा करें, अम्बर जी नहीं आ रहे हैं! आप प्लीज़ बुरा न मानियेगा, मगर पार्टी अध्यक्ष का अभी अभी फोन आया था!”
“मगर हुआ क्या है?” उन्होंने चौंकते हुए कहा! “ऐसा तो कुछ हुआ नहीं था”
“जी, अम्बर जी खुद ही आपसे बात करेंगे! रुकें!।।…………. सुनिए राधिका जी, पार्टी अध्यक्ष के पास आपकी एक सीडी पहुँची है!” अम्बर जी ने सधे हुए शब्दों में फोन पर कहा
“सीडी?” राधिका जी की आवाज़ तेज हुई!
कमरे में बैठी हुई सभी महिलाऐं चौकस हो गईं
“सीडी? कौन सी सीडी? अम्बर जी!” राधिका जी को ऐसा लग रहा था कि उनके हाथों से सब कुछ फिसल गया था
“अरे आप घबराइये मत! सीडी तो पहुँची है, मगर किसी और को अभी कुछ पता नहीं है! हां, आप कुछ दिनों के लिए थोडा परदे के पीछे रहिये! सरला जी और मुक्ता जी को महिला मंडल सम्हालने दीजिए! एक बार जिला स्तर के संगठन के चुनाव हो जाने दीजिए! फिर आपको भी कहीं न कहीं सेट करा ही देंगे और हां, इन सबका आपके घर आने वाले ठेकेदार के रुपयों पर कोई असर नहीं पड़ेगा! बस जरा देखिएगा, अपना नाम वगैर न आए, मेरा तो कुछ नहीं होगा, सीडी में आप ही स्पष्ट दिख रही हैं! और सुनिए, प्लीज़, कुछ दिनों तक फोन न करियेगा!” अम्बर जी की सधे और  सटीक शब्दों में फोन पर आवाज़ आ रही थी, और इधर राधिका जी  को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें? ये क्या हुआ! कहाँ वे जिला अध्यक्ष के पद के सपने देख रही थीं और कहाँ ये? अब क्या होगा? उन्होंने तो सबसे कह रखा था!
सरला जी ने एकदम से उन्हें गिरने से रोका!
“सीडी थी क्या?” सरला जी ने निरपेक्ष नजर से देखा।
“पिछले महीने मुक्ता की भी सीडी आई थी, चिंता न करो! अपना काम नहीं रुकता है! बस कुछ दिनों के बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा! मगर हां, एक बात! भूल कर भी महिला मंडल छोड़कर मुख्य धारा में जाने की कोशिश न करना! नहीं तो ऐसे ही सीडी आती रहेंगी!”
उधर अम्बर जी के कार्यालय में जिला अध्यक्ष, नगर अध्यक्ष आदि में जाति आदि का गणित बैठाते हुए, बात हो रही थीं, “एक और उम्मीदवार कम हुआ! अब कितने बचे!”
ठहाकों की आवाज़ उस निजी कक्ष तक पहुँच रही थी।

“जिला अध्यक्ष बनना था! हा हा हा!”
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  1. मारक .

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