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ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की जीवनी प्रकाशित होने वाली है

ऋषि कपूर और करण जौहर की आत्मकथा के बाद अब बारी है ड्रीम गर्ल कही जाने वाली हेमा मालिनी की जीवनी की. यह किताब स्टारडस्ट के चीफ एडिटर राम कमल ने लिखी है. इस जीवनी का प्रकाशन इस साल अक्टूबर में हार्पर कॉलिन्स प्रकाशन से होने वाला है. उसी महीने 16 अक्टूबर का जन्मदिन आता है. 1968 में उनकी पहली हिंदी फिल्म ‘सपनों के सौदागर’ से लेकर ‘लोक सभा’ की सदस्य मनोनीत होने तक हेमा को अनेक विवादों का सामना करना पड़ा है. तमिल फिल्मों से अपना करियर आरम्भ करने वाली हेमा मालिनी को आरम्भ में वज़न कम होने के कारण अस्वीकृति का सामना करना पड़ा था. वही हेमा मालिनी कालांतर में अपनी खूबसूरती के कारण दुनिया में जानी गयीं. उस समय वह सुन्दरता और ग्लैमर का पर्याय थी. इन्हीं हेमा मालिनी के लिए लालू प्रसाद यादव कहते पाए गए थे कि वे बिहार की सडकों को हेमा मालिनी के गालों जैसा बना देंगे.

एक वक़्त था जब हेमा मालिनी के लिए तीन बड़े स्टार्स पंक्तिबद्ध थे. उनके प्रेम के लिए धर्मेन्द्र, जीतेंद्र और संजीव कुमार प्रतिस्पर्धा में थे. संजीव कुमार का प्रस्ताव उन्होंने अस्वीकार कर दिया था जिसके कारण संजीव कुमार ने खुद को शराब में डुबो दिया और अधिक नहीं जी पाए. इस असफल प्रेम कहानी एक अन्य कोण भी था. सुलक्षणा पंडित जो संजीव कुमार को बेहद चाहतीं थीं, संजीव कुमार की मृत्यु के बाद इस हद तक खुद में सिमट गयीं थीं कि उन्होंने घर से बाहर निकलना भी बंद कर दिया था. धर्मेन्द्र और जीतेंद्र के बीच वह उलझी हुईं थीं. अपनी आत्मकथा में हेमा मालिनी स्वयं स्वीकार करती हैं कि जीतेंद्र और हेमा लगभग विवाह बंधन में बंधने वाले थे परन्तु अंत में वह धर्मेन्द्र के पास लौट आयीं तथा जीतेंद्र शोभा के पास लौट गए.  शोले की शूटिंग के दौरान जहाँ धर्मेन्द्र लाइट बॉय को गलतियाँ करने के लिए रिश्वत देते थे जिस से वह बार-बार हेमा मालिनी का आलिंगन कर सकें वहीँ संजीव कुमार ने अपना प्रस्ताव अस्वीकृत होने पर रमेश सिप्पी से निवेदन किया था कि उनके और हेमा मालिनी के दृश्य साथ न हों.

ख्यातनाम होने के अपने दुष्प्रभाव हैं. आपकी छोटी से छोटी हरक़त पर मीडिया और आम लोगों की निगाह रहती है. राजनीति के करियर में भी विवादों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा. राजस्थान की यात्रा के दौरान हुए एक्सीडेंट के बाद उनके असंवेदनशील बयान पर काफी छीछालेदार हुई थी.  लगभग तीन वर्ष पूर्व अपने निर्वाचन-क्षेत्र मथुरा के निरीक्षण के समय उन्होंने कहा था कि बंगाल और बिहार की विधवाओं को वृन्दावन नहीं आना चाहिए. वह एक बार पुनः कटघरे में थीं जब पिछले साल पुलिस और सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण किये लोगों में हुए संघर्ष में चौबीस लोग मारे गए और हेमा मालिनी अपनी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थीं. बड़े परदे पर सहृदय दीखते कलाकार असल जीवन में अक्सर चूक जाते हैं.

अपने व्यक्तिगत जीवन में हेमा बेहद मज़बूत स्त्री हैं. धर्मेन्द्र और हेमा के विवाह के बाद जहाँ धर्मेन्द्र  पहले परिवार के साथ सामन्जस्य बनाने में व्यस्त थे वहीँ हेमा जीवन के अधिकतर मोर्चे अकेले संभाल रही थीं. धर्मेन्द्र अपनी जिम्मेदारियों से विमुख नहीं हुए परन्तु हेमा ने उन पर उत्तरदायित्वों का बोझ डाला ही नहीं. बेटियों के शादी तक उन्होंने सारी जिम्मेदारियां बखूबी संभाली हैं.

हेमा मालिनी न सिर्फ अच्छी अभिनेत्री हैं बल्कि वह  भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी में भी प्रशिक्षित हैं. अनेकों बार फिल्मफेयर के लिए नामांकित होने के बाद उन्हें ‘सीता और गीता’ के लिए फिल्मफेयर मिला जिसमें अपने डबल रोल से उन्होंने सबको लुभा लिया था. सन २००० में पद्म श्री को मिलाकर उन्हें अनेक पुरस्कार मिले हैं. ऐसी इंडस्ट्री जहाँ हमेशा पुरुषों का वर्चस्व रहा है हेमा ने अपना स्थान बनाये रखा. उन्होंने व्यवसायिक दृष्टि से सफल फ़िल्में भी दीं और उतना ही वह अपनी अदाकारी के लिए सराही गयीं. राम कमल के शब्दों में हेमा बॉलीवुड की प्रथम ‘फीमेल सुपरस्टार’ हैं. अब देखना यह है कि ‘बियॉन्ड द ड्रीम गर्ल’ नाम की इस किताब में राम कमल हेमा के जीवन के किन पक्षों पर प्रकाश डालते हैं और उनके साथ कितना न्याय कर पाते हैं.

 

 
      

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