Home / Featured / ऋतुराज की कविता ‘किशोरी अमोनकर’

ऋतुराज की कविता ‘किशोरी अमोनकर’

 

 

महान गायिका किशोरी अमोनकर के निधन की खबर पढ़कर मुझे हिंदी के वरिष्ठ कवि ऋतुराज की कविता याद आई- किशोरी अमोनकर. आप भी पढ़िए- प्रभात रंजन

========================

न जाने किस बात पर

हँस रहे थे लोग

प्रेक्षागृह खचाखच भरा था

जनसंख्या-बहुल देश में

यह कोई अनहोनी घटना नहीं थी

 

प्रतीक्षा थी विलंबित

आलाप की तरह

कब शुरू होगा स्थायी

और कब अंतरा

कब भूप की सवारी

निकालेंगी किशोरी जी

शुद्ध गंधार समय की पीठ चीरकर

अंतरिक्ष में विलीन हो जाएगा

फिर लौटेगा किसी पहाड़ से धैवत

किसी पंचम को हलके से छूता हुआ

रिखब को जाएगा

 

किशोरी जी हमेशा इसी तरह

सुरों की वेदना के शीर्ष पर

पहुँचती हैं, लौटती हैं

पर वे अभी तक आईं क्यों नहीं?

स्वर काँपने और सरपट दौड़ने के लिए

बेचैन हैं…

 

लो वे आ ही गईं

हलकी-सी खाँसी और तुनकमिजाजी का जुकाम है

डाँटकर बोलीं

यह क्या हँसने का समय है?

 

 

 
      

About Prabhat Ranjan

Check Also

‘आउशवित्ज़: एक प्रेम कथा’ पर अवधेश प्रीत की टिप्पणी

‘देह ही देश’ जैसी चर्चित किताब की लेखिका गरिमा श्रीवास्तव का पहला उपन्यास प्रकाशित हुआ …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *