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मन्नू भंडारी का रचना पाठ सुनने का एक दुर्लभ मौका मत चूकिए

‘मुक्तांगन’ का यह तीसरा आयोजन है. दिल्ली के केन्द्रों में आयोजित होने वाले एक से आयोजनों की ऊब को दूर करने के उद्देश्य से बिजवासन के उषा फार्म्स में शुरू किया गया यह आयोजन अपनी स्थायी जगह बनाता जा रहा है. हर महीने इसका इन्तजार रहता है… कि इस बार के आयोजन में ऐसा क्या ख़ास है. पहले आयोजन की शुरुआत ‘मेरा राम मुख्तलिफ है’ से हुई थी. इस बार ‘एक थी सीता’ में वंदना राग, मनीषा पाण्डेय, पूर्वा भारद्वाज के साथ अविनाश मिश्र का साथ रहेगा.

लेकिन सबसे खास है इस बार ‘आपका बंटी’ जैसे उपन्यास सहित मेरी अनेक प्रिय कहानियों की लेखिका मन्नू भंडारी का रचना पाठ. मन्नू जी कई आयोजनों में पुरस्कार वितरित करते हुए तो दिखी हैं हाल के वर्षों में लेकिन उनसे रचनाशीलता को लेकर, समकालीन रचनाशीलता को लेकर उनको हाल के वर्षों में बातचीत करते हुए शायद ही किसी ने सुना हो. ‘मुक्तांगन’ के इस कार्यक्रम की क्यूरेटर आराधना प्रधान इसके लिए बधाई की पात्र हैं कि उन्होंने न केवल इसके लिए सोचा बल्कि मन्नू जी को इसके लिए तैयार भी कर लिया. सत्र है- रचनाओं की जिजीविषा: क्या होती है एक रचना की उम्र. इसमें मन्नू भंडारी के साथ होंगी प्रत्यक्षा और राहुले देव का भी सान्निध्य रहेगा.

एक सत्र रंगमंच पर होगा जिसमें नाटकों की बंद दुनिया के बाहर शायद दिल्ली में पहली बार हृषिकेश सुलभ को सुनने का मौका मिलेगा. साथ में अजित राय, टीकम जोशी और अपने प्रकाश रे होंगे.

अपनी रचनाओं के पाठ के आयोजन तो बहुत होते हैं लेकिन ऐसा कम होता है कि लेखकों से यह कहा जाए कि आप अपने पसंदीदा की रचनाओं के पाठ कीजिए. रचना पाठ के इस सत्र में विनीत कुमार कुंवर नारायण की कविताओं का पाठ करेंगे, सैफ महमूद फैज़ की रचनाओं का पाठ करेंगे, बलवंत कौर अमृता प्रीतम की कविताएँ पढ़ेंगी और मैं जौन एलिया कि कुछ ग़ज़लें पढूंगा.

बैसाख के महीने के इस दूसरे इतवार का यह दिन खास है. हाँ, यह बताना भूल गया कि उषा फार्म्स अपने आप में बहुत कलात्मक जगह है. एक कलात्मक माहौल में साहित्य-कला के सान्निध्य में दिन बिताने का आइडिया कोई बुरा नहीं है.

12 बजे से 4.30 बजे तक एक अच्छी दोपहर की फुल गारंटी टाइप लग रही है!

अपने अपने फोन में 23 अप्रैल का दिन सेव कर लीजिये.

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