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माइक इवरेट्ट की कविताएँ

माइक इवरेट्ट अमेरिकी आंचलिक उपन्यासकार हैं। लेख, कविता और कहानी भी लिखती हैं। माइक का एक परिचय यह भी है कि इनके लिखे एक कथन (जो कि एक लेख का हिस्सा है) को इंटरनेट पर दस लाख से ज़्यादा दफ़े कोट किया जा चुका है। वो कथन है, “When a writer falls in love with you, you can never die.” आइए पढ़ते हैं कुछ कविताएँ। अनुवाद मैंने ही किया है – त्रिपुरारि

प्रोसोपैगनोसिया (फेस ब्लाइंडनेस)

1.

मैं तुमसे पहले जागती हूँ
और तुम्हारे चेहरे पर फिसलती हुई धूप देखती हूँ।
तुम्हारे जबड़े पर खूटियाँ (दाढ़ी) गिनती हूँ।
कल जो बाल दस इंच लम्बे थे
आज वो पांच इंच के हैं।
मैं आँख बंद नहीं करती हूँ
हलांकि मुझे याद है
कि चेहरे पर कहाँ-कहाँ चकत्ते थे
हर एक दाग़ मुझे अच्छी तरह याद है।

2.

मैं सबका एक जैसा स्वागत करती हूँ—अस्पष्ट।
मैं नहीं जानती कि तुम्हे जानती हूँ।
अजनबी लोग सोचते हैं कि मैं असामान्य रूप से मित्रवत हूँ
और मित्र सोचते हैं कि मैं अलग हूँ।

3.

मेरे सारे दोस्त सनकी हैं।
साहस से भरा चेहरा, ऊँची नाक, गोल होंठ, प्रभावी भौंह।
मेरे सबसे अच्छे दोस्त के तीन कान थे
जब मैं चौथी कक्षा में थी।
रंगे हुए बाल और भी कई विकृतियाँ।
मैं उन लोगों को दोस्त नहीं बना सकती, जिन्हें खोने का डर होता है।

4.

ओह!
लोग यही कहते हैं
जब उन्हें अचानक एहसास होता है।
मैं एक दिन में तीस दफ़ा कहती हूँ।
कभी-कभी आईने के सामने रियाज़ भी करती हूँ।
ओह!

5.

देर रात मैं रेंगती हुई बाथरूम गई
आईना देखने के लिए,
ताकि रोम-रोम याद कर सकूँ।
मैं बेसिन से टिककर खड़ी हुई
और फिसल गई
पाँव के नाख़ुन टूटकर नाली में बह गए।
आईने से ज़रा-सी दूरी पर
मैंने अपना हाथ टिकाया।
उंगलियों के नीचे का मांस निकल आया।
मैं एक नया चेहरा ढाल सकती हूँ
और यह मेरे लिए उसी तरह का होगा।

6.

फ़क!!
सब बकबास है!
मासलोस की बुनियादी आवश्यकताएँ।
जब हम भूखे होते हैं
तब भी हमें प्रेम की आवश्यकता होती है।

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