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स्टोरीटेल के ऐप पर ‘कसप’ सुनते हुए

जब मैं करीब 12-13 साल का था तब मेरे दादाजी बहुत बीमार हो गए थे. उन दिनों वे मुझसे किताबें पढ़वाकर सुनते थे. दिनकर जी की ‘रश्मिरथी’, रामवृक्ष बेनीपुरी जी का नाटक ‘अम्बपाली’, आचार्य चतुरसेन का उपन्यास ‘वैशाली की नगरवधू’ जैसी कुछ किताबों के नाम याद आ रहे हैं जो मैंने उनको पढ़कर बार-बार सुनाये. दादाजी सुनते सुनते सो जाते थे. उन्हीं दिनों न केवल साहित्य में दिलचस्पी जगी बल्कि साहित्य किस तरह रूहानी सुकून देता है इसका अहसास भी हुआ. यह सब फिर याद आया, बार-बार याद आया जब storytel.in के ऐप पर मनोहर श्याम जोशी के उपन्यास ‘कसप’ को सुनना शुरू किया. स्टोरीटेल एक ऐप है जिसके ऊपर एक तरफ हिंदी का क्लासिक बड़ी तादाद में ऑडियो फोर्मेट में उपलब्ध है. उसके अलावा उन्होंने कुछ समकालीन पुस्तकें विशेष रूप से ऑडियो बुक्स के लिए तैयार करवाई हैं.

खैर, मैं ‘कसप’ सुनने के अनुभव की बात कर रहा था. मनोहर श्याम जोशी का यह उपन्यास प्रेम के हर्ष और विषाद का एक क्लासिक उपन्यास है. कॉलेज के दिनों से इसको कई बार पढ़ा लेकिन सुनने का अनुभव तो सबसे अलग रहा. आमतौर पर मैं कैब में या मेट्रो में सफ़र करता हूँ, अधिकांश लोगों की तरह मेरे पास भी अत्याधुनिक स्मार्ट फोन है. अधिकांश लोगों की तरह मेरे पास भी म्यूजिक के कई सारे ऐप हैं. अधिकांश लोगों की तरह मैं भी ऐप पर संगीत सुनता था. लेकिन सच बताऊँ तो दौड़ते भागते ऐसा संगीत सुनना असंभव है जो आपको रूहानी सुकून दे. टाइम पास की बात और है. फ़र्ज़ कीजिये कि आप भागते-भागते, मेट्रो स्टेशन पर चढ़ते-उतरते बेगम अख्तर की आवाज में ठुमरी सुन रहे हों या बीटल्स या क्लिफ रिचर्ड्स के टाइमलेस गीत. संगीत की एकरसता काफी समय से मेरे अन्दर ऊब पैदा कर रही थी. उस ऊब से उबरने के लिए मैंने ऐप पर किताब पढने शुरू किये. लेकिन यह अनुभव भी ठहराऊ अनुभव नहीं रहा. तभी स्टोरीटेल के ऐप पर मेरी नजर पड़ी. उसको मैंने उस जमाने में सबस्क्राइब किया जब सब्सक्रिप्शन 499 रुपये प्रति माह का था. अब तो 13 अगस्त से यह सब्सक्रिप्शन 299 रुपये का हो गया है. मतलब 299 रुपये में अपनी भाषा के असंख्य किताबों को पढना नहीं सुनना. पहले 14 दिनों के लिए मुफ्त सुनने की सुविधा भी दी गई है.

अच्छा लगा. ‘कसप’ को सुनते हुए उसी तरह गला भर आया, चश्मा उतारकर बार-बार आँखें पोछ्नी पड़ी. लेकिन करीब 15 घंटे के इस उपन्यास को त्रिलोक पटेल की आवाज में अपने स्मार्ट फोन पर आगे पीछे करके पूरा सुन ही गया. सच बताऊँ तो सुनने का अनुभव पढने के अनुभव से बहुत अलग होता है. अगर सुनाने वाला अच्छा हो तो वह अनुभव यादगार बन जाता है. फिर अपने दादाजी की बात करता हूँ. वे जब किस्से सुनाते थे तो कई बार रात बीत जाती थी और हम बच्चे पलक तक नहीं झपकाते थे. त्रिलोक पटेल के साथ ‘कसप’ सुनना नैनीताल से शुरू करके गंगौली हाट तक की कुमाऊँ की यात्रा करने सरीखा था. डीडी और बेबी के निजी जीवन को बहुत करीब से जानने जैसा था. ऐसा लग रहा था जैसे हम उनके जीवन यात्रा के सहयात्री बन गए हों.

अब सोच रहा हूँ कि अगली किताब कौन सी पढूं?

प्रभात रंजन

वेबसाईट का लिंक https://www.storytel.in/

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One comment

  1. A. Charumati Ramdas

    Very good! Please give details of this App. Who can record? The publisher or any individual?

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