Home / Uncategorized / सोनम कपूर ने किया बुक लांच

सोनम कपूर ने किया बुक लांच

21 अक्टूबर को फिल्म अभिनेत्री सोनम कपूर ने रईशा लालवानी के पहले उपन्यास ‘द डायरी ऑन द फिफ्थ फ्लोर’ का लोकार्पण किया. उपन्यास एक लड़की की आत्मकथात्मक यात्रा है जिसमें एक दिन अचानक एक मोड़ आ जाता है. दिल्ली के ताज पैलेस में हुए लोकर्पण समारोह में केन्द्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, जेनरल वीके सिंह, अभिनेता मनजोत सिंह के साथ अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे. दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा रईशा लालवानी के इस उपन्यास पर हुई चर्चा में हरिहरन, अश्विन संघी, कवयित्री स्मिता पारिख, युवा लेखक पंकज दुबे, रूपा पब्लिकेशन के कपीश मेहरा ने इस उपन्यास की तारीफ की और चर्चा के दौरान यह बात उभर कर आई कि इसकी कहानी आज कहीं न कहीं हर व्यक्ति से जुडती है. एक ऐसा समाज बनता जा रहा है जिसमें सब कुछ के बावजूद हम अकेले होते जा रहे हैं. जिन बातों को हम ऐसे अभिव्यक्त नहीं कर पाते लिखकर करते हैं.

‘द डायरी ऑन द फिफ्थ फ्लोर’ की युवा लेखिका रईशा लालवानी मुंबई, जयपुर, दिल्ली, दुबई में रह चुकी हैं और उनके लिए जिंदगी एक लम्बा सफ़र रहा है. उनका मानना है कि कुछ लोग पैसों के लिए लिखते हैं, कुछ लोगों के लिए लिखना उनका शौक होता है, वह उस शांति के लिए लिखती हैं जो लिखने से उनको हासिल होती है.

25 वर्षीय लेखिका रईशा लालवानी के उपन्यास ‘द डायरी ऑन द फिफ्थ फ्लोर’ की कथा वाचिका जब अस्पताल के पांचवें माले पर भर्ती होती है तो उसके हाथ में एक मोटी डायरी होती है, कपडे के गत्ते वाली. उस डायरी में ऐसी कहानियां नहीं हैं जो एक लड़की के जीवन के घटनाक्रमों से बनी हुई हैं बल्कि उनमें जीवन के कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब हम आज बड़ी शिद्दत से तलाश कर रहे हैं- हम अपने-अपने जीवन में कितने भावनाहीन होते जा रहे हैं, कई बार हमें कोई ऐसा नहीं मिलता जिसके सामने हम अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त कर सकें, हमारे आस-पड़ोस, अपने-परायों के जीवन में रोज-रोज यह सब घटित होता है. हम उनके बारे में सुनते हैं, थोड़ी बहुत सहानुभूति जताते हैं और भूल जाते हैं. अस्पताल के पांचवें माले पर भर्ती उस लड़की की डायरी में सब कहानियां दर्ज हैं. उसको डर है कि अगर उसने डॉक्टर को अपनी डायरी दे दी तो शायद वह उसको इस तरह की बातें सोचने के लिए, उनको लिखने के लिए पगली समझ ले. उपन्यास में डायरी के किरदार खुलते चले जाते हैं, उनकी कहानियां पसरती चली जाती हैं. लेकिन एक सवाल अहम है जो बार-बार लौट कर आता है- हम जो हो चुके हैं क्या हम उससे खुश हैं? क्या हम जिंदगी में यही हासिल करना चाहते थे?

  •  
  •  
  •  
  •  
  •   
  •  
  •  
  •  

About Prabhat Ranjan

Check Also

लेखिका वंदना टेटे को पांचवां शैलप्रिया स्मृति सम्मान

राँची से दिए जाने वाले प्रतिष्ठित शैलप्रिया स्मृति सम्मान की घोषणा हो गई है। पाँचवाँ …

Leave a Reply

Your email address will not be published.