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श्वेता मिश्र की कहानी ‘नाइजीरिया, नोरा और अजगर’

श्वेता मिश्र लागोस नाइजीरिया में रहती हैं। कहानियाँ लिखती हैं। इनकी कई कहानियाँ प्रकाशित भी हो चुकी हैं। यह एक नई कहानी है- मॉडरेटर

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एक दशक पहले यूरोप से अफ्रीका जब मेरा आना हुआ तो रुई के फाहे की तरह गिरते बर्फ की जगह यहाँ की ठंडी पुरवाई मेरे मन को लुभाती चली गयी मन हज़ार तरह की आशंकाओं से घिरा थाl यूरोप का अत्याधुनिक माहौल और यहाँ के लोग प्रकृति पर पूरी तरह निर्भरl एअरपोर्ट से बाहर आते ही कुछ दूर आने पर शांत समुन्दर जिसमे कोई भी हलचल नहीं, जिसके समुन्दर होने पर मुझे यकीं तो नही हुआ लेकिन मेरे मन में एक खूबसूरत एहसास की तरह ठहर गया l मन तुलनात्मक दृष्टिकोण से हर चीज़ को देख रहा था कभी कोई चीज़ मन में बैठती कोई सिरे से खारिज करती l रास्ते में बड़े बड़े पेड़ों से घिरे जंगलों में झांकते आम के बड़े बड़े वृक्ष आश्चर्य से मन को भर रहे थे l आम भी अलग अलग तरह के दिख रहे थे मन कौतुहल से भर उठा और ड्राइवर से पूछा की यह आम का ही पेड़ है या किसी और का? डाइवर ने एक पेड़ की देखते हुए गाड़ी को किनारे में पार्क कर दी और गाड़ी से उतर कर आम तोड़ लायाl आम को हाथ में ले कर मन इतना प्रफुल्लित हुआ कि जैसे किसी अपने बिछड़े परिजन से मिल रही हूँ l यूरोप में 5 यूरो का एक आम और यहाँ जंगल …कैसा विरोधाभास है प्रकृति पर यह दृश्य प्रत्यक्ष दिख रहा था वास्तव में यूरोप में पेड़ों के नीचे बिछे सेव भी उतना मन को प्रफुल्लित नही कर सके थे जितना अपने देश के फलों के राजा आम ने किया l यूरोप की चकाचौंध पर नैसर्गिक दृश्य हावी होने लगे थे l रास्ते भर ड्राइवर से यहाँ के भाषा और परिवेश की बातें सुनते सुनते 2 घंटे का सफर कैसे कट गया पता ही नही चला और हम अपने रिसोर्ट में आ गये l अब कुछ महीनो का अस्थायी आवास यही था और यहाँ रहते हुए अलग अलग तरह के लोगों से मिलते सुनते यहाँ की संस्कृति काफी करीब से देखने को और समझने को मिलने लगी l यहां के लोगों में भारत और भारतीय सिनेमा के प्रति सम्मान और दीवानगी , फ़िल्मी गानों को गाकर भारतीओं को रिझाने की कोशिशें कभी कभी बड़ी दिलकश भी लगती हैं l इसी बीच इक समारोह में जाने का अवसर मिला जिसमे हम शामिल भी हुए l कई तरह के लोगों से मेल मिलाप भी हुआ l समारोह में नोरा नाम की एक लड़की से भी मुलाक़ात हुई l नोरा सुन्दर मिलनसार व्यक्तित्व की स्वामिनी थी l बातों ही बातो में पता चला की उसे जानवरों से बेहद लगाव है और उसने एक अजगर पाल रखा है और वह उसके साथ सोता खेलता भी है l सुनकर मैं तो एक अनजाने भय से काँप उठी और उससे पूछ बैठी तुम्हे डर नही लगता ?
नोरा कहने लगी वह बहुत प्यारा है और अभी तो बच्चा है घर में इधर उधर घूमता है कभी कभी मैं नींद में रहती हूँ तो बिस्तर में मेरे आ जाता है और मुझ से लिपट जाता है l मुझे बड़ी हैरानी हुई अभी तो अपने देश में गाय भैंस घोडा खरगोश और कुत्ते ही पालतू पशु के रूप में देखा था और मैं उनसे भी डर जाती थी ये कहाँ मैं घने जंगल में आ गयी और ये महारानी तो मुझे मॉडर्न दिख तो रही है पर है अन्दर से भयंकर जंगली l नोरा के लिए उस अजगर से सुन्दर प्यारा और दिल के करीब जितना था उतना तो कोई नही लग रहा था और जब तक साथ थी सिर्फ उसी की बातें ,मुझे ऊब सी लगने लगी थी l किसी तरह हम वहां से निकल अपने रिसोर्ट आ गये l हालाँकि रिसोर्ट में भी शुतुरमुर्ग मोर रंग बिरंगे तोते जैसे मन मोहने वाले कुछ जानवर थे l शाम हमारी इन्ही को आस पास घूमते देखते बीत जाती l धीरे-धीरे हम भी यहाँ के माहोल से परिचित हो चुके थे और हमारे अपने आवास में शिफ्ट होने का समय भी नजदीक आ रहा था l लगभग तीन-चार महीने रहने के उपरांत हम अपने आवास में पहुच गये l नोरा भी उसी कैंपस में ही थी लिहाजा अक्सर मुलाक़ात होने लगी और उसके पालतू जानवर की बातें जो मुझे अन्दर से एक डर ही महसूस करवाती उससे सुनती रही l एक दिन मैं अपने बेटे को स्कूल से लेने जा रही थी कि नोरा मिल गयी पूछने पर पता चला कि हॉस्पिटल जा रही है उसका पालतू हफ्ते भर से खाना नही खा रहा है और अक्सर उससे कुछ ज्यादा ही लिपट रहा है l नोरा को उसके भूखे रहने से उसके मर जाने की आशंका ने घेर रखा था l खैर नोरा उसको लेकर जब डॉक्टर के पास पहुची तो डॉक्टर ने गहन जांच की जिसमे कुछ न पाया l डॉक्टर का अब अगला सवाल नोरा से था ‘क्या यह आपको लिपटता है ?’ नोरा ने बड़ी खुशी से जबाब हाँ में दिया और यह भी बताया की कभी कभी इतनी जोर से लिपटा रहता है कि उससे छुड़ाना भी थोडा मुश्किल होता है l डॉक्टर चुपचाप सुनते रहे ,नोरा की सारी बातें सुनने के बाद एक गहरी साँस लेते हुए डॉक्टर ने कहा ,”यह आपको निगलना चाहता है और जब आप से लिपटता है तो आपसे लाड प्यार में नही बल्कि आपकी माप लेता है कि आपको निगलने के लिए उसके पेट में कितनी जगह होनी चाहिए और अब यह बड़ा हो गया है तो अपनी पेट में जगह बना रहा है भूखे रह कर ” यह सुनकर नोरा के होश उड़ गये उसे समझ ही नही आया की करे तो क्या करे ,जिसे वो इतना लाड प्यार दे रही है वही उसकी मौत है और मौत भला किसको प्यारी लगती है l नोरा हास्पिटल से सीधे जंगल की ओर चली गयी और उसे ले जाकर जंगल के बाहर छोड़ आई पर उसके मन में डर ने घर कर लिया, उसने किसी भी जानवर को पालतू न रखने की कसम खा ली और मैंने राहत की साँस क्योंकि अब मुझे उसके खतरनाक पालतू के बारे में नही सुनना पड़ेगा और जिसकी वजह से मैं उसके घर में भी पैर रखने से डरती थी आसानी से आ जा सकूँगी।

Shweta Misra

Nigeria

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