Home / Featured / मृदुला शुक्ल की कहानी ‘प्रेमी के साथ फरार हुई औरत…’

मृदुला शुक्ल की कहानी ‘प्रेमी के साथ फरार हुई औरत…’

मृदुला शुक्ल की यह कहानी आजकल जिस तरह स्त्री विरोधी शीर्षकों के साथ समाचार प्रकाशित होते हैं उसको लेकर है। लेखिका ने बड़ी बारीकी से इस संवेदनशील विषय को उठाया है- मॉडरेटर

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प्रेमी के साथ फरार हुई औरत…

उस रोज भी एक औरत दो छोटे बच्चों और छोटा देवर जो उसके बच्चों जैसा ही लग रहा था वह भाभी को उनके पति  के पास  लुधियाना पहुंचाने जा रहा था को स्टेशन पर छोड़ कर प्रेमी के साथ फरार हुई थी ।

कस्बे के सारे अखबारों ने इस खबर को प्रमुखता से छापा था किसी ने एक किसी ने दो और जिसके पास जगह खाली थी उसने इसे तीन कालम की खबर बनाई सब की भाषा भले ही अलग थी मगर उस औरत को सब नरम या गरम तरीके से गालियां ही दे रहे थे ।

आप लोग यह मत समझ लीजिएगा कि मुझे प्रेमी के साथ फरार विवाहिता के साथ कोई सहानुभूति है अरे भाई मैं उस टाइप की औरत थोड़े हूँ मेरा भी यही मानना है कि अपने बच्चों और देवर को स्टेशन पर छोड़ भाग जाने वाली औरत को सबको कोसना ही चाहिए उसने काम ही ऐसा किया है । अरे भागना ही था तो घर से भागती ।

क्यों स्टेशन पर तमाशा बनाया ?

बेचारे बच्चे डरे सो अलग या मर खप जाती वहीं कहीं ।

भाग कर कौन सा पी टी उषा बन जाएगी। पर्सनली बताऊँ तो मुझे तो भागने के बजाय लड़ मरने वाले ही पसन्द हैं ।

अखबार में छपा खबर का यह टुकड़ा फूस के शहर में जलती तीली की तरह बारूद के ढेर में चिंगारी की तरह  होता है हर कोई अपना छप्पर लेकर उससे दूर भाग जाना चाहता है ।

यह खबर आज सुबह के नाश्ते में चटकार चटनी जैसी थी । जिस घर मे गयी वहां मर्दों ने ऊंची आवाज में औरतों को कुछ इस तरह सुनाया मानो उनके घर की औरतों की कोई बहन भाग गई हो ।  या फिर उन्हें अपने घरों के खस्ता हाल हालात का इल्म है उनकी औरते घरों से उनसे इस कदर ऊबी हैं कि पहला मौका मिलते ही भाग खड़ी होंगी। वे खबर सुनाने के बाद यह कहना नही भूल रहे थे कि..

भाग के बड़ा सुख पा लेगी अब कुलटा अरे जो ले जाएगा इस्तेमाल कर किसी कोठे पर बिठा देगा  नही वो खुद ही दूसरे तीसरे चौथे के साथ भागती फिरेगी जो अपने आदमी बच्चों की नही हुई वो भला किसकी होगी । यह सब सुन कर यूं लग रहा था मानो उनकी औरते अगर भागने की तैयारी में हों तो इरादा बदल दें । बातें और भी बहुत कही गईं जितने मुंह उतनी बात । बात चली थी पतंग की तरह पुछल्ले जुड़े तो उड़ान बढ़ती गयी

पान की गुमटी पर खड़े बब्बन ने मुंह में भरा गुटका थूकते हुए कहा

“अमां ऐसी भी क्या आग लगी थी अरे देवर मर्द के पास छोड़ने ही तो जा रहा एक दिन और रुक जाती “

वहीं खड़े थोड़े अनुभवी दिलशाद ने कहा जब मर्द छोड़ के परदेस चला गया तो नही रहा गया होगा।

भिड़ गया होगा टांका किसी के साथ अब जबकि आदमी के पास जाने को टैम आया तो उड़ गई आशिक के साथ …

अरे भाई ब्याह के बाद औरत को अकेला छोड़े ही काहे ।मर्द का क्या है वह तो कहीं भी मुंह मार लेवें है औरतों का भी तो मन करे है न । दिलशाद का ब्याह नही हुआ था गांव की हिन्दू विधवा से उसके सम्बन्ध थे सबको पता था उसके मन की टीस बाहर आ गयी थी  उसकी बात किसी ने गम्भीरता से नही ली ।

औरतें भी कोई कम नही थी ।

अखबार की वह कतरन को  बेटी मां से छुपा लेना चाहती  थी इस खबर को पढ़ कर मां कहीं मुश्किल से मिली थोड़ी बहुत आजाद साँसों के पर न क़तर दे ।

मां भी नही चाहती थी कि बिटिया की निगाह इस खबर पर जाए घर के जकड़न से छुड़ा उसे भी कोई भगाने वाला मिल गया तो ।

हर औरत इस खबर की आलोचना में बिना कारण और पूरी खबर जाने ही आगे रहना चाहती थी

क्योंकि आलोचना करने से चूकने पर चरित्रहीन समझे जाने का खतरा बढ़ जाता है ।।

हर किसी की जुबान पर एक ही बात थी देह की आग नही सम्भली तो औरत भाग गई। उन मूर्खों को यह नही पता कि देह के लिए औरत को भागने की क्या जरूरत हर तीसरा चौथा आदमी औरत को बिना भगाए ही देह सुख दे देगा वे तो मुंह फैलाये बैठे ही हैं औरत हां तो बोले एक बार बिस्तर तक पहुंचने वाले सौ मिल जाएंगे ।

ऐसी खबर पढ़ कर हर बार सोचती हूँ यह खबर ऐसे भी  लिखी जा सकती है

“पुरुष प्रेमिका के  साथ फरार”

मगर शायद इस खबर में नमक कम है या फिर मिर्च ।

जीभ को मजा नही है कुछ इस ख़बर में ।

 शायद सिर्फ औरत का भागना ही खबर है मर्द का क्या भागना क्या घर रहना ।

अरे बाबा भागेगा वही न जो बंधा होगा खुले का क्या वह तो पहले ही छुट्टा घूम रहा था

कुल मिलाकर खबर ऐसे बनती है जैसे खूंटा पगहा लेकर भाग गई है कोई गाय ।

जाने क्यों भाग गई वह औरत ?

दो छोटे बच्चों का मोह नही हुआ ?

मां बाप पति सास ससुर के बारे में नही सोचा ?

यह भी नही सोचा की बच्चे कितना बड़ा कलंक लेकर जिएंगे ? मगर इनके जवाब तो वही देगी न जो भाग गई प्रेमी के साथ । वह तो भाग गई हम लकीर पीट रहे हैं बस ।

उसके जाने के बाद बच्चे स्टेशन पर खड़े रो रहे थे उसका छोटा देवर  भी भकुआया सा खड़ा था । उसे समझ नही आ रहा था वह क्या करे । उसने भी रोना शुरू कर दिया थोड़ी ही देर में तमाशबीन जूट गए हर कोई यह जानना चाहता था माजरा क्या है ?

वह और बच्चे कुछ बताने की हालत में नही थे वे बस रोये ही जा रहे थे ।

लोगों ने रेलवे पुलिस को खबर कर दी यह बताते हुए की तीन बच्चे स्टेशन पर छोड़ कर एक औरत भाग गई है ।

बताने वाले के चेहरे पर तिर्यक मुस्कान थी मगर पुलिस वाले के चेहरे पर उदासीनता शायद उसके लिए यह रोज की बात होगी ।

पुलिस वाला गबरू जवान था जिम शिम करके बॉडी बनाई थी उसने अपनी टोपी और बेंत उठाया और भीड़ के साथ झूमता हुआ सा चल पड़ा उसकी बॉडी लैंग्वेज में बाहरी वातावरण के लिए अजीब से उदासीनता थी मगर अपनी देह को वह बार बार देख लिया करता था ।

भीड़ घटनास्थल पर पहुंची तीनो बच्चे अब भी बदहवास रो रहे थे दो बुजुर्ग औरतें बच्चों को चुप कराने की कोशिश कर रही थी अचानक उनके साथ कि पुरुषों ने चिल्लाकर उन्हें ट्रेन आने की सूचना दी और वे अपने घर वालों की तरफ भाग चली ।

पुलिस वाले को देखते ही भागी हुई औरत का देवर  सहम कर चुप हो गया उसके साथ ही बच्चे भी चुप हो गए । पुलिस वाले ने इशारे से पूछा

क्या हुआ ?

मेरी भाभी ट्रेन से चली गयी

देवर फिर रुआंसा हो गया उसके रुआंसा होते ही दोनो बच्चों ने रोना शुरू कर दिया ।

“चली गयी या भाग गयी बे”

 पुलिस वाले ने हड़काया औरत का देवर चुप रहा उसके चेहरे के भाव बता रहे थे कि उसे पुलिसवाले कि बात ठीक से समझ नही आयी ।

किसके साथ भागी ?

मालूम नही औरत के देवर ने हकलाते हुए कहा ।

तुम घरवालों को पता सब होता है कि किसके साथ भागी मगर तुम बताओगे नही ।

कहाँ जा रहे थे तुम ?

फिरोजाबाद

वहां कौन है ?

भाई रहता है

क्या करता है?

चूड़ी के कारखाने में काम करता है ।

क्या करने जा रहे थे ।

भाभी और बच्चों को छोड़ने

भाई की तबियत खराब है डॉ ने टीबी की शिकायत बताई है तो अम्मा ने कही की भाभी को छोड़ आओ रोटी पानी को आराम रहेगा औरत का देवर एक सांस में कह गया ।

ओह तो यह बात है । पुलिस वाले ने सोचने का अभिनय किया ।

चलो थाने पर बात करेंगे तब तक वहां अच्छा खासा मजमा लग चुका था ।

पुलिस वाले के साथ दो कांस्टेबल भी आये थे उन्होंने दोनो बैग और एक बोरी में बंधा सामान उठाया और थाने की तरफ चल पड़े ।

थाने पहुंच कर उन्हें कमरे में में बिठाया गया एक महिला कांस्टेबल आकर बच्चों के पास खड़ी हो गयी ।बच्चे रुक रुक कर रोये जा रहे थे । स्टेशन की भीड़ थाने तक आयी थी कुछ लोग कमरे के भीतर भी आए पुलिस उनका चश्मदीद के तौर पर बयान लेना चाहती थी ।

किसके साथ भागी कुछ अंदाज लगा सकते हो ?

पुलिस वाले ने पूछा

लड़के ने नही में सिर हिलाया

कोई जिसका तुम्हारे घर ज्यादा आना जाना हो ?

कोई नही ऐसा

कोई देवर

कोई जीजा ?

लड़का नही में सिर हिलाए जा रहा था

कौन सी गाड़ी में गयी ।

भोपाल सुपर फास्ट लड़के ने कही

मगर वह तो यहां रुकती नही पुलिस वाला चौंका

धीमे होते होते जरा सा रुक गयी थी बगल में खड़े आदमी ने कहा

तुम कहाँ थे उस वक्त ?

पुलिस उस वक्त भी लड़के से ही मुखातिब थी ।

हम पानी खरीद रहे थे लड़के ने कहा ।

किसी ने उसे जाते देखा क्या ?

इस बार पुलिस भीड़ से मुखातिब थी ।

जी सर हमने देखा भीड़ से कोई उत्साही बोला ।

क्या देखा ।

सर वो तो मानो पहले ही भागने को तैयार बैठी थी जैसे ही भोपाल सुपरफास्ट एक्सप्रेस स्टेशन पर थोड़ी धीमी हुई वह औरत भाग कर ट्रेन पर चढ़ गई बच्चे चिल्लाते रह गए ।

वह आदमी एक सांस में कह गया

हुलिया बताओ पुलिस वाले ने लड़के की तरफ देखते हुए रजिस्टर निकाल लिया ।

क्या नाम था भागने वाली का

सुनीता

उम्र

तीस बरस

रँग

गोरा

कद हमारे बराबर है

माने लम्बी होगी

वजन

कह कर पुलिस वाले ने खुद को करेक्ट किया

मतलब मोटी या पतली

पतली लड़के ने जवाब दिया

नाक नक्श

अब हम क्या बताए साहब ई हमारी भतीजी भाभी पर ही गयी है लड़के ने बगल खड़ी नौ दस साल की लड़की की तरफ इशारा किया ।

खूबसूरत रही होगी

कुर्सी पर बैठा गंजा हवलदार बुदबुदाया।

तभी तो कोई भगा ले गया दो बच्चों की मां तो वह कहने भर को थी औरत जवान और खूबसूरत रही होगी ।

लड़के को यह सब सुनना अच्छा नही लग रहा था यह उसकी मुखमुद्रा देख कर ही समझ आ रहा था मगर वह भय और दुख में इस तरह घिरा हुआ था कि किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने की स्थिति में नही था ।

लड़के ने गांव के चाचा को फोन कर बता दिया जो घटा था स्टेशन पर शहर के पास का ही गांव था जल्दी ही गांव से उसके मां बाप और कुछ अन्य परिजन जी आर पी थाने पहुंच गए । उनके साथ भागी हुई औरत के भाई और मां बाप भी थे

बुजुर्गों को देखते ही दोनो छोटे बच्चे और बड़ा लड़का  उनसे लिपट कर रोने लगे।

बुजुर्ग भौचक्के से मानो उन्हें कुछ समझ न आ रहा हो वे सब एक साथ ही लड़के से पूछने लगे थे सुनीता कहां चली गयी

लड़का फिर से घबरा गया मानो उससे ही कोई अपराध हुआ हो ।

वो दूसरी ट्रेन में चढ़ के चली गयी ।

अब तक पुलिस वाले भी बाहर आ चुके थे उन्होंने भीड़ को डांटते हुए कहा

क्या मजमा लगा रखा जाओ नही तो तुम्हारी भी ट्रेन छूटेगी ।

सुनीता के सास ससुर अंदर आयें उनका बयान लिखना है

दोनो बुजर्ग डरते हुए से अंदर चले गए ।

आप सुनीता के सास ससुर हैं पुलिस वाले ने दुबारा कन्फर्म किया

जी साहब कहते हुए दोनो बुजुर्गों ने हाथ जोड़ लिए ।

सुनीता का किसी से मिलना जुलना था ?

जी साहब सब नात रिश्तेदार से मिलती थी सब का ख्याल रखती थी।

किसी का ज्यादा ख्याल तो नही रखती थी?

पुलिस वाले ने झल्लाते हुए आवाज ऊंची की

नही सरकार ऐसा तो कुछ नही बूढ़े ने हाथ जोड़े जोड़े कहा ।

किसी का तुम्हारे घर ज्यादा आना जाना हो ।

नही मालिक बूढ़ा लगभग रुआंसा होते हुए बोला ।

अम्मा तुम बताओ तुम तो घर मे साथ रहती थी

क्या किसी से फोन पर ज्यादा बात करती थी ?

करती थी साहब सबसे बात करती थी अपने आदमी से बहुत बात करती थी।

तुम्हे कैसे पता कि आदमी से बात करती रही ?

क्या पता किसी और से बतिया रही हो।

अब हमें ये सब कैसे पता चलेगा कभी शक नही हुआ तो सोचा भी नही

बुढ़िया ने जवाब दिया।

फोन कहाँ हैं उसका ?

मेरे पास

देवर ने जेब से फोन निकालते हुए कहा।

तुम्हारे पास क्या कर रहा ।

रिचार्ज कराने को लिए थे तो यही रह गया ।

फोन में कुल आठ दस नम्बर डायल किये गए थे । उसके मां और पति का नम्बर सबसे ज्यादा बार डायल था ।

इसमे तो कोई बाहरी नम्बर ही नही है

कहते हुए सिपाही चुप हो गया

सिपाही को खुद से सहमत होते देख बूढ़े का हौसला बढ़ा

साहब वो ऐसे नही थी आप हमारा यकीन मानो । बहुत सीधी और भोली सी थी हमारी बहू उसने तो कभी शहर कभी रेलगाड़ी भी न देखी पढ़ी लिखी भी नही थी साहब ।

“दूसरे बुजर्ग को अंदर भेजिए आप जाइये ।”

बेहद सपाट लहजे में उदासीनता पूर्वक सिपाही ने कहा ।

सुनीता के सास ससुर बाहर आगये आकर उन्होंने उसके मां बाप को भीतर भेजा ।

लड़की के माँ बाप सास ससुर से ज्यादा बूढ़े थे वे कांपते से आकर जमीन पर बैठ गए ।

वहां नही यहां कुर्सी पर बैठिये सिपाही ने दोनो से शिष्टता पूर्वक कहा ।

अब क्या कुर्सी पर बैठे साहब लड़की ने तो हमारी नाक कटा दी ।

लड़की की मां ने ऐसे कहा मानो सिपाही ने कुर्सी पुरस्कार की तरह आफर की हो ।

मां की बात सुनते ही सिपाही की आंखों में चमक आ गयी ?

क्या आप बता सकती है वह किसके साथ भागी है ?

हमे क्या पता मालिक वह तो ससुराल में थी ।

शादी के पहले कोई प्रेम सम्बन्ध था क्या लड़की का

अरे नही साहब सोलह में तो ब्याह दी थी हमने ।

गऊ है हमारी लड़की एकदम बेजुबान

ये गऊ टाइप के बेजुबान लड़कियां ज्यादा भागती हैं ।

मुंह जोर तो लड़ती भिड़ती पड़ी रहती

भारी सी आवाज वाली महिला कांस्टेबल ने कहा ।

तीन बरस में गौना हुआ था तब से इसकी सास ने कभी भेजी ही नही हमारी बिटिया ।

चाहे तीज त्योहार हो चाहे काज परोजन हमारी बिटिया तो नैहर को तरस गयी औ हम नाती नातिन का मुंह देखने को

बुढ़िया मौका पाते ही अपना स्कोर सेट करने लगी ।

क्या ससुराल वाले उसे सताते थे ?

सिपाही ने पूछा

नही मालिक प्यार से रखते थे बहु बेटी की तरह कोई नही सताता था उसे बूढ़े ने जवाब दिया।

इस बुढ़िया की बात में मत आइयेगा यह कुछ भी बोल जाती है ।लड़की के पिता ने अपनी पत्नी की तरफ इशारा करते हुए कहा ।

भीतर के ओफ्फिस में माथा पच्ची चल रही थी

आखिर वो गयी कहाँ

क्यों गयी

किसके साथ गयी

मायके ससुराल वालों की बात से लग रहा वह  भागी नही है । कहीं ऐसा तो नही कि ससुराल वाले सताते हों अब जब पति को टी बी हो गया तो उसकी सेवा करने भेज दिया अडोस पड़ोस का कोई हो जिसे सारे हालात पता हों बहला फुसला ले गया हो ।

कहीं मामला ह्यूमन ट्रैफिकिंग का न हो ।

जिस तरह से भोपाल एक्सप्रेस यहां पर रुकी जबकि वह यहां कभी नही रुकती और वह महिला भाग कर चढ़ी उससे तो यह कोई बड़ा षड्यंत्र लगता है ।लोकेशन ट्रेस होने के खतरे के डर से फोन भी छोड़ गई ।

दूसरा सिपाही बोला ।

 महिला कांस्टेबल ने कहा “यार ये घर वाले ऐसे तो नही लग रहे सभी सीधे सीधे और भले लग रहे “दूसरी महिला कांस्टेबल बोल पड़ी ।

अरे तुम गांव वालों को नही जानती थाने आकर इनकी फट जाती है तो ये गऊ हो जाते है अपने घरों में ये चतुर सियार होते हैं ।

कोने में उनींदा बैठा व्यक्ति बोल पड़ा ।

फिर तुम्ही बताओ

आखिर वह गयी क्यों ?

फिरोजाबाद जाने वाली गाड़ी के बजाय भोपाल की गाड़ी में कैसे और क्यों बैठ गयी ?अगर गलती से भी बैठी तो सबको छोड़ कर क्यों भागी ।

लेकिन अगर वह  किसी के साथ भागी तो परिवार में कोई अनुमान क्यों नही लगा पा रहा था ।

फोन बुक देखी लड़की की कोई नम्बर बाहर का नही है सब डिलीट किया हुआ है । बहुत देर से चुप अर्दली भी बोल पड़ा ।

वह और उसका प्रेमी बेहद शातिर हैं और उसके परिवार के लोग बेहद भले और विश्वासी अंत मे पुलिस इसी  निष्कर्ष पर पहुंची ।

भोपाल स्टेशन तथा भोपाल एक्सप्रेस 0पर मौजूद  जीआरपी के सिपाहियों को खबर कर दी गयी कि झांसी स्टेशन से एक औरत अपने बच्चे और देवर को स्टेशन पर छोड़कर अज्ञात प्रेमी के साथ भाग गई । उस औरत का हुलिया और उसके कपड़े का रंग लिखवा दिया गया था । प्रेमी के बारे में कोई सूचना न होने की खबर भी कर दी गयी ।

घर के लोगों के बयान ले कर उनके दस्तखत ले लिए । दोनो बच्चे अपने चाचा से लिपटे बैठे थे ।

सबके बयान ले उनका फोन नम्बर नॉट करके पुलिस ने उन्हें इस आस्वासन के साथ घर भेज दिया कि कोई खबर मिलते ही आपको सूचित किया जाएगा।

भोपाल एक्सप्रेस स्टेशन पर लग कर झर्रर से खाली भी हो गयी रात के करीब बारह बज गए होंगे ।

पीठ पर बोरे लादे कुछ  लड़के हर सीट के नीचे झांक कर प्लास्टिक की बोतलें इकट्ठे कर रहे थे ए सी कोच के अटेंडेंट चादर तकिया तौलिए इकट्ठे कर उन्हें गिन गिन कर गट्ठर बना रहे थे कम पड़ने पर यात्रियों को गरियाये जा रहे थे ।

सब खिड़की के शटर खटाखट गिराते लाइट्स बन्द करते एक एक ट्रेन में अंधेरा छाने लगा ट्रेन में सवार जीआरपी के सिपाही स्टेशन पर पहुँच कर अपनी बंदूक दिवार से टिकाई भर थी कि अचानक बी थ्री कोच का अटेंडेंट घबराया दौड़ता हुआ सा आया ।

साहब बी थ्री का टॉयलेट नही खुल रहा वह भीतर से बन्द है उसके भीतर कोई है ।

अरे ?

लॉक तो नही अटक गया है ?

नही साहब लॉक नही अटका है वह भीतर से बन्द है ।

उसके अंदर कोई है उसके चेहरे पर दवाइयां उड़ रही थी ।

पहले सिपाही ने अपनी बंदूक उठाई ही थी कि दूसरे ने याद दिलाई

झांसी स्टेशन से एक औरत के भागने की खबर थी कहीं उसी का कुछ लफड़ा न हो ।

अटेंडेंट के साथ दोनो बी थ्री कोच की तरफ चल पड़े ।

बहुत मशक्कत के बाद दरवाजा टूटा दरवाजे के टूटते ही

वाशबेसिन के नीचे गठरी बनी भयभीत सी कोई औरत बैठी थी उसकी आंखें भय से फ़टी हुई थी सिपाहियों ने उसे वहां से बाहर आने को कहा वह वहां से टस से मस नही हुए किसी के अंदर जाने के लिए पैर रखते ही वह चिल्ला पड़ती । थोड़ी देर अनुनय विनय के बाद अटेंडेंट और पुलिस वालों ने उसे खींच कर बाहर निकाला तब तक महिला पुलिस भी आ चुकी थी ।

ट्रेन में मिली औरत को जीआरपी थाने ले जाया गया महिला कांस्टेबल ने उसे पानी पिलाया ।

शक्ल सूरत से तो झांसी वाली लगी है ।

पुलिस वाले ने कहा । मगर इसका प्रेमी कहाँ गया ?

थोड़ी देर रुकने के बाद उससे सवाल सवाल पर सवाल किए जाने लगे  ज्यादातर सवाल उसके साथी अथवा प्रेमी के बारे में थी वह मूर्खों की तरह बैठी हुई थी ऐसा लग रहा था उसे कुछ सुनाई नही दे रहा ।

वह किसी सवाल का जवाब देने की हालत में नही थी

रात के दो बजे चुके थे महिला कांस्टेबल ने उससे पूछा तुम्हे भूख लगी है क्या ।

औरत ने नही में सिर हिला दिया।

 यह उसका पुलिस वालों को दिया पहला रिस्पॉन्स था ।

थाने में चाय आयी उसे भी चाय के लिए पूछा गया ।

तब तक झांसी से औरत की फ़ोटो मंगबा ली गयी थी इसके साथ ही उसके परिजनों की भी फ़ोटो आ गयी थी । इससे यह तो तय हो गया कि यह वही औरत है लेकिन इसका प्रेमी किधर गया ?

इसने शायद उसकी बुरी नियत भांप कर खुद को बाथरूम में बन्द कर लिया होगा । या वह खुद ही इसके पैसे गहने लेकर इसे छोड़ कर भाग गया होगा।

इस तरह की तमाम अटकलों से थाने के माहौल में गर्मी आ गयी थी।

वह चाय के लिए लगातार मना करती रही । बार बार ज़ोर देने पर उसके मुंह से जो पहला शब्द निकला वह था

नही जहर !

पुलिस वालों को इसे डिकोड करते देर नही लगी ।

अजनबी खाने में जहर दे देते हैं क्या तुम यह कहना चाहती हो ?

या तुम जहर खुरानी की शिकारी हुई हो

औरत ने कोई जवाब नही दिया बस मूर्खों की तरह पलकें झपकाती वहां बैठी रही ।

रात भोर की तरफ बढ़ी औरत बुरी तरह थकी हुई थी शायद भूखी भी । वह वही दीवार से टिक कर थोड़ी देर के लिए सो गई।

झांसी जीआरपी पर खबर कर दी गयी है कि औरत तो बरामद हो गयी है मगर उसका प्रेमी नही पकड़ाया वह ट्रेन में छोड़ कर फरार हो गया है ।

औरत को सुबह झांसी भेजे जाने की व्यवस्था की गई । दस बजे की गाड़ी से एक महिला और एक पुरुष कांस्टेबल उसे लेकर झांसी रवाना हुए ।

रास्ते मे उसे बहुत बार कहा गया कि वह कुछ खा ले लैट्रिन बाथरूम चली जाए मगर वह किसी बात के लिए राजी नही वह बुत बनी दोनो पैर ऊपर किये खिड़की के बाहर ताकती रही ।

इधर उसके घर वालों को खबर कर दी गयी कि तुम्हारी औरत बरामद हो गयी है आकर इसे ले जाओ । उसके ससुर देवर जीआरपी थाने पहुंचे साथ ही साथ अखबार वाले भी आ पहुंचे ।

उसका बरामद होना पुलिस के लिए तमगे की तरह था।

अखबार वालों को खबर चाहिए थी और यह बड़ी खबर थी कि औरत बरामद हुई ।

क्या उसका प्रेमी भी पकड़ा गया खबरनवीस ने पूछा ।

नही वह औरत को ट्रेन में छोड़ कर फरार हो गया ।

ख़बरनवीस औरत का इंतज़ार करने तक थाने में रुका रहा

वह ट्रेन आ गयी जिससे औरत को आना था उसके एक महिला और एक पुलिस कांस्टेबल के साथ वह नीचे उतरी ।

ख़बरनवीस कैमरा ऑन किये बैठा था उसको देखते ही चार पांच फ़ोटो खींचे किक मार मोटरसाइकिल स्टार्ट कर चलता बना ।

इधर औरत ने पहले अपने देवर को देखा और बदहवास भागी उसकी तरफ सामने ससुर को खड़े देख कर सिर पर पल्ला कर लिया ।

उसका देवर भी धारोधार रोते हुए कह रहा था भाभी आप कौन सी रेलगाड़ी में चढ़ गई हम सब को छोड़ कर ।

औरत ने रोते रोते हुए  कहा

लाला आप काहे नही चढ़े रेलगाड़ी में बच्चों को काहे नही चढ़ाए ।

आप तो कहे थे कि जैसे रेलगाड़ी आये आप भाग के चढ़ जाईयेगा बच्चों को और सामान को हम चढ़ा लेंगे । हम जैसे रेलगाड़ी आई भाग के चढ़ गए और फिर रेल चल दी ।

हम कैसे चढ़ते भाभी वो अपनी रेलगाड़ी नही थी हम पानी लेने गए थे आप दूसरी रेलगाड़ी में चढ़ गई ।

हमे थोड़े न पता था किसमे चढ़ना है आप ही रास्ते भर समझाते आये थे न जैसे रेलगाड़ी आये भाग कर चढ़ना है सामान और बच्चों की चिंता नही उन्हें आप चढ़ा लेंगे । हम तो वही किये न लाला ।

हम कितना डर गए थे वहां पैखाना जैसी कोठरी में पहुंच के अंदर कुंडी लगा कितना देर बैठे रहे तब ये पुलिस वाले आकर हमे ले आये ।

दोनो जिले के पुलिस वाले आश्चर्य से देवर भाभी के गीले शिकवे सुन मंद मंद मुस्कुरा रहे थे ।

अगले दिन अखबार में खबर थी। “विवाहिता के नगद और गहने लेकर प्रेमी उसे ट्रेन में छोड़ कर भागा” ।

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7 comments

  1. A. Charumati Ramdas

    Wonderful!!!!!

  2. कहानी घटनाप्रधान है किंतु घटना की नाटकीयता व प्रतिक्रिया के यथार्थ को लेखिका ने बखूबी साधा है। एक घटना ही समाज मे गहरे पैठी पितृसत्ता को आइना दिखाने के लिए पर्याप्त है। हम निरीह व कमज़ोर के प्रति किस कदर जजमेंटल हैं और तथाकथित पत्रकार सिर्फ मसाला जुटाने के लिए कितने क्रूर हो सकते हैं । मृदुला के पास भाषा का सौष्ठव और तेवर है। इस बेहतरीन कहानी के लिए उन्हें बधाई।

  3. मायामृग

    सबसे तेज, सबसे पहले खबर की संस्‍कृति ने तथ्‍यों की उपेक्षा को स्‍वीकार कर लिया है। कभी अनजाने तो कभी जानबूझकर खबर अपने आधे अधूरे ज्ञान से गढ़ ली जाती है। पत्रकारिता के पतन की सजीव उदाहरण है यह कहानी।

  4. A. Charumati Ramdas

    पक्की पोस्टमॉडर्न कहानी. सिर्गेइ नोसव की ‘जानकी पुल’ पर प्रकाशित पढ़ लीजिए…. Very good!

  5. Khoobsoorat rachna

  6. प्रियंका

    कहानी बहुत ही अच्छी लगी| एक साधारण सी घटना को आपके शब्दों ने विशिष्ट और प्रभावी बना दिया |

  7. कल्पना

    महिलाओं के प्रति समाज की एकतरफ़ा सोच और “सबसे पहले सबसे तेज़” की होड़ में ग़ैर-ज़िम्मेदार होती आधुनिक पत्रकारिता के गिरते स्तर को चित्रित करती एक दमदार कहानी

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