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बीसवीं सदी का नौवाँ दशक, एल्बम गीत और मासूम प्रेम!

सुनीता मंजू सीवान के एक कालेज में पढ़ाती हैं। उनका यह लेख पढ़िए जो 80-90 के दशक के म्यूज़िक एल्बम्स के ऊपर हैं। दिलचस्प लेख है-

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अगर आपका जन्म 1980 से 1990 के दौरान हुआ है तो यह लेख आपके लिए ही है। नब्बे के दशक के प्रारंभ होते ही, संगीत की दुनिया में एक नया धमाका हुआ। तीन घण्टे की फिल्म और परिस्थितियों के अनुरूप बने गीतों से इतर ‘प्राइवेट एल्बम’ के गीतों से हमारा परिचय हुआ। ये चार से पाँच मिनट के गीत, अपने भीतर एक मुकम्मल कहानी समेटे होते थे। बस कुछ मिनटों का गीत देखिये और एक मासूम प्रेम कहानी का पूरा आनंद लीजिये। इन प्राइवेट एल्बम की शुरुआत अलिशा चिनाय, बाबा सहगल इत्यादि गायकों से हुई। ये धीरे-धीरे जनमानस पर छा गये। फिल्मों के एकरस और उबाऊ प्रेमगीतों की दुनिया में ये गीत, ताजी हवा का झोंका बनकर आए। इनमें मुखड़ा- अंतरा-मुखड़ा वाली बाध्यता न होकर नयापन था। अलिशा चिनाॅय के ‘मेड इन इण्डिया’ का जादू युवाओं के सिर चढ़कर बोलने लगा। ये इन गीतों का शुरुआती दौर था। इसके बाद दलेर मेहंदी अपनी माँ से सुने हुए पंजाबी लोकगीतों को नए संगीत की सजावट के साथ ले आते हैं और संगीत की दुनिया पर छा जाते हैं। बच्चे से लेकर बूढ़े तक ‘बोलो ता रा रा’ की धुन पर झूमने लगते हैं।

आधे दशक बीतने के पश्चात लगभग 1995 से इन प्राइवेट एल्बम गीतों के स्वर्णयुग का प्रारंभ होता है। मधुर संगीत,  मधुर गीत के साथ ही अनछुए प्रेम की झलक दिखाई देती है। ये गीत युवा मन को गुदगुदा जाते हैं। हिन्दी फिल्म जगत के बड़े- बड़े दिग्गज गायक, गीतकार, अभिनेता, अभिनेत्री इन गीतों में नज़र आते हैं। आशा भोंसले, पंकज उधास, जगजीत सिंह, नुसरत फतेह अली खान,शुभा मुद्गल,  सोनू निगम, शान, अभिजीत, की मधुर आवाजें सुनने को मिली। साथ ही रिया सेन, हर्षिता भट्ट, शाहिद कपूर, प्रियंका चोपड़ा, प्रीति झिंगयानी, रिमी सेन, राइमा सेन, विद्या बालन, जाॅन इब्राहिम, मलाइका अरोड़ा इत्यादि का मनभावन अभिनय देखने को मिला जो आगे चलकर बॉलीवुड के लिए वरदान साबित हुए। फाल्गुनी पाठक, पलाश सेन, हरभजन सिंह मान, लक्की अली के एल्बम इसी दौर में आए। बैंड ऑफ ब्वायज़,  यूफोरिया, वीवा इत्यादि बैंड की स्थापना भी हुई। इस दौर में एल्बम गीतों ने न केवल  सफलता की बुलन्दियों को छुआ, बल्कि संगीत जगत को एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट गीत दिये। नब्बे के दशक के एल्बम गीतों को मुख्यतः छः श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है।

(क) गज़ल एल्बम गीत:- पंकज उधास, जगजीत सिंह, अदनान सामी, आशा भोंसले इत्यादि ने गज़ल एल्बम निकाले, जो बहुत ही हिट हुए। छोटी- छोटी मासूम प्रेम कहानियां इन गज़लों को सरस बनाती थीं। पंकज उधास की गज़ल ‘और आहिस्ता कीजिए बातें’ दो देशों और दो संस्कृतियों के बीच की प्रेम कहानी थी। संदेश स्पष्ट था कि प्रेम में शब्द व भाषा गौण हो जाते हैं। जहाँ एक दूसरे से लगाव हो, सच्चा प्रेम हो वहाँ सांस्कृतिक भिन्नता भी रुकावट नहीं बनती। ‘चुपके- चुपके सखियों से वो’ , ‘चांदी जैसा रंग है तेरा’ में भी पहले प्यार की मासूमियत थी।

जगजीत सिंह, आशा भोंसले और लता मंगेशकर की आवाज में ‘देख के तुमको होश में आना भूल गये’ गज़ल में जुड़वा बहनों की कहानी थी जो एक ही लड़के से प्रेम करती हैं। अदनान सामी, आशा भोंसले की गज़ल ‘कभी तो नज़र मिलाओ’ ने खामोश प्रेम और उसकी जीत को दर्शाया। ‘तेरा चेहरा जब नज़र आए’ और ‘भीगी भीगी रातो में’ गज़लें भी लाजवाब थी।

(ख) पाॅप पंजाबी एल्बम गीत:- नब्बे के दौर में पंजाबी पाॅप एल्बम के कारण पंजाबी भाषा पूरे भारत में लोकप्रिय हो गयी। दलेर मेहंदी, जसबीर जस्सी, हरभजन सिंह मान,  जसपिंदर नरुला, हंसराज हंस, सुखविंदर इत्यादि गायकों का जादू युवा वर्ग के सिर चढ़कर बोलने लगा। इस दौर के गीतों में नृत्य, संगीत के अतिरिक्त दृश्य कहानियां भी कमाल की होती थी। शाज़िया मंजूर द्वारा गाया हुआ गीत ‘घर आ जा सोनिया’ एक गूंगी-बहरी तैराक लड़की के प्रेम विवाह और उस प्रेम के त्रासद अंत को दिखाता है। तलाक के पश्चात वह तैराकी में अपनी किस्मत आजमाने चली जाती है। ‘मुंडा तू है पंजाबी सोना’ गीत में जसपिंदर नरुला ने पहली नज़र के प्यार को दिखाया। यहाँ आम धारणा से भिन्न प्रेम की पहल नायिका की ओर से होती है। ‘गुड़ नाल इश्क मिट्ठा’ पंजाबी फिल्म ‘यारी जट्ट दी’ का लोकप्रिय गीत था। इसे मल्कित सिंह द्वारा रीमिक्स एल्बम गीत बनाया गया, जो अत्यंत प्रसिद्ध हुआ। मलाइका अरोड़ा और जस अरोड़ा अभिनीत इस गीत में बहन की शादी में नायक के शहरी महिला मित्र के आने और परिवार द्वारा उन दोनों के प्रेम को मंजूरी देने की कहानी थी। हंसराज हंस के एल्बम ‘चोरनी’ के सभी गीत मधुर संगीत के साथ मधुर प्रेम कहानियां समेटे हुए थे। ‘तेरी झांझर’ गीत में ट्रेन में एक अजनबी लड़की की झांझर देखकर नायक दीवाना हो जाता है। ‘लाल गरारा’ , ‘दिल चोरी साडा हो गया’ पंजाबी पाॅप गीतों की शान थे।

(ग) मधुर हिन्दी एल्बम गीत:- फाल्गुनी पाठक को इन गीतों का सरताज कहा जा सकता है। एक से बढ़कर एक एल्बम गीत इन्होंने संगीत जगत को दिये। गीत संगीत की मधुरता के साथ ही अनछुई प्रेम कहानियों की ताजगी थी। जो किशोर और युवा मन को छू जाती थी। प्रौढ़ और वृद्ध भी अपने पहले प्यार की यादों में खो जाते थे। ‘चूड़ी जो खनकी हाथ में’ , ‘मैंने पायल है छनकाई’ , ‘मेरी चूनर उड़ उड़ जाए’ , ‘ओ पिया, ओ पिया’ , ‘अइयो रामा हाथ से ये दिल खो गया’ , ‘सावन में मोरनी बनके’ , ‘ये किसने जादू किया’ , ‘दिल झूम झूम नाचे’ इत्यादि गीतों की लम्बी फेहरिस्त है। इन गीतों की ताजगी भरी मासूम प्रेम कहानियां हृदय को छू जाती थी।

‘ये है प्रेम’ एल्बम के गीत ‘छुई-मुई सी तुम लगती हो’ , ‘जँच गई जँच गई कुड़ी जँच गई’ , ‘कब से तेरा है इंतजार’ , ‘ओ प्रिया’ इत्यादि गीतों का क्या कहना। प्रेम कहानी बिल्कुल अपने आसपास की लगी। पलाश सेन का यूफोरिया बैंड और काॅलेज फेस्ट में इस बैंड की प्रस्तुति उस दौर के युवा आज तक नहीं भूल पाते हैं। ‘धूम पिचक धूम’ , ‘कभी आना तो मेरी गली’ , ‘मायरी’ इत्यादि प्रमुख गीत थे। सभी के अंत में प्रेम की जीत दिखाई देती है। शास्त्रीय संगीत के उस्ताद सुल्तान खान, नुसरत फतेह अली खान, शुभा मुद्गल भी इस दौर के एल्बम गीतों के आकर्षण से स्वयं को बचा न सके। या यूं कहें कि इन गीतों के द्वारा आम दर्शकों को शास्त्रीय संगीत का आनंद मिला। ‘पिया बसंती रे’ गीत एक आतंकवादी की मासूम प्रेम कहानी को दिखाता है। ‘पिया रे पिया रे थारे बिना लागे नाही मोरा जिया रे’ में ग्रामीण नवविवाहित का प्रेम और पति के शहर जाकर माॅडल बनने, प्रसिद्धि पाने पुनः पत्नी के पास लौट आने की कहानी दिखाई गई। ‘ले जा ले जा रे महकी रात में चुरा के सारे रंग ले जा’ उस्ताद सुल्तान खान और श्रेया घोषाल द्वारा गाया गया गीत था। इस गीत में संभवतः पहली बार  फैशन की दुनिया में यौन शोषण को दिखाया गया। बस स्टॉप पर बने चित्र और उस पर बनाए गए स्कैच द्वारा नायिका की मुलाकात सच्चे प्रेमी से होती है। ‘सीखो न नैनो की भाषा पिया’ गीत में नवविवाहित जोड़े का प्रेम दिखाया गया।

‘अब के सावन ऐसे बरसे’ , ‘चमक चम चम चमके है सितारों में तू ही’ , ‘चूड़ी भी जिद पे आई है’ , ‘गोरी तेरी आँखें कहें’ , ‘रात शबनमी भीगी चाँदनी’ , ‘यारों सब दुआ करो मिलके फरियाद करो’ ,’आँखों में तेरा ही चेहरा धड़कन में तेरी ही बातें’ इत्यादि उम्दा गीतों की लम्बी फेहरिस्त है। इन गीतों की खासियत यह थी कि कानों को तो सूकून मिलता ही था, आँखों को भी एक मासूम प्रेम कहानी देखने को मिलती थी।

(घ) पुराने गीतों के रीमिक्स:-  इस दौर में पुराने फिल्मी गीतों के रीमिक्स भी एल्बम के रूप में सामने आए। ‘नाम गुम जाएगा’ , ‘रोज़ रोज़ आँखों तले’ , ‘ऐ मेरे दिल के चैन’ , ‘ आदि गीत नई प्रेम कहानियों के साथ और मासूम लगे। ‘चढ़ती जवानी मेरी चाल मस्तानी’ , ‘कांटा लगा’ , ‘न न न मेरी बेरी के बेर मत तोड़ो’ इत्यादि गीत  अतिरिक्त धुनों के साथ डांस नम्बर के रूप में रीमिक्स हुए।

(ड़) क्षेत्रीय लोकगीत:- राजस्थान,  हरियाणा, उत्तर प्रदेश,  पंजाब के लोकगीतों पर भी एल्बम निकाले गए। ‘रंगीलो म्हारो ढोलना’ , ‘मिसरी को बाग लगा दे रसिया’ , ‘हमरो गुलाबी दुपट्टा’ , ‘ततैया ने काट खाया’ , ‘छोरा कूद पड्यो मेले में’ , ‘काला शा काला’ इत्यादि गीत उल्लेखनीय हैं। हिन्दी के दर्शकों को विभिन्न लोकगीतों एवं विभिन्न संस्कृतियों से परिचित करवाने का श्रेय इन गीतों को जाता है।

(च) सूफी एल्बम गीत:- ‘आफरीं आफरीं’ , ‘अली मोरे अंगना दरस दिखा’ , ‘मायरी’ , ‘सय्योनी’ इत्यादि गीतों को इस श्रेणी में रखा जा सकता है। सूफी गीतों की पवित्रता और रहस्यात्मकता से हिन्दी के दर्शक परिचित हुए।

इस दौर के एल्बम गीतों से गुजरना  अपने बचपन और किशोरावस्था को पुनः जीने जैसा अहसास है। अफ़सोस है कि गीत संगीत की दुनिया में फिल्मी गीतों का आकलन अक्सर होता है। परन्तु इन एल्बम गीतों को भुला दिया गया। इक्कीसवीं सदी में जन्मी नई पीढ़ी साठ के दशक से लेकर आज तक के फिल्मी गीतों से परिचित है, परन्तु इन सुनहरे एल्बम गीतों से नहीं। आज के दौर के एल्बम गीत शोर शराबे से भरे, नशे को बढ़ावा देने वाले, पार्टियों में थिरकने वाले भावशून्य गीत हैं। नब्बे के दौर के एल्बम गीत एक सुनहरे स्वप्न की तरह हमारे मानसपटल पर छाए हैं।

 
      

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