Home / Prabhat Ranjan (page 18)

Prabhat Ranjan

अन्नपूर्णा देवी की संगीत-साधना हरिदासी है, निर्मोही है!

प्रवीण झा आजकल शास्त्रीय संगीत पर इतने रस के साथ लिखते हैं कि मेरे जैसा संगीत ज्ञानहीन भी संगीत समझकर उसका आनंद लेना सीख गया है. यही संगीत-लेखकों का काम भी होना चाहिए- आम पाठकों को संगीत दीक्षित करना. अन्नपूर्णा देवी पर लिखा उनका यह आलेख पढ़ कर बताइए कि क्या …

Read More »

महात्मा गांधी और कॉपीराइट का सवाल

रामचंद्र गुहा ऐसे ऐसे विषयों पर लिखते हैं जिनको पढना रुचिकर भी लगता है और बहुत अच्छी जानकारी भी मिलती है. उनका यह लेख आज ‘दैनिक हिन्दुस्तान’ में प्रकाशित हुआ है. महात्मा गांधी और कॉपीराइट विषय पर. साभार प्रस्तुत है- मॉडरेटर ================================= आर ई हॉकिंस ऐसे अंग्रेज थे, जिन्हें ज्यादा …

Read More »

अंजलि देशपांडे का नाटक ‘अंसारी की मौत की अजीब दास्तान’

अंजलि देशपांडे के दो उपन्यास, एक कहानी पढ़कर उनका मुरीद हुआ. उनकी रचनाओं में प्लॉटिंग होती है, सामाजिक सन्दर्भ होता है और गज़ब की रोचकता होती है. उनका यह सम्पूर्ण नाटक पढ़िए- प्रभात रंजन ========================                        मौत कहीं दूर से आवाज़ देती है                                    या                          अंसारी की मौत की …

Read More »

मी टू के लिए शक्ति के पर्व से बेहतर मौका और क्या हो सकता है?

मीटू अभियान के बहाने एक अच्छा लेख वरिष्ठ पत्रकार-लेखिका जयंती रंगनाथन का आज ‘दैनिक हिन्दुस्तान’ में पढ़ा. साझा कर रहा हूँ- प्रभात रंजन ============================ हैशटैग-मी टू की गुहार हमारे यहां भी पहुंच ही गई। इस अभियान के लिए शक्ति के पर्व से बेहतर मौका और क्या हो सकता है? हर दिन …

Read More »

अनुकृति उपाध्याय की कविता ‘अभी ठहरो’

मीटू अभियान से प्रेरित यह कविता युवा लेखिका अनुकृति उपाध्याय ने लिखी है. आपके लिए- मॉडरेटर ========= अभी ठहरो अभी ठहरो अभी हमने उठाए ही हैं कुदालें, कोंचने , फावड़े हमें तोड़ने हैं अभी कई अवरोध ढहाने हैं मठ और क़िले विस्फोटों से हिलाने हैं पहाड़-सरीख़े वजूद तुम्हारे पैरों-तले की …

Read More »

रईशा लालवानी और उनका उपन्यास ‘द डायरी ऑन द फिफ्थ फ्लोर’

‘द डायरी ऑन द फिफ्थ फ्लोर’ की युवा लेखिका रईशा लालवानी मुंबई, जयपुर, दिल्ली, दुबई में रह चुकी हैं और उनके लिए जिंदगी एक लम्बा सफ़र रहा है. उनका मानना है कि कुछ लोग पैसों के लिए लिखते हैं, कुछ लोगों के लिए लिखना उनका शौक होता है, वह उस …

Read More »

आलोक प्रकाश की कहानी ‘एक कामकाजी सोमवार’

आज सोमवार है. पढ़िए आलोक प्रकाश की कहानी. आलोक मुंबई में टाटा कन्सलटेन्सी सर्विसेज में काम करते हैं और अपने पेशेवर दुनिया के अनुभवों को कहानियों में ढालते हैं. यह कहानी भी बहुत समकालीन है- मॉडरेटर ================== स्वाती के आफ़िस लाइफ में तीन पुरुषों का बड़ा दखल है- रवि,श्याम और महेश। …

Read More »

नीलिम कुमार की कविताएँ

नीलिम कुमार की ये कविताएँ उनके कविता संग्रह ‘एक खाली घर घुस आया मेरे भीतर’ से ली गई हैं. संग्रह प्रकाशित हुआ है धौली बुक्स प्रकाशन से. धौली बुक्स भुवनेश्वर केन्द्रित प्रकाशन गृह है. यहाँ से हिंदी, अंग्रेजी और ओडिया में श्रेष्ठ साहित्यिक पुस्तकों का प्रकाशन हुआ है. इस प्रकाशन की …

Read More »

बंदिशकार और संगीतकार बादशाह औरंगजेब

पिछले एक-दो बरसों में फेसबुक पर प्रवीण झा ने शास्त्रीय संगीत पर बेहद रोचक शैली में लिखना शुरू किया है और उनके मेरे जैसे कई मुरीद पाठक हैं.  आज सुबह-सुबह उनका एक दिलचस्प लेख पढ़ा औरंगजेब और संगीत पर. शीर्ष संगीत इतिहासकार स्व. गजेंद्र नारायण सिंह की मरणोपरांत प्रकाशित किताब “मुस्लिम …

Read More »

तकनीक ने बढ़ाया भारतीय भाषाओं का दबदबा

आज ‘दैनिक हिंदुस्तान’ में पत्रकार-लेखक उमेश चतुर्वेदी का लेख प्रकाशित हुआ है जिसमें उन्होने आंकड़ों के आधार पर यह बताया है कि किस तरह तकनीक ने भारतीय भाषाओं को एक नई मजबूती प्रदान की, नई उड़ान दी है, नया आत्मविश्वास दिया है। साभार पढ़िये- जानकी पुल ============================ भाषाओं को लेकर …

Read More »