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Prabhat Ranjan

वे हिंदी की शर्म में डूबे अंग्रेजीदां बच्चे थे

युवा कवि अच्युतानंद मिश्र को इंडपेंडेंट मीडिया इनिशिएटिव की ओर से दिया जाने वाला शब्द-साधक युवा सम्मान दिया गया है. जानकी पुल की ओर से उनको बधाई. प्रस्तुत हैं उनकी कविताओं की एक बानगी- जानकी पुल. ========================== 1. जब उदासी ढूंढ रही थी मुझे             …

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वाल्ट डिज्नी की जीवन-यात्रा हिंदी में

पिछले बरसों में हिंदी के प्रकाशन-जगत में तेजी से बदलाव हुए हैं. हाल के दो उदाहरणों का ध्यान इस सन्दर्भ में आता है- एक, स्टीव जॉब्स की जीवनी, जिसके हिंदी अनुवाद को हिंद पॉकेट बुक्स ने प्रकाशित किया. दूसरे, ‘सदा समय के साथ’ रहने वाले वाणी प्रकाशन ने एनिमेशन के …

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चंदन पांडे की कहानी ‘भूलना’

यह खबर पढ़ी कि स्मृतियों से देश-महादेश रचनेवाले लेखक मार्केस को भूलने की बीमारी हो गई है तो मन को बड़ा धक्का लगा. शब्दों से जादू रचने वाले उस महान कथाकार को शायद हम हमेशा एक जादूगर की तरह देखते रहना चाहते थे- एक से एक पात्रों, स्थानों की रचना …

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‘कवि के साथ’ में कविता की बात

बिना कुछ अधिक बताए, किसी दावे के ‘कविता के साथ’ अपने नियमित आयोजन के पहली वर्षगांठ के करीब पहुँच गई है. ८ फरवरी की शाम युवा कवि सुधांशु फिरदौस, ‘भारतभूषण’ कवि गिरिराज किराडू और असद जैदी को सुनते हुए यह ख़याल बार-बार आता रहा कि शायद यह अकेला आयोजन है …

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संवेदना को मार रही है अपनी भाषा में अत्याचार की आवाज़ !

असद जैदी का नाम हिंदी कविता में किसी परिचय का मोहताज नहीं है. अपनी स्पष्ट राजनीति, गहरी संवेदना और तेवर के लिए अलग से पहचाने वाले इस कवि को पढ़ना अनुभव की एक अलग दुनिया से गुजरना होता है. आज इण्डिया हैबिटेट सेंटर में शाम सात बजे ‘कवि के साथ’ …

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काफ़िर जिसे सुन नहीं सकते

गिरिराज किराडू की कविताएँ बगैर किसी हो-हल्ले के, बगैर कोई चीख-पुकार मचाये बहुत कुछ कह जाती हैं. ८ जुलाई की शाम इण्डिया हेबिटेट सेंटर में ‘कवि के साथ’ में दिल्लीवालों के लिए इस निराले कवि को सुनने का अवसर होगा जो कविता में सहजता का कायल है. हिंदी की दूसरी …

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बच्चन सिनेमा और उसकी ईर्ष्यालु संतति

अनुराग कश्यप ने सिनेमा की जैसी बौद्धिक संभावनाएं जगाई थीं उनकी फ़िल्में उन संभावनाओं पर वैसी खरी नहीं उतर पाती हैं. ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ का भी वही हाल हुआ. इस फिल्म ने सिनेमा देखने वाले बौद्धिक समाज को सबसे अधिक निराश किया है. हमारे विशेष आग्रह पर कवि-संपादक-आलोचक गिरिराज किराडू ने …

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अब मनोरंजन के लिए कोई कहानी नहीं लिखता

स्वयंप्रकाश का नाम हिंदी कहानी में किसी परिचय का मोहताज नहीं है. उनसे यह बातचीत वरिष्ठ कवि नन्द भारद्वाजने की है. प्रस्तुत है कवि-कथाकार की यह दुर्लभ बातचीत- जानकी पुल. ============================================================ नंद भारद्वाज – प्रकाश, आप सातवें और आठवें दशक की हिन्‍दी कहानी में न केवल एक कथाकार के बतौर …

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उत्तर-आधुनिक परिदृश्य में प्रो-एक्टिव विवेक

गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु सुधीश पचौरी की याद आई तो युवा विमर्शकार विनीत कुमार के इस लेख की भी जो उन्होंने पचौरी साहब की आलोचना पर लिखी है. संभवतः उनकी आलोचना पर इतनी गंभीरता से लिखा गया यह पहला ही लेख है. यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी पत्रिका …

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आपके चारों तरफ बस आईने ही आईने हैं

अरुण प्रकाश एक सशक्त कथाकार ही नहीं थे बल्कि एक संवेदनशील कवि भी थे. आज उनकी दो गजलें और एक कविता प्रस्तुत है. जिन्हें उपलब्ध करवाने के लिए हम युवा कवि-संपादक सत्यानन्द निरुपम के आभारी हैं- जानकी पुल.  =========== 1.  सिले होंठों से वही बात कही जाती है  ख़ामोशी चुपचाप …

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