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Prabhat Ranjan

क्या आलोचना अपने संतुलन का विवेक खो रही है?

युवा लेखक-आलोचक राकेश बिहारी ने हिंदी आलोचना की ‘आलोचना’ की है. आप उनसे सहमत हो सकते हैं असहमत हो सकते हैं, लेकिन बहस के कुछ बिंदु तो उन्होंने इस लेख में उठाये ही हैं- जानकी पुल. ================================================================ बहुत दिन नहीं बीते हैं जब एक पत्रिका में प्रकाशित एक कवर स्टोरी …

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आगबबूला और झागबबूला

विनोद खेतान की किताब ‘उम्र से लंबी सड़कों पर’ की समीक्षा कुछ दिनों पहले प्रियदर्शन ने लिखी थी, जिसके बहाने उन्होंने गुलजार का गीतकार के रूप में एक मूल्यांकन भी करने की कोशिश की थी. उसका एक प्रतिवाद कल ‘जनसत्ता’ में निर्मला गर्ग का छपा था. यह प्रियदर्शन का जवाब …

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नामवर सिंह की कविताएँ

हाल में ही राजकमल प्रकाशन से एक किताब आई है ‘प्रारंभिक रचनाएं’, जिसमें नामवर सिंह की कुछ शुरूआती रचनाओं को संकलित किया गया है. संपादन भारत यायावर ने किया है. उसमें नामवर जी की कुछ आरंभिक कविताएँ भी हैं. उसी में से कुछ चुनी हुई कविताएँ आपके लिए- जानकी पुल. ==================================================  …

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दिल ये कहता है कोई याद शहर बाक़ी है

युवा लेखक त्रिपुरारि कुमार शर्मा ने नीलेश मिश्रा के ‘याद शहर’ की एक अच्छी समीक्षा लिखी है. आप भी पढ़िए शायद अच्छी लगे- जानकी पुल. ========================= मशहूर विचारक ‘बेकन’ का कथन है, “कुछ किताबें चखने के लिए होती हैं, कुछ निगल जाने के लिए। और कुछ थोड़ी-सी चबाने और पचाने …

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फणीश्वरनाथ रेणु का दुर्लभ रिपोर्ताज ‘जय गंगा!’

महान गद्यकार फणीश्वर नाथ रेणु जी का यह दुर्लभ रिपोर्ताज जय गंगा   प्रस्तुत है- जो रेणु रचनावली में भी उपलब्ध नहीं है- रेणु साहित्य के अध्येता श्री अनंत ने अपनी साईट www.phanishwarnathrenu.com पर इसे  प्रस्तुत किया है- इसकी ओर हमारा ध्यान दिलाया पुष्पराज जी ने- सबका आभार—– जानकी पुल   ————————————————————————————————————— …

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महादेवी वर्मा के शब्द और चित्र

महादेवी वर्मा की काव्य-पुस्तक ‘दीपशिखा’ १९४२ में छपी थी. उसका ऐतिहासिक महत्व है क्योंकि इसकी कविताएँ महादेवी जी की हस्तलिपि में है और हर पृष्ठ, हर कविता के साथ उनके बनाए रेखाचित्र हैं. उसके कुछ पृष्ठ हमें कवयित्री आर. अनुराधा ने भेजे हैं अपनी एक संक्षिप्त भूमिका के साथ. आपके …

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निलय उपाध्याय और मुंबई की लोकल

निलय उपाध्याय ठेठ हिंदी के कवि हैं. उनकी कविताओं में वह जीवन्तता है जिससे पता चलता है कि वे जीवन के कितने करीब धडकती हैं. मुंबई की लोकल को लेकर उन्होंने एक कविता श्रृंखला लिखी है, उसकी कुछ कवितायें आपके लिए- जानकी पुल. =======================  लोकल के डब्बे में हिरोईन  लोकल …

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यह उम्मीद है जो हमें बचाए रखती है

प्रियदर्शन मूलतः कवि हैं और हाल के दिनों में कविता में जितने प्रयोग उन्होंने किए हैं शायद ही किसी समकालीन कवि ने किए हों. प्रचार-प्रसार से दूर रहने वाले इस कवि की कुछ नई कविताएँ मनोभावों को लेकर हैं. आपके लिए- जानकी पुल. ======================================= कुछ मनोभाव प्रेम और घृणा प्रेम …

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इस आयोजन में कई परंपराएं टूटी हैं

हमारे प्रिय लेखक असगर वजाहत ने पटना लिटरेचर फेस्टिवल के बहाने साहित्य और सत्ता के संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. आप भी देखिये- जानकी पुल. =========================================== पिछले महीने बाईस से चौबीस मार्च तक चले पटना साहित्य समारोह के संबंध में रपटें और समाचार प्रकाशित हो चुके हैं …

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जिसने औपनिवेशिक भाषा को औपनिवेशिक अहंकार से मुक्त करवाया

महान लेखक चिनुआ अचीबे को श्रद्धांजलि देते हुए यह लेख मैंने यह लेख लिखा था, जो कल ‘दैनिक हिन्दुस्तान’ में प्रकाशित हुआ था. आप लोगों से साझा कर रहा हूँ- प्रभात रंजन  =================================================== चिनुआ अचीबे के उपन्यास ‘थिंग्स फॉल अपार्ट’ का नायक पर ओकोनक्वो पूछता है- ‘क्या गोरा आदमी ज़मीन …

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