Home / Prabhat Ranjan (page 190)

Prabhat Ranjan

कितने ही चाँद रोने लगे हैं सियारों की तरह

70 के दशक के आरम्भ में अशोक वाजपेयी सम्पादित ‘पहचान सीरीज’ ने जिन कवियों की पहचान बनाई थी दिविक रमेश उनमें एक थे. अर्सा हो गया. लेकिन दिविक रमेश आज भी सृजनरत हैं. अपने सरोकारों, विश्वासों के साथ. उनकी कविता का मुहावरा जरूर बदल गया है लेकिन समकालीनता से जुड़ाव …

Read More »

किनारे बैठी औरत धोती रहती है अपने शोक

हाल के दिनों में जिन कुछ कवियों की कविताओं ने मुझे प्रभावित किया है महेश वर्मा उनमें एक हैं. हिंदी heartland से दूर अंबिकापुर में रहने वाले इस कवि की कविताओं में ऐसा क्या है? वे इस बड़बोले समय में गुम्मे-सुम्मे कवि हैं, अतिकथन के दौर में मितकथन के. मार-तमाम …

Read More »

नीलाभ की महाभारत कथा

हाल के बरसों में नीलाभ की चर्चा अरुंधति रे से लेकर चिनुआ अचिबे के शानदार अनुवादक के रूप में रही है. लेकिन नीलाभ मूलतः एक गंभीर कवि और लेखक हैं. अभी हाल में ही उन्होंने महाभारत कथा को आम पाठकों के लिए तैयार किया है. ‘मायामहल’ और ‘धर्मयुद्ध’ के नाम …

Read More »

पहाड़ से गिरती एक नदी

अम्बरीश कुमार सजग और बेधड़क पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं. लेकिन वे रचनात्मक गद्य भी उतना ही सुन्दर लिखते हैं. विशेषकर यात्रा-संस्मरण. यह यात्रा-संस्मरण बस्तर का है. वहां का जीवन-जगत जीवंत हो गया है- जानकी पुल.   ———————   कांकेर के आगे बढ़ते ही तेजी से दिन में ही …

Read More »

हिंदी में हंसना अंग्रेजी में हंसने से अलग है

उत्तर आधुनिकता के विद्वान सुधीश पचौरी जिस विषय पर लिखते हैं उसका एक नया ही पाठ बना देते हैं- हमारे जाने समझे सबजेक्ट को हमारे लिये नया बना देते हैं- उदहारण के लिए सरिता_मार्च (प्रथम अंक) व्यंग्य  विशेषांक में प्रकाशित हंसी पर यह लेख. आपके लिए प्रस्तुत है- जानकी पुल.  —————————————————————————————————————————————————   …

Read More »

सूर्यनाथ सिंह की कहानी ‘जो है सो’

सूर्यनाथ सिंह जनसत्ता के संजीदा पत्रकार ही नहीं हैं, बेहतर किस्सागो भी हैं. उनकी कहानियों में वह दुखा-रुखा गाँव अपनी पूरी जीवन्तता के साथ मौजूद रहता है जो अब भी विकास के वादों के सहारे ही जी रहा है, जो धीरे-धीरे हिंदी कहानी से गायब होता जा रहा है. फिलहाल …

Read More »

नयी पीढ़ी उन्मुक्त होकर जीना चाहती है

नमिता गोखले भारतीय अंग्रेजी की प्रमुख लेखिका हैं. अंग्रेजी साहित्य के ‘बूम’ के दौर में उनके उपन्यास ‘Paro: Dreams of Passion’ की बड़ी चर्चा हुई थी. अभी हाल में ही उनकी कहानियों का संचयन आया है ‘The Habit of Love’. प्रस्तुत है उनसे एक बातचीत. बातचीत की है हिंदी के …

Read More »

दो पल की कशमकश का वक्फा

मूलतः पंजाबी भाषी तजेन्दर सिंह लूथरा हिंदी में कविताएँ लिखते हैं. हाल में ही उनका कविता संग्रह राजकमल प्रकाशन से आया है- ‘अस्सी घाट का बांसुरीवाला’. उसी संकलन से कुछ चुनी हुई कविताएँ- जानकी पुल. ——————————————————– 1. अस्सी घाट का बाँसुरी वाला इसे कहीं  से भी शुरू किया जा सकता है, बनारस …

Read More »

कोई नहीं लिखता यहां क्या हो रहा है

कथाकार-पत्रकार आशुतोष भारद्वाज छत्तीसगढ़ के नक्सली घोषित इलाकों में घूम-घूम कर बड़ी बारीक टिप्पणियां कर रहे हैं, बड़े वाजिब सवाल उठा रहे हैं. भूलने के विरुद्ध एक जरूरी कार्रवाई- जानकी पुल. ————— नये साल की पहली रात। बस्तर और कश्मीर की भौगोलिक काया और जैविक माया में रोचक साम्य — …

Read More »

अज्ञेय अपने दौर के सबसे बड़े कवि थे- नामवर सिंह

ओम थानवी (बाएं) द्वारा संपादित ‘अपने अपने अज्ञेय’ के परिवर्धित संस्करण (दो भाग) का लोकार्पण करते हुए डॉ नामवर सिंह. साथ में हैं कुंवर नारायण और अशोक वाजपेयी  हमारी भाषा के मूर्धन्य आलोचक नामवर सिंह ने कहा है कि अज्ञेय अपने दौर के सबसे बड़े कवि थे, कि ‘शेखर: एक …

Read More »