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Prabhat Ranjan

बैठ अकेले दुख मत जापो, मिल कर जीवन राग अलापो

आज बाल दिवस पर कुछ बाल कविताएँ. कवि हैं भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित कवि प्रेम रंजन अनिमेष– जानकी पुल.=============== 1. मोटी रोटी दादी की  यह  मोटी  रोटी छूछी  भी लगती  है  मीठी गेहूँ  मकई  चना  मिला है घर की चक्की का आटा है उपलों पर  इसको सेंका है सत …

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उनके जीवन का नमक बारिश में घुल कर बह रहा था

आज आशुतोष दूबे की कविताएँ. एक जमाने में अपने डिक्शन, अपनी किस्सागोई से उनकी कविताओं ने अलग से ध्यान आकर्षित किया था. आज भी करती हैं. उनकी कुछ चुनी हुई कविताएँ- जानकी पुल. ============== १. मनौती का पेड़ धागे की एक लच्छी उसे बांधकर हम लौट आते हैं एक झुलसती …

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फेसबुक पर विद्वानों के अपने-अपने अज्ञेय

·         बात शुरु हुई थी अनिल यादव के इंटरव्यू में आए  अज्ञेय के इस सन्दर्भ से– मुझे लगता है कि हिंदी के पास अज्ञेय के रूप में एक अपना रवींद्रनाथ टैगोर था. हमने उसे नहीं पहचाना और खो दिया- देखते-देखते यह फेसबुक पर अज्ञेय को लेकर एक गंभीर …

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हर स्थिति और हर काल में और न्यूट्रल था हर हाल में

प्रसिद्ध कवि बोधिसत्व की यह कविता हमारे समाज पर गहरा व्यंग्य करती है. आप भी पढ़िए ‘न्यूट्रल आदमी’, बनिए नहीं- जानकी पुल. ================ न्यूट्रल आदमी वह हिंद केशरी नहीं था वह भारत रत्न नहीं था वह विश्व विजेता नहीं था किंतु सदैव था सर्वत्र था वह और चाहता सब का …

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चन्द्रकुंवर बर्त्वाल की कुछ छोटी कविताएँ

महज २८ साल की उम्र में इस संसार को अलविदा कह गए कवि चन्द्रकुंवर बर्त्वाल को कुछ लोग हिंदी का कीट्स भी कहते हैं. उनकी कविताओं की एक किताब ‘चन्द्रकुंवर बर्त्वाल का कविता संसार’ हाथ लगी तो अपने जन्मदिन के दिन अपने इस प्रिय कवि को पढ़ता रहा. डॉ. उमाशंकर …

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उपन्यास लिखना समुद्र में तैरने जैसा है

आज से दिल्ली के इण्डिया हैबिटेट सेंटर में भारतीय भाषाओं के साहित्योत्सव ‘समन्वय’ की शुरुआत हुई. इस बार इसमें अन्य लेखकों के अलावा हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका अलका सरावगी भी मौजूद रहेंगी. अलका सरावगी कहीं किसी कार्यक्रम में कम ही दिखाई देती हैं. अपने पहले ही उपन्यास ‘कलिकथा वाया बाईपास’ …

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‘वह’ से यह तक की यात्रा

इस साल हिंदी में प्रकाशित पुस्तकों में जिसने मुझे बहुत प्रभावित किया वह अनिल कुमार यादव की पुस्तक ‘वह भी कोई देस है महराज’ भी है. जहां तक मेरी अपनी समझ है उसके आधार पर मैं यही कह सकता हूं कि इस तरह के यात्रा वृत्तान्त हिंदी में कम लिखे गए …

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पालतू आदमी कुछ भी हो सकता है लेखक नहीं!

28 अक्‍तूबर के जनसत्‍ता में अशोक वाजपेयी जी ने सार्वजनिक रूप से साहित्‍य निधि बनाने की घोषणा की है। वे नाम भी गिनाये हैं जो उनके साथ हैं। लेकिन सत्‍ता, प्रतिष्‍ठान, पीठ, पुरस्‍कार से इतर या शामिल ब‍हुसंख्‍यक लेखकों का ऐसे कुबेर कोष के प्रति क्‍या नजरिया है इस बहस …

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चार किस्से हेमंत शेष के

आज हेमंत शेष के किस्से- जानकी पुल. ==========================  आदिवासी सब आदिवासी घने जंगलों में पैदा होते और रहते हैं, एक-एक पेड़ पत्ती और कंदमूल पहचानते हैं, हाथ से बुना कपड़ा पहनते हैं, देवताओं को मानते हैं, ओझाओं का सम्मान करते हैं, कबीले की पंचायत का फैसला मानते हैं, बच्चे पैदा करना जानते हैं, जानवरों के नाम, उनकी आदतें, पक्षियों …

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आप किस मीडिया में नैतिकता की छानबीन कर रहे हैं हरिवंशजी ?

कल वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश का लेख आया था मीडिया की नैतिकता पर. युवा लेखक विनीत कुमार का यह लेख उसी लेख के कुछ सन्दर्भों को लेकर एक व्यापक बहस की मांग करता है- जानकी पुल. ==== ==== हरिवंशजी, आपके लेख “मीडिया को अपनी लक्ष्मण रेखा का एहसास नहीं” पर असहमति …

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