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Prabhat Ranjan

बड़े जहाज का दिशाहीन सफ़र ‘ठग्स ऑफ़ हिन्दोस्तान’

‘ठग्स ऑफ़ हिन्दोस्तान’ की यह समीक्षा लिखी है सैयद एस. तौहीद ने- मॉडरेटर ============================================== साल की बहुप्रतीक्षित ‘ठग्स ऑफ़ हिंदोस्तान’ रिलीज़ हो चुकी है। दिवाली का मौका और आमिर खान के होने का इस फिल्म को पूरा फायदा मिला है। फिल्म ने पहले ही दिन धमाकेदार कमाई कर  52.25 करोड़ …

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रामचंद्र गुहा की पुस्तक ’गांधी: द इयर्स दैट चेंज्ड द वर्ल्ड’ की समीक्षा

हिंदी में पुस्तकों की अच्छी समीक्षाएं कम पढने को मिलती हैं. रामचंद्र गुहा द्वारा लिखी महात्मा गांधी की जीवनी के दूसरे और अंतिम भाग,’गांधी: द इयर्स दैट चेंज्ड द वर्ल्ड’ की यह विस्तृत समीक्षा जाने माने पत्रकार-लेखक आशुतोष भारद्वाज ने लिखी है. कुछ समय पहले ‘दैनिक जागरण’ में प्रकाशित हुई थी. …

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नागार्जुन से तरौनी कभी छूटा नहीं

आज बाबा नागार्जुन की पुण्यतिथि है. इस अवसर पर युवा पत्रकार-लेखक अरविन्द दास का यह लेख प्रस्तुत है, जिसमें उनके गाँव तरौनी की यात्रा का भी वर्णन है. यह लेख उनके शीघ्र प्रकाश्य पुस्तक ‘बेखुदी में खोया शहर: एक पत्रकार के नोट्स’ में संकलित है. बाबा को सादर प्रणाम के …

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नीरज की अंतिम कृति ‘साँसों के सितार पर’ से कुछ कविताएँ

प्रसिद्ध कवि-गीतकार गोपालदास ‘नीरज’ के मरणोपरांत उनकी अंतिम कृति के रूप में प्रकाशित हुई है ‘साँसों के सितार पर’, जिसे सम्पादित किया है नीरज जी के अंतिम दौर के पसंदीदा संगीतकार कुमार चंद्रहास ने. हिन्द पॉकेट बुक्स तथा पेंगुइन बुक्स के संयुक्त उद्यम के रूप में प्रकाशित यह पहली किताब …

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‘चौरासी’: एक बिरादरी-बाहर कारोबारी लेखक की निगाह में

  निर्विदाद रूप से सुरेन्द्र मोहन पाठक हिंदी के सबसे लोकप्रिय लेखक हैं. सत्य व्यास समकालीन हिंदी के सबसे लोकप्रिय लेखकों में एक हैं. उनके नवीनतम उपन्यास ‘चौरासी’ पर सुरेन्द्र मोहन पाठक ने यह टिप्पणी लिखी है. एक संपादक के लिए मेरे लिए यह दुर्लभ संयोग है. पाठक जी ने …

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मनोज कुमार पांडेय की कहानी ‘पापियों के उद्धार की अनोखी योजना’

मनोज कुमार पांडेय मेरी पीढ़ी के उन कथाकारों में हैं जो न सिर्फ निरंतर लिख रहे हैं बल्कि नए-नए कथा-प्रयोग भी कर रहे हैं. यह उनकी नई कहानी है जो लक्षणा और व्यंजना में पढ़े जाने की मांग करती है- प्रभात रंजन ================ स्वर्णदेश का राजा उन लोगों के लिए …

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भिंचे जबड़ों को खुलकर हँसने देने का मौका देने वाली फिल्म

सिनेमा पर मुझे अक्सर ऐसे लोगों का लिखा पसंद आता है जो उस विषय के पेशेवर लेखक नहीं होते हैं. फिल्म ‘बधाई’ हो’ पर यह टिप्पणी डॉ. आशा शर्मा ने लिखी है. दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कॉलेज में पढ़ाती हैं, रंगमंच की विशेषज्ञ हैं और एक पठनीय टिप्पणी उन्होंने इस …

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समानता का नया यूटोपिया रचती है देह ही देश- अनामिका  

कल दोपहर दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज में गरिमा श्रीवास्तव की पुस्तक ‘देह ही देश’ पर परिचर्चा का आयोजन हुआ. जिसकी रपट डॉ. रचना सिंह की कलम से- मॉडरेटर ============================================== दिल्ली।  ”देह ही देश” केवल यूरोप की स्त्री का संसार नहीं है बल्कि दर्द और संघर्ष का यह आख्यान अपनी …

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सुनील गंगोपाध्याय की कविताएँ सुलोचना का अनुवाद

बांगला भाषा के मूर्धन्य कवि-उपन्यासकार सुनील गंगोपाध्याय की पुण्यतिथि विगत 23 अक्टूबर को थी. उनको याद करते हुए उनकी कुछ कविताओं का मूल बांगला भाषा से अनुवाद किया है हिंदी की सुपरिचित कवयित्री सुलोचना ने- मॉडरेटर ============================= 1. पहाड़ के शिखर पर ————————- बहुत दिनों से ही मुझे एक पहाड़ …

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मैं अब कौवा नहीं, मेरा नाम अब कोयल है!

युवा लेखिका अनुकृति उपाध्याय उन चंद समकालीन लेखकों में हैं जिनकी रचनाओं में पशु, पक्षी प्रकृति सहज भाव से उपस्थित रहते हैं. यह उनकी ताज़ा रचना है मौसम और परिस्थिति के अनुकूल- मॉडरेटर ============ पतझड़ बनाम वसंत मेरी खिड़की पर अक़्सर एक कौवा आ बैठता है। बड़बोला है, कर्कश भी। …

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