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Prabhat Ranjan

कोरोना काल में सोशल बिहेवियर को रेखांकित करने वाली किताब

वरिष्ठ पत्रकार अजय बोकिल की किताब प्रकाशित हुई है ‘कोरोना काल की दंश कथाएँ’। शिवना प्रकाशन से प्रकाशित इस किताब की समीक्षा की है हेमंत पाल ने। आप भी पढ़ सकते हैं-  ==============   इक्कीसवीं सदी का बीसवां साल सदियों का दस्तावेज बन गया है। कोविड 19 के रूप में …

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झूठ की दुनिया में सत्य को आत्मसात करने के लिए यह किताब पढ़ें

अशोक कुमार पांडेय की किताब ‘उसने गांधी को क्यों मारा’ जब से प्रकाशित हुई है ऐसा लगता है जैसे सोशल मीडिया पर भूचाल आ गया हो। बहुत दिनों बाद किसी किताब का ऐसा स्वागत होते देखा है। यह पुस्तक बताती है कि हिंदी का नया पाठक अपने इतिहास के प्रसंगों …

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दुर्गा पूजा की यादें

सुहैब अहमद फ़ारूक़ी पुलिस अधिकारी हैं, जाने माने शायर हैं, साहित्य प्रेमी हैं। आज से दुर्गा पूजा शुरू हुआ है। ज़रा उनकी यह अनुभव कथा पढ़िए- =========================== पुलिस ड्यूटी की अहमियत  असंगत व ग़ैर-मामूली समय ही में महसूस होती है। आम समय में तो मामूली लोग भी ‘संगत’ कर लेते …

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     ‘एनोला होम्स’: किताबों में छपे फोटो के कोलाज

 हाल में ही आई फ़िल्म एनोला होम्स’ पर यह टिप्पणी मनोज मल्हार ने लिखा है। मनोज पेशे से प्राध्यापक हैं और समसामयिक विषयों पर लिखते रहते हैं- =================  “वोट्स फॉर वीमेन, पब्लिक मीटिंग, मेक योर वर्डस हर्ड”  “प्रोटेस्ट अनरेस्ट एंड सिविल डिसऑबिडीएंस” ‘एनोला’ फिल्म में प्रयुक्त पर्चों की अपील.  “…जो …

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कविता शुक्रवार 18: उमा झुनझनवाला की कविताएँ सुमन सिंह के चित्र

‘कविता शुक्रवार’ के इस अंक में प्रस्तुत हैं रंगकर्मी और कवयित्री उमा झुनझुनवाला की कविताएं और वरिष्ठ चित्रकार सुमन सिंह के नए रेखांकन। उमा झुनझुनवाला का जन्म 20 अगस्त 1968 में कलकत्ता में हुआ था। हिन्दी से एम.ए करने के बाद इन्होंने बीएड किया क्योंकि इनका मानना है, “स्कूल का …

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बड़े विजन की कहानियाँ

वास्को डी गामा की साइकिल– युवा लेखक प्रवीण कुमार का नया कहानी संग्रह प्रकाशित हुआ है। राजपाल एंड संज से प्रकाशित इस कहानी संग्रह की विस्तृत समीक्षा की है राहुल द्विवेदी ने। आप भी पढ़ सकते हैं। आज से यह कहानी संग्रह बिक्री के लिए उपलब्ध रहेगा- ================== श्लाघ्य: स …

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उसने मुझे मजनू की तरह चाहा और लैला बना दिया

वरिष्ठ लेखिका ममता कालिया की किताब ‘रवि कथा’ आई है। वाणी प्रकाशन से प्रकाशित इस किताब की अपने अन्दाज़ में काव्यात्मक समीक्षा की है यतीश कुमार ने- अन्दाज़-ए-बयॉं उर्फ रवि कथा – ममता कालिया   यह सुखद संयोग है कि “ग़ालिब छुटी शराब” कुछ महीने पहले ही पढ़ी मैंने। सारे …

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प्रमोद द्विवेदी की कहानी ‘गीता बाली तेरी याद में’

प्रमोद द्विवेदी पत्रकार रहे हैं। जनसत्ता अख़बार में फ़ीचर संपादक। कहानियाँ कम लिखते हैं लेकिन अपने ग़ज़ब की पठनीय कहानियाँ लिखते हैं। उनके किरदार याद रह जाते हैं। यह कहानी पढ़िए- ================== जनवरी की सर्दी में सुबह-सुबह पांच बजे घमंडी यादव का घबराया हुआ फोन आया, ‘गुरु गीता बाली के …

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गांधीजी गेहूं की खेत की तरह हैं तो टैगोर गुलाब बाग की तरह

संजय कृष्ण पेशे से पत्रकार हैं और चित्त से शोधार्थी। उन्होंने कई दुर्लभ किताबों की खोज की है और उनका प्रकाशन भी करवाया है। उनका यह लेख चरखे को लेकर गांधी-टैगोर बहस के बहाने कई बड़े मुद्दों को लेकर है- ======================= सन् 1915 से लेकर 1947 तक के कालखंड को …

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टीआरपी के बलवे में जिम्मेदार पत्रकारिता की हत्या

इस लेख के लेखक अजय बोकिल नईदुनिया सहित कई प्रमुख समाचार पत्रों में जुड़े रहे हैं। उनका एक कहानी संग्रह ‘पास पड़ोस’ के अलावा शोध ग्रन्थ ‘श्री अरविंद की संचार अवधारणा’ प्रकाशित हैं। फिलहाल वे ‘सुबह सबेरे’ (भोपाल) के वरिष्ठ संपादक हैं- ============== एक संदिग्ध मौत कितने चेहरे बेनकाब कर …

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