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Prabhat Ranjan

थोडी हकलाहट थोडी सी बेबाकी

आज राकेश श्रीमाल की कविताएँ. संवेदनहीन होते जाते समय में उनकी कविताओं की सूक्ष्म संवेदनाएं हमें अपने आश्वस्त करती हैं कि अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है.  राकेश श्रीमाल मध्‍यप्रदेश कला परिषद की मासि‍क पत्रिका ‘कलावार्ता’ के संपादक, कला सम्‍पदा एवं वैचारिकी ‘क’ के संस्‍थापक मानद संपादक के अलावा …

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ग़ौर से देखिये ये नदी का कब्रिस्तान है

 गिरिराज  किराडू हिंदी युवा-कविता का ऐसा नाम है जिसने कविताओं के रूप-रंग को लेकर सबसे अधिक प्रयोग किए हैं, अभिव्यक्ति के खतरे निरंतर उठाते रहे हैं. इस बार उनकी कविताएँ कुछ नए अंदाज़ में- जानकी पुल. 1. कुफ़्र  कुछ हुआ चाहियेयहाँ  एक नदी बहती थी अब रेगिस्तान  है गौर से देखिये ये नदी  का …

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इंसान अपने आप में कितना सिमट गया

शिव कृष्ण बिस्सा मशहूर शायर शीन काफ निजाम के नाम से जाने जाते हैं. सूफियाना अंदाज़ के इस शायर की कुछ गज़लें प्रस्तुत हैं- जानकी पुल. 1.  पहले ज़मीन बांटी थी फिर घर भी बंट गया इंसान अपने आप में कितना सिमट गया. अब क्या हुआ कि खुद को मैं …

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निदा फाजली के शब्दों में शकील बदायूंनी का अक्स

निदा फाजली ने कुछ शायरों के ऊपर बहुत रोचक ढंग से लिखा है. यहाँ उनका लेख शायर-गीतकार शकील बदायूंनी पर. कुछ साल पहले वाणी प्रकाशन से उनकी एक किताब आई थी ‘चेहरे’ उसमें उनका यह लेख संकलित है.  ============= शेक्सपियर ने 1593 से 1600 के दरमियान एक सौ चौवन सॉनेट भी …

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मार्केज़ के एक इंटरव्यू का हिंदी अनुवाद

गाब्रियल गार्सिया मार्केज़ के साथ पीटर एच. स्टोन की बातचीत का सम्पादित अंश   जिसका अनुवाद मैंने किया है- प्रभात रंजन. प्रश्न- टेपरिकार्डर के उपयोग के बारे में आप क्या सोचते हैं? मार्केज़- मुश्किल यह है कि जैसे ही आपको इस बात का पता चलता है कि इंटरव्यू को टेप …

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लोग मृत्यु को गंभीरता से लेते हैं

चीन में लाओत्से के के विचारों की बड़ी मान्यता थी. कहते हैं वह कन्फ्यूशियस का समकालीन था. जब उसने अपने ज्ञान को लिपिबद्ध किया तो वह कविताओं के रूप में सामने आया. ताओवाद के प्रवर्तक के विचार ‘ताओ ते छिंग’ में संकलित है. अभी उसका एक चुनिन्दा संकलन राजकमल प्रकाशन …

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नजीर अकबराबादी के जीवन पर आधारित एक दुर्लभ उपन्यास

जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा को वैसे तो जासूसी उपन्यासों के लेखक के रूप में जाना जाता है, जिसको हिंदी का गंभीर पाठक समुदाय हिकारत की दृष्टि से देखता है. ऐसे में शायद ही किसी का ध्यान इस ओर गया हो कि उन्होंने ऐसे कई उपन्यास लिखे जिनको साहित्यिक कहा जा …

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नाम तो नाम उपनाम भी सुभानअल्ला

अज्ञेय की जन्म-शताब्दी के अवसर पर आज प्रस्तुत है उनके घोषित शिष्य मनोहर श्याम जोशी द्वारा लिखा गया एक व्यक्ति-चित्र जिसमें अज्ञेय के व्यक्तित्व को बहुत रोचक ढंग से खोला गया है. ‘बातों-बातों में’ संकलित लेख का एक सम्पादित अंश- जानकी पुल. अगर जैनेन्द्र गांधी स्मारक निधि हैं तो सच्चिदानंद …

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विमल मित्र के गुरुदत्त

प्रसिद्ध बांग्ला उपन्यासकार विमल की मित्र ने गुरुदत्त पर एक पुस्तक लिखी थी. हाल में ही उसका हिंदी अनुवाद छपकर आया है- ‘बिछड़े सभी बारी बारी’. ‘साहब बीबी और गुलाम’ के लेखक विमल मित्र ने गुरुदत्त को बेहद करीब से देखा-जाना था- इसकी जानकारी इसी पुस्तक से हुई- जानकी पुल. …

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75 साल का बच्चा स्वामी और उसके दोस्त

भारतीय अंग्रेजी के आरंभिक उपन्यासों में से एक ‘स्वामी एंड फ्रेंड्स‘ के प्रकाशन के 75 साल हो गए. लेकिन उसका गांव मालगुडी, उसका बच्चा स्वामी आज भी हमारी स्मृतियों में वैसे के वैसे बने हुए हैं- जानकी पुल. १९३५ में भारतीय अंग्रेजी के आरंभिक लेखकों में एक आर. के. नारायण …

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