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Prabhat Ranjan

भगत सिंह और रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ के नाम दो कविताएँ

  शहीदी दिवस पर विपिन चौधरी की कविताएँ- जानकी पुल. ————————————————————- १.शहीद–ए-आज़म के  नाम एक कविता उस वक़्त भी होंगे तुम्हारी बेचैन करवटों के बरक्स चैन से सोने वाले आज भी बिलों में कुलबुलाते हैं तुम्हारी जुनून मिजाज़ी  को “खून की गर्मी” कहने वाले तुमने भी तो दुनिया को बिना परखे …

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भगत सिंह! कुछ सिरफिरे-से लोग तुमको याद करते हैं

भगत सिंह की शहादत को प्रणाम के साथ कुछ कविताएँ युवा कवि त्रिपुरारि कुमार शर्मा की- जानकी पुल. ——————————– भगत सिंह के लिए भगत सिंह! कुछ सिरफिरे-से लोग तुमको याद करते हैं जिनकी सोच की शिराओं में तुम लहू बनकर बहते हो जिनकी साँसों की सफ़ेद सतह पर वक़्त-बेवक़्त तुम्हारे …

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क्या नाट्यशास्त्र आज भी प्रासंगिक है?

कवयित्री, नाट्यविद, संगीत-विदुषी वंदना शुक्ल हमेशा कला-साहित्य के अनछुए पहलुओं को लेकर बहुत गहराई से विश्लेषण करती हैं. जिसका बहुत अच्छा उदाहरण है यह लेख- जानकी पुल. —————————————————————————————————–  अभिनय का विस्तृत विवेचन करने वाला विश्व का सबसे प्रथम ग्रन्थ आचार्य भरत मुनि कृत ‘’नाट्य शास्त्र’’ है| भरतमुनि का नाट्यशास्त्र ऐसा ग्रन्थ …

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ऐसे दिक-काल में

हाल में ही युवा लेखक-पत्रकार अनिल यादव का यात्रा-वृत्तान्त आया है ‘यह भी कोई देश है महाराज’. उत्तर-पूर्व भारत के अनदेखे-अनजाने इलाकों को लेकर लिखे गये इस यात्रा-वृत्त में वहां का समाज, वहां की संस्कृति अपनी पूरी जीवन्तता के साथ मौजूद है. यहां पुस्तक का एक अंश जो  अरुणाचल प्रदेश …

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कि वह तो हमेशा हमेशा, कि वह तो कभी नहीं कभी नहीं

http://akhilkatyalpoetry.blogspot.co.ukपर अपने मित्र सदन झा के सौजन्य से ब्रिटिश कवयित्री जैकी के की यह कविता पढ़ी तो अच्छी लगी. सोचा आपसे भी साझा किया जाए. हिंदी में शायद यह जैकी के की पहली ही अनूदित कविता है. एक कविता और भी है जो शायद अखिल कात्यालकी है, प्यार, मनुहार, छेडछाड …

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कितने ही चाँद रोने लगे हैं सियारों की तरह

70 के दशक के आरम्भ में अशोक वाजपेयी सम्पादित ‘पहचान सीरीज’ ने जिन कवियों की पहचान बनाई थी दिविक रमेश उनमें एक थे. अर्सा हो गया. लेकिन दिविक रमेश आज भी सृजनरत हैं. अपने सरोकारों, विश्वासों के साथ. उनकी कविता का मुहावरा जरूर बदल गया है लेकिन समकालीनता से जुड़ाव …

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किनारे बैठी औरत धोती रहती है अपने शोक

हाल के दिनों में जिन कुछ कवियों की कविताओं ने मुझे प्रभावित किया है महेश वर्मा उनमें एक हैं. हिंदी heartland से दूर अंबिकापुर में रहने वाले इस कवि की कविताओं में ऐसा क्या है? वे इस बड़बोले समय में गुम्मे-सुम्मे कवि हैं, अतिकथन के दौर में मितकथन के. मार-तमाम …

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नीलाभ की महाभारत कथा

हाल के बरसों में नीलाभ की चर्चा अरुंधति रे से लेकर चिनुआ अचिबे के शानदार अनुवादक के रूप में रही है. लेकिन नीलाभ मूलतः एक गंभीर कवि और लेखक हैं. अभी हाल में ही उन्होंने महाभारत कथा को आम पाठकों के लिए तैयार किया है. ‘मायामहल’ और ‘धर्मयुद्ध’ के नाम …

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पहाड़ से गिरती एक नदी

अम्बरीश कुमार सजग और बेधड़क पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं. लेकिन वे रचनात्मक गद्य भी उतना ही सुन्दर लिखते हैं. विशेषकर यात्रा-संस्मरण. यह यात्रा-संस्मरण बस्तर का है. वहां का जीवन-जगत जीवंत हो गया है- जानकी पुल.   ———————   कांकेर के आगे बढ़ते ही तेजी से दिन में ही …

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हिंदी में हंसना अंग्रेजी में हंसने से अलग है

उत्तर आधुनिकता के विद्वान सुधीश पचौरी जिस विषय पर लिखते हैं उसका एक नया ही पाठ बना देते हैं- हमारे जाने समझे सबजेक्ट को हमारे लिये नया बना देते हैं- उदहारण के लिए सरिता_मार्च (प्रथम अंक) व्यंग्य  विशेषांक में प्रकाशित हंसी पर यह लेख. आपके लिए प्रस्तुत है- जानकी पुल.  —————————————————————————————————————————————————   …

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