Home / Prabhat Ranjan (page 22)

Prabhat Ranjan

प्रतिभा चौहान की कुछ कविताएँ

प्रतिभा चौहान बिहार न्यायिक सेवा में अधिकारी हैं लेकिन मूलतः कवयित्री हैं. उनकी कवितायेँ लगभग सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं. जानकी पुल पर पहली बार प्रकाशित हो रही हैं. उनकी कुछ कविताओं पर उर्दू नज्मों की छाप है कुछ हिंदी की पारंपरिक चिन्तन शैली की कवितायेँ हैं. वे …

Read More »

सुरेंद्र मोहन पाठक की नजर से हिन्द पॉकेट बुक्स का इतिहास

हाल में हिंदी प्रकाशन जगत में एक बड़ी घटना बड़ी खामोशी से हुई. पेंगुइन रैंडम हाउस और हिन्द पॉकेट बुक्स प्रकाशन एक हो गई. हिंदी में पॉकेट बुक्स क्रांति लाने में हिन्द पॉकेट बुक्स की बड़ी भूमिका रही है. हिंदी के सबसे लोकप्रिय लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक ने हिन्द पॉकेट …

Read More »

कोई इच्छा अधूरी रह जाये, तो जिंदगी में आस्था बनी रहती है!

सुरेंद्र वर्मा का उपन्यास ‘मुझे चाँद चाहिए’ वह उपन्यास है जिसकी समीक्षा लिखते हुए उत्तर आधुनिक आलोचक सुधीश पचौरी ने लिखा था ‘यही है राईट चॉइस बेबी’. आज इस उपन्यास पर पूनम दुबे की टिप्पणी प्रस्तुत है.  पूनम पेशे से मार्केट रिसर्चर हैं. बहुराष्ट्रीय रिसर्च फर्म नील्सन में सेवा के पश्चात फ़िलवक्त …

Read More »

सिनेमा में काशी भी है और अस्सी भी!

फिल्म ‘मोहल्ला अस्सी’ की समीक्षा लिखी है रांची के नवीन शर्मा ने- मॉडरेटर ========================================== किसी भी साहित्यिक कृति चाहे वो कहानी हो , उपन्यास हो या फिर आत्मकथा उस पर फिल्म बनाना बहुत जोखिम का काम है। यह दोधारी तलवार पर चलने के समान है। इसमें संतुलन बनाए रखना बेहद …

Read More »

तथ्य और सत्य के बीच फेक न्यूज

युवा पत्रकार अरविन्द दास का यह लेख फेक न्यूज को लेकर चल रही बहस को कई एंगल से देखता है. उसके इतिहास में भी जाता है और वर्तमान पेचीदिगियों से भी उलझता है. अरविन्द दास पत्रकार हैं, पत्रकारिता पर शोध कर चुके हैं और हाल में ही उनके लेखों का …

Read More »

रेंगने वाली हिंदी अब उड़ रही है!

हिंदी की स्थिति पर मेरा यह लेख ‘नवभारत टाइम्स’ मुम्बई के दीवाली अंक में प्रकाशित हुआ है- प्रभात रंजन =========================== मेरी बेटी नई किताबों को खरीदने के लिए सबसे पहले किंडल स्टोर देखती है, जहाँ अनेक भाषाओं में लाखों ईबुक मौजूद हैं जिनमें से वह अपनी पसंद की किताब खरीद …

Read More »

यह सामा-चकेवा का मौसम है

कार्तिक मास के बढ़ते चाँद के साथ मिथिला-तिरहुत के लोगों की स्मृतियों में सामा चकेवा आ जाता है. भाई-बहन के प्रेम के इस पर्व पर यह लेख लिखा है मुकुल कुमारी अलमास ने- मॉडरेटर ============ कार्तिक माह का शुक्लपक्ष जब भी आता है और मैं दिन-दिन बढ़ते चाँद को देखती …

Read More »

हर लिहाज़ से एक सराहनीय फिल्म है ‘पीहू’

फिल्म ‘पीहू’ की समीक्षा सैयद एस. तौहीद द्वारा लिखी हुई- मॉडरेटर ===================================== कल्पना कीजिए एक ऐसी कहानी जिसमें अकेली मासूम घर में अकेली रह जाए। बच्ची खुद ही खाना बनाए और फिर गैस को जलता हुआ छोड़ दे। खुद को फ्रिज में बंद कर ले। ऐसे कई हैरत से भरे …

Read More »

पिता व पुत्री के सुंदर रिश्ते पर आधारित ‘The Frozen Rose’

ईरानी शार्ट फिल्म ‘फ्रोज़ेन रोज’ पर सैयद एस. तौहीद की टिप्पणी- मॉडरेटर ============================================ इंसान दुनिया में जिस किसी को मोहब्बत में जान से ज्यादा अजीज बना लेता है परवरदिगार उसे उस जैसा बना दिया करता है. खुदा की दूसरी दुनिया के बाशिंदों को इंतज़ार करने वाली रूहें कहना चाहिए. इंसान …

Read More »

‘patna blues’ उपन्यास के लेखक अब्दुल्ला खान की नज़्में

अब्दुल्ला खान इन दिनों अपने उपन्यास ‘patna blues’ के कारण चर्चा में हैं. वे पेशे से बैंकर हैं. मुंबई में टीवी के लिए स्क्रीनप्ले लिखते हैं, गाने लिखते हैं. आज उनकी कुछ नज़्में पढ़िए- मॉडरेटर ====== कुछ यादें माज़ी के दरीचे से कुछ यादें उतर आयीं हैं मेरे ख्यालों के …

Read More »