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Prabhat Ranjan

तुझसे मैं मिलता रहूँगा ख़्वाब में

कल हरदिल अज़ीज़ शायर शहरयार का इंतकाल हो गया. उनकी स्मृति को प्रणाम. प्रस्तुत है उनसे बातचीत पर आधारित यह लेख, जो अभी तक अप्रकाशित था. त्रिपुरारि की यह बातचीत शहरयार के अंदाज़, उनकी शायरी के कुछ अनजान पहलुओं से हमें रूबरू करवाती है – मॉडरेटर ======================================================   वो सुबह बहुत हसीन …

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‘आज का व्यावसायिक हिंदी सिनेमा एक उत्पाद है’

हाल के दिनों में सिनेमा पर गंभीरता से लिखने वाले जिस युवा ने सबसे अधिक ध्यान खींचा है वह मिहिर पंड्या है. मिहिर पंड्या ने यह लेख ‘कथन’ पत्रिका द्वारा भूमंडलीकरण और सिनेमा विषय पर आयोजित परिचर्चा के लिए लिखा है. समकालीन सिनेमा को समझने के लिए मुझे एक ज़रूरी …

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सत्य दरबारियों का शगल है

हमारी पीढ़ी में सबसे अलग मुहावरे वाले कवि तुषार धवल की कुछ नई कविताएँ. तुषार की कविताओं में मुझे कभी-कभी अकविता की सी झलक दिखाई देती है, कभी अपने प्रिय कवि श्रीकांत वर्मा की आहट सुनाई देती है, लेकिन उनका स्वर एकदम समकालीन है. इन नई कविताओं को पढकर देखिये- …

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‘स्वतंत्रता’ की अभिव्यक्ति पर चीनी कवि को सजा

चीन के विद्रोही कवि जू युफु ने एक कविता लिखी ‘it’s time’, skype पर. इस अपराध में उन्हें सात साल की सजा सुनाई गई है. वही कविता यहां हिंदी अनुवाद में. लेखकीय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन का यह सबसे बड़ा मामला है. क्या इसकी निंदा नहीं की जानी चाहिए? …

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स्त्रियाँ सुन्दर हो जाती हैं जब उनसे फूटता है रुदन

आज प्रस्तुत हैं निज़ार क़ब्बानी की पाँच कविताएँ, जिनका बहुत अच्छा अनुवाद किया है सिद्धेश्वर सिंह ने- जानकी पुल. ०१–टेलीफोन टेलीफोन जब भी घनघनाता है मेरे घर में मैं दौड़ पड़ता हूँ एक बालक की तरह अत्यंत उछाह में भरकर। मैं आलिंगन में भर लेता हूँ स्पंदनहीन यंत्र को सहलाता हूँ …

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पाँचवें प्यार की पुण्यतिथि

अभी हाल में एक गंभीर और प्रिय कवि प्रेम रंजन अनिमेष की कहानी पढ़ी ‘पंचमी’. प्रेम कहानियां तो मैंने बहुत पढ़ी हैं, कुछ लिखी भी हैं, लेकिन इस कहानी में कुछ अलग बात है. क्या है आप खुद पढ़िए. बसंत की इस अप्रत्याशित रूप से ठंढी भोर में एक अप्रत्याशित-सी …

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सृजनात्मकताएं मृत्यु का प्रतिकार हैं

 पिछले 1 जनवरी को उदयप्रकाश 60 साल के हो गए. मुझे बहुत आश्चर्य है कि उनकी षष्ठिपूर्ति को लेकर किसी तरह की सुगबुगाहट हिंदी में नहीं हुई. जबकि एक लेखक के रूप में उनकी व्याप्ति, उनकी लोकप्रियता अपने आप में एक मिसाल है. हम युवा लेखकों के लिए प्रेरणा का …

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अपनी हिंदी में बेस्टसेलर की तलाश

 हिंदी में ‘बेस्टसेलर’ की चर्चा एक बार फिर शुरु हो गई है. एक ज़माना था जब पत्रिकाओं में निराला की कविताओं के नीचे चमत्कारी अंगूठी का विज्ञापन छपता था. राही मासूम रज़ा जासूसी दुनिया के लिए जासूसी उपन्यास लिखा करते थे, पुस्तकों के एक ही सेट में गुलशन नंदा और …

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यातनाएं वैसी ही हैं जैसी थीं

कविता की मोजार्ट कही जाने वाली विश्वावा शिम्बोर्स्का का 89 साल की उम्र में निधन हो गया. पोलैंड की इस कवयित्री को नोबेल पुरस्कार भी मिला था. हिंदी में भी उनकी कविताओं के खासे प्रसंशक थे. अनेक कवियों-लेखकों ने उनकी कविताओं के अनुवाद किए. आज हम उनकी पांच कविताएँ प्रस्तुत …

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साहित्य ‘कुबड़ों का टूर्नामेंट’ है

गिरिराज किराडू हिंदी के ‘भारतभूषण’ कवि हैं, प्रतिलिपि.इन के कल्पनाशील संपादक हैं, प्रतिलिपि बुक्स के निदेशक हैं, कुछ अलग तरह के साहित्यिक आयोजनों से जुड़े हैं. आज उनकी यह डायरी का अंश जो साहित्यिक आयोजनों के एक और पहलू से हमें रूबरू करवाती है- जानकी पुल. एक लेखक–आयोजक की डायरी: …

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