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Prabhat Ranjan

पहले पहले प्यार के झूठे वादे अच्छे लगते हैं

 आज मोहसिन नकवी की शायरी. पाकिस्तान के इस शायर को १९९६ में कट्टरपंथियों ने मार डाला था. उन्होंने नज्में और ग़ज़लें लिखीं, अनीस की तरह मर्सिये लिखे. उनकी शायरी का यह संकलन हमारे लिए शैलेन्द्र भारद्वाज जी ने किया है. मूलतः हिंदी साहित्य के विद्यार्थी रहे शैलेन्द्र जी उर्दू शायरी …

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नैनीताल की गलियों के मोड़ों पर

लक्ष्मण सिंह बिष्ट जी को हम सब प्रसिद्ध उपन्यासकार-कथाकार बटरोही के रूप में जानते हैं. उन्होंने अभी हाल में ही एक उपन्यास लिखा है नैनीताल पर- ‘गर्भगृह में नैनीताल’. नैनीताल के अतीत और वर्तमान की अन्तर्पाठीयता का एक ऐसा पाठ जिसमें परंपरा और आधुनिकता का द्वंद्व भी लगातार चलता है. …

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स्त्री के बालों से डरती है सभ्यता

आज युवा कवि अरुण देव की कविता. इतिहास, आख्यान के पाठों के बीच उनकी सूक्ष्म दृष्टि, बयान की नफासत सहज ही ध्यान आकर्षित कर लेती है. इसमें कोई संदेह नहीं कि उनका मुहावरा, उनकी शब्दावली समकालीन कविता में सबसे अलग है. आज संयोग से अरुण का जन्मदिन भी है. इसी …

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किसी की आँख में देखना उसके मन में देखना होता है

 अभी थोड़ी देर पहले प्रिय कवि बोधिसत्वने यह कविता पढ़ने के लिए भेजी. गहरे राग भाव से उपजी इस कविता में लोकगीतों सा विराग भी पढ़ा जा सकता है, जो बोधिसत्व की कविताओं की विशेषता रही है. न होने में होने का भाव. आज के दिन मैं इस कविता को …

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तुझसे मैं मिलता रहूँगा ख़्वाब में

कल हरदिल अज़ीज़ शायर शहरयार का इंतकाल हो गया. उनकी स्मृति को प्रणाम. प्रस्तुत है उनसे बातचीत पर आधारित यह लेख, जो अभी तक अप्रकाशित था. त्रिपुरारि की यह बातचीत शहरयार के अंदाज़, उनकी शायरी के कुछ अनजान पहलुओं से हमें रूबरू करवाती है – मॉडरेटर ======================================================   वो सुबह बहुत हसीन …

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‘आज का व्यावसायिक हिंदी सिनेमा एक उत्पाद है’

हाल के दिनों में सिनेमा पर गंभीरता से लिखने वाले जिस युवा ने सबसे अधिक ध्यान खींचा है वह मिहिर पंड्या है. मिहिर पंड्या ने यह लेख ‘कथन’ पत्रिका द्वारा भूमंडलीकरण और सिनेमा विषय पर आयोजित परिचर्चा के लिए लिखा है. समकालीन सिनेमा को समझने के लिए मुझे एक ज़रूरी …

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सत्य दरबारियों का शगल है

हमारी पीढ़ी में सबसे अलग मुहावरे वाले कवि तुषार धवल की कुछ नई कविताएँ. तुषार की कविताओं में मुझे कभी-कभी अकविता की सी झलक दिखाई देती है, कभी अपने प्रिय कवि श्रीकांत वर्मा की आहट सुनाई देती है, लेकिन उनका स्वर एकदम समकालीन है. इन नई कविताओं को पढकर देखिये- …

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‘स्वतंत्रता’ की अभिव्यक्ति पर चीनी कवि को सजा

चीन के विद्रोही कवि जू युफु ने एक कविता लिखी ‘it’s time’, skype पर. इस अपराध में उन्हें सात साल की सजा सुनाई गई है. वही कविता यहां हिंदी अनुवाद में. लेखकीय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन का यह सबसे बड़ा मामला है. क्या इसकी निंदा नहीं की जानी चाहिए? …

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स्त्रियाँ सुन्दर हो जाती हैं जब उनसे फूटता है रुदन

आज प्रस्तुत हैं निज़ार क़ब्बानी की पाँच कविताएँ, जिनका बहुत अच्छा अनुवाद किया है सिद्धेश्वर सिंह ने- जानकी पुल. ०१–टेलीफोन टेलीफोन जब भी घनघनाता है मेरे घर में मैं दौड़ पड़ता हूँ एक बालक की तरह अत्यंत उछाह में भरकर। मैं आलिंगन में भर लेता हूँ स्पंदनहीन यंत्र को सहलाता हूँ …

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पाँचवें प्यार की पुण्यतिथि

अभी हाल में एक गंभीर और प्रिय कवि प्रेम रंजन अनिमेष की कहानी पढ़ी ‘पंचमी’. प्रेम कहानियां तो मैंने बहुत पढ़ी हैं, कुछ लिखी भी हैं, लेकिन इस कहानी में कुछ अलग बात है. क्या है आप खुद पढ़िए. बसंत की इस अप्रत्याशित रूप से ठंढी भोर में एक अप्रत्याशित-सी …

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