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Prabhat Ranjan

लोग मृत्यु को गंभीरता से लेते हैं

चीन में लाओत्से के के विचारों की बड़ी मान्यता थी. कहते हैं वह कन्फ्यूशियस का समकालीन था. जब उसने अपने ज्ञान को लिपिबद्ध किया तो वह कविताओं के रूप में सामने आया. ताओवाद के प्रवर्तक के विचार ‘ताओ ते छिंग’ में संकलित है. अभी उसका एक चुनिन्दा संकलन राजकमल प्रकाशन …

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नजीर अकबराबादी के जीवन पर आधारित एक दुर्लभ उपन्यास

जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा को वैसे तो जासूसी उपन्यासों के लेखक के रूप में जाना जाता है, जिसको हिंदी का गंभीर पाठक समुदाय हिकारत की दृष्टि से देखता है. ऐसे में शायद ही किसी का ध्यान इस ओर गया हो कि उन्होंने ऐसे कई उपन्यास लिखे जिनको साहित्यिक कहा जा …

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नाम तो नाम उपनाम भी सुभानअल्ला

अज्ञेय की जन्म-तिथि के अवसर पर आज प्रस्तुत है उनके घोषित शिष्य मनोहर श्याम जोशी द्वारा लिखा गया एक व्यक्ति-चित्र जिसमें अज्ञेय के व्यक्तित्व को बहुत रोचक ढंग से खोला गया है. ‘बातों-बातों में’ संकलित लेख का एक सम्पादित अंश- जानकी पुल. ============================= अगर जैनेन्द्र गांधी स्मारक निधि हैं तो …

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विमल मित्र के गुरुदत्त

प्रसिद्ध बांग्ला उपन्यासकार विमल की मित्र ने गुरुदत्त पर एक पुस्तक लिखी थी. हाल में ही उसका हिंदी अनुवाद छपकर आया है- ‘बिछड़े सभी बारी बारी’. ‘साहब बीबी और गुलाम’ के लेखक विमल मित्र ने गुरुदत्त को बेहद करीब से देखा-जाना था- इसकी जानकारी इसी पुस्तक से हुई- जानकी पुल. …

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75 साल का बच्चा स्वामी और उसके दोस्त

भारतीय अंग्रेजी के आरंभिक उपन्यासों में से एक ‘स्वामी एंड फ्रेंड्स‘ के प्रकाशन के 75 साल हो गए. लेकिन उसका गांव मालगुडी, उसका बच्चा स्वामी आज भी हमारी स्मृतियों में वैसे के वैसे बने हुए हैं- जानकी पुल. १९३५ में भारतीय अंग्रेजी के आरंभिक लेखकों में एक आर. के. नारायण …

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दिलीप कुमार के पाकिस्तानी दीवाने

हाल में ही पाकिस्तान के पत्रकार सईद अहमद की किताब आई है ‘दिलीप कुमार: अहदनामा-ए-मोहब्बत’. इसको पढ़ने से पता चलता है पाकिस्तान में लोग दिलीप कुमार से मोहब्बत ही नहीं करते, वे उनके दीवाने हैं. ऐसे ही दो दीवानों की दास्तान पढ़िए– जानकी पुल. स्टीफेन हेनरी के बारे में अजीब-सी …

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हिंदी में मारियो वर्गास ल्योसा का उपन्यास ‘द स्टोरीटेलर’

ल्योसा को साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिले ठीक से महीना भी नहीं हुआ था कि १९८७ में लिखा उनका उपन्यास ‘द स्टोरीटेलर’ हिंदी में छपकर आ भी गया- ‘किस्सागो’ के नाम से. वैसे तो यह ल्योसा का सर्वश्रेष्ठ उपन्यास नहीं है लेकिन समकालीन भारतीय सन्दर्भ में इसके अनुवाद के प्रकाशन को …

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भुवनेश्वर की एक दुर्लभ कहानी ‘मास्टरनी’

भुवनेश्वर के जन्म-शताब्दी के साल में उनकी एक लगभग गुमनाम कहानी प्रस्तुत है. १९३८ में प्रकाशित इस कहानी को देखिये अपने समय की रचनाओं से कितनी अलग संवेदना की कहानी है- जानकी पुल. मास्टरनी उस रोज सुबह से पानी बरस रहा था. साँझ तक वह पहाड़ी बस्ती एक अपार और …

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भुवनेश्वर की अंग्रेजी कविताएँ शमशेर का हिंदी अनुवाद

भुवनेश्वर ने कुछ कविताएँ अंग्रेजी में लिखी थी. बाद में जिनका हिंदी अनुवाद शमशेर बहादुर सिंह ने किया. दोनों शताब्दी कवि-लेखकों की यह जुगलबंदी प्रस्तुत है- जानकी पुल. 1. रुथ के लिए मगन मन पंख झड़ जाते यदि   और देखने वाली आँखे झप जाती हैं शाहीन के अंदर पानी …

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‘एब्सर्ड’ लेखक भुवनेश्वर की कुछ दुर्लभ कविताएँ

१९१० में पैदा हुए भुवनेश्वर की यह जन्मशताब्दी का साल है. ‘भेडिये’ जैसी कहानी और ‘ताम्बे के कीड़े’ जैसे ‘एब्सर्ड’ नाटक के इस रचयिता को हिंदी का पहला आधुनिक लेखक भी कहा जाता है. समय से बहुत पहले इस लेखक ने ऐसे प्रयोग किये बाद में हिंदी में जिसकी परम्परा …

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