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Prabhat Ranjan

एक बार सोचकर देखें

‘तहलका‘ के नए अंक में प्रकाशित प्रसिद्ध लेखिका मृदुला गर्ग का यह लेख नया ज्ञानोदय–साक्षात्कार प्रकरण में कई ज़रूरो सवालों की याद दिलाता है. संपादक की भूमिका की याद दिलाता है. एक समय था कि संपादक आगे बढ़कर अपनी ज़िम्मेदारी स्वीकार कर लेते थे, एक यह दौर है कि साक्षात्कार …

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पटाक्षेप अभी नहीं

कवि-आलोचक, प्रतिलिपि.इन के संपादक गिरिराज किराड़ू ने आज जनसत्ता में प्रकाशित अपने लेख में कुलपति-नया ज्ञानोदय प्रकरण और उसके प्रति लेखक समाज की नाराज़गी की प्रकृति, उसमें अन्तर्निहित पहलुओं को बड़े वैचारिक परिप्रेक्ष्य में देखा है. साथ ही, कुछ ऐसे ज़रूरी सवाल इस लेख में उठाये गए हैं जिनके जवाब …

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बेदिल की मुश्किल: असद ज़ैदी

इस आयोजन के तो नागरजी मैं सख़्त ख़िलाफ़ हूँ लिखित में कोई बयान पर मुझसे न लीजिये मैं जो कह रहा हूँ उसी में बस मेरी सच्ची अभिव्यक्ति है वैसे भी मौखिक परंपरा का देश है यह जीभ यहाँ कलम से ज़्यादा ताकतवर रहती आयी है नारे से ज़्यादा असर …

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असंभावित की संभावना का लेखक

पुर्तगाल के नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक जोसे सरामागो का हाल में ही निधन हो गया. उनके जीवन और साहित्य पर यह लेख मैंने कादम्बिनी पत्रिका के लिए लिखा था. जो उसके अगस्त अंक में प्रकाशित हुआ है-प्रभात रंजन जोसे सरामागो डॉट ब्लॉस्पॉट डॉटकॉम– सतासी साल की उम्र में दिवंगत हुए …

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सरस्वती मिनरल वॉटर प्राईवेट लिमिटेड

मूलतः कवि गिरिराज किराड़ू अपने प्रयोगधर्मी गद्य के लिए भी पहचाने जाते हैं. पिछले दिनों उनकी कुछ कहानियों ने अपने शिल्प, अपनी किस्सागोई से प्रभावित किया. नॉन–फिक्शन में भी उन्होंने खासे प्रयोग किये हैं. काफी गंभीर बात खिलंदड़े अंदाज़ में कह जाना उनकी शैली की एक विशेषता है. प्रस्तुत है …

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नेमिचंद्र जैन स्मरण

आज कवि–आलोचक–नाट्य–विशेषज्ञ नेमिचंद्र जैन की ९१वीं जयन्ती है. तार सप्तक के इस कवि ने साहित्य की अनेक विधाओं में सिद्धहस्तता से लेखन किया, नाट्यालोचन की संभावनाओं का विस्तार किया. लेकिन किसी तरह की होड़ की पंक्तिबद्धता में वे नहीं पड़े, उन्होंने विनम्रता की करबद्धता को अपनाया, वे मूलतः कवि थे …

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बेशर्म समय की शर्म

बीते ९ अगस्त को मनोहर श्याम जोशीजी का जन्मदिन था इसलिए उनकी ही एक बात हाल की घटनाओं के सन्दर्भ में विशेष तौर पर याद आ रही है. अपनी मृत्यु से कुछ दिन पहले बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था हम ऐसे बेशर्म समय में रह रहे …

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मैं दीवार के साथ खड़ा नहीं हो सकता

हारुकी मुराकामी प्रमुख समकालीन उत्तर-आधुनिक उपन्यासकारों में गिने जाते हैं. वाइल्ड शिप चेज़, काफ्का ऑन द शोर जैसे चर्चित उपन्यासों के इस जापानी लेखक के एक भाषण का अनुवाद प्रसिद्ध लेखक-पत्रकार प्रियदर्शन ने किया है. एक ज़माने में सलमान रुश्दी के प्रसिद्ध उपन्यास मिडनाइट्स चिल्ड्रेन के अनुवाद से चर्चा में …

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वी एन राय और रवीन्द्र कालिया को बर्ख़ास्त किया जाये

जल्दी ही राष्ट्रपति महोदया से समय लेने का प्रयास किया जा रहा है. मुख्यतः लेखिकाओं का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलकर लेखक समाज की व्यथा रखेगा और हम लेखकों की ओर से ज्ञापन उनको सौंपेगा. आप लोगों ने जिस तरह से सहयोग दिया है उसके लिए हम आभार व्यक्त करते हैं. …

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हिंदी अनुवाद में अमिताव घोष का उपन्यास ‘सी ऑफ पॉपीज़’

हिंदी में अमिताव घोष का सी ऑफ पॉपीज़ अफीम सागर के नाम से प्रकाशित हुआ है. ध्यान रहे कि इस उपन्यास की कथा का क्षेत्र पूर्वी भारत है. कहानी उस दौर की है जब वहाँ से लोगों को गिरमिटिया बनाकर मॉरिसस और कैरेबियाई देशों में भेजा जा रहा था. हिंदी …

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