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Prabhat Ranjan

‘न’ पर ‘आ’ की मात्रा ‘ना’!

हाल में ही नामवर सिंह की जीवनी आई थी ‘अनल पाखी’, जिसके लेखक हैं युवा लेखक अंकित नरवाल। आज नामवर जी की जयंती पर पढ़िए इस जीवनी का पहला अध्याय जो उनके शुरुआती जीवन को लेकर है- ============================== जीवनारंभ… जन्म को मिला ‘जीयनपुर’ कैसा था यह जीवन? बनारस की आबोहवा …

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युवा कवि को लिखा एक ख़त: “तूजी शेरजी” को लिखे गए कृष्ण बलदेव वैद के एक ख़त का अनुवाद

कल प्रसिद्ध लेखक कृष्ण बलदेव वैद की जयंती है। इस अवसर पर प्रस्तुत है जानी-मानी कवयित्री, लेखिका, अनुवादक तेजी ग्रोवर के नाम उनकी लिखी एक चिट्ठी, जिसका अंग्रेज़ी से हिंदी अनुवाद तेजी ज़ी ने ही किया है- ============================= यह ख़त सम्भवतः 6 जून 1984 से कुछ समय पहले डलहौज़ी में …

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आलोक शर्मा की तीन कविताएँ

आलोक शर्मा अंग्रेज़ी के वरिष्ठ पत्रकार हैं। टाइम्स ऑफ़ इंडिया समूह में काम करते हैं। हिंदी में कविताएँ लिखते हैं। अपने समय को देखने का एक नज़रिया देते हैं। आज उनकी तीन कविताएँ पढ़िए- ====================   सलाम दानिश —————-     फ़रेब की चकाचौंध में चौंधिया जाती हैं आँखें और …

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प्रियंका ओम की कहानी ‘शर्त एक सौ अस्सी रुपये की’

आज पढ़िए युवा लेखिका प्रियंका ओम की कहानी ‘शर्त एक सौ अस्सी रुपये की’, यह कहानी ‘पाखी’ में प्रकाशित है। आप यहाँ पढ़कर अपनी राय दे सकते हैं- ============================================= बेटे के चीखने की आवाज़ आ रही थी; वह नींद में डर गया था, शायद कोई बुरा सपना देखा होगा | …

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कुमाऊँ प्रवास: यही है वह दिन के जिसका वादा था

युवा लेखिका प्रदीपिका सारस्वत ने अपने कुमाऊँ प्रवास के अनुभवों को डायरी रूप में दर्ज किया है। उसका एक चुनिंदा अंश उन्होंने जानकी पुल के पाठकों के लिए साझा किया है। आप भी पढ़िए- ============================== यह सप्ताहांत बाकी सप्ताहांतों से बहुत अलग बीता. यह पंक्ति टाइप करने के बाद मैं …

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सुरेन्द्र मोहन पाठक का व्यंग्य ‘बाल साहित्य कैसे लिखें’

जाने-माने लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और दुबारा लेखन में रम गए हैं। यह उनका नया व्यंग्य पढ़िए, जो खास आपके लिए लिखा है उन्होंने- ================================ ‘बाल साहित्य कैसे लिखें’ (पाठ्यक्रम में रूचि रखने वाले व्यक्तियों के लिए)   हमें विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है …

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भिखारी ठाकुर पाथब्रेकर-पाथमेकर-सेल्फमेड कलाकार थे!

आज भिखारी ठाकुर की 50 वीं पुण्यतिथि है। इस अवसर पर उनके महत्व को रेखांकित करते हुए यह लेख लिखा है प्रसिद्ध लोक गायिका और लेखिका चंदन तिवारी ने। आप भी पढ़िए- ===================================== ‘भिखारी‘ जैसे सेल्फमेड नायकों का पाठ नयी पीढ़ी पढ़े,जाने,समझे, कुछ मुश्किलें दूर होंगी चंदन तिवारी आज 10 …

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दिलीप कुमार की शख़्सियत सलीम खान की कलम से

महान अभिनेता दिलीप कुमार साहब के निधन की खबर आ रही है। मुझे उनकी शख़्सियत पर सलीम खान के लिखे इस लेख की याद आई। दिलीप कुमार पर लिखा गया यह एक शानदार लेख है। यह लेख उनकी आत्मकथा ‘वजूद और परछाईं’ में शामिल है। वाणी प्रकाशन से प्रकाशित इस …

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आमाके… दाओ! आमाके…दाओ: शरतचंद्र और ‘आवारा मसीहा’

‘आवारा मसीहा’ शरतचंद्र की जीवनी है। विष्णु प्रभाकर की बरसों की तपस्या का परिणाम। इस यादगार किताब पर एक पठनीय टिप्पणी लिखी है लेखिका निधि अग्रवाल ने। आप भी पढ़िए- ====================== आमाके… दाओ! आमाके…दाओ! डॉ. निधि अग्रवाल कहते हैं जब रवींद्रनाथ ठाकुर ने शरतचन्द्र से कहा था-  “तुम अपनी आत्मकथा …

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‘बिसात पर जुगनू’ की काव्यात्मक समीक्षा

यतीश कुमार की काव्यात्मक समीक्षा शैली से हम सब बखूबी परिचित हैं। आज उन्होंने अपनी शैली में वंदना राग के उपन्यास ‘बिसात पर जुगनू’ की समीक्षा की है। मौका लगे तो पढ़िएगा- ===============================   सुना है कि पुराने ज़माने में जुगनुओं को एक डिब्बे में बंद कर उससे रात में …

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