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Prabhat Ranjan

श्री श्री रविशंकर की पहली आधिकारिक जीवनी वेस्टलैंड से प्रकाशित

वेस्टलैंड बुक्स से श्री श्री रविशंकर की आधिकारिक जीवनी ‘गुरुदेव शिखर पर अचल’ का प्रकाशन हुआ है. इसे लिखा है उनकी बहन भानुमति नरसिम्हन ने- मॉडरेटर   ========================= श्री श्री रविशंकर की बहन भानुमति नरसिम्हन ने गुरुदेव: शिखर के शीर्ष पर शीर्षक से श्री श्री रविशंकर की जीवनी का लोकार्पण किया.  आर्ट ऑफ़ लिविंग के आध्यात्मिकगुरु और संस्थापक  गुरुदेव श्री श्री रविशंकर की ये सबसे पहली आधिकारिक जीवनी है| इस पुस्तक में उनके बचपन से लेकर बड़े होने तक की यात्रा पर प्रकाश डाला गया है, एक बेफ़िक्र बालक से युवावस्था में साधुओं की संगति में रहने वाले युवकतक,  एक युवा ध्यान शिक्षक से परमपूज्य आध्यात्मिक गुरु तक| ये उस जीवन के विषय में है जिसने मानवीय प्रयासों के प्रत्येक क्षेत्र में एक गहन बदलाव किया–कला से संरचना तक, स्वास्थ्य सेवा से पुनरोद्धार तक, आत्म-शांतिसे बाह्य उत्साह तक| भानुमति कहती हैं,”गुरुदेव खुली किताब के समान हैं और हालांकि लोग उन्हें जानते हैं पर दरअसल कोई वास्तविक  रूप से उन्हें नहीं जानता |जब मैंने येपुस्तक लिखनी शुरू की, मैंने इस बात का ख्याल रखा कि ये नए पाठकों के लिए उपयुक्त हो| किताब लिखने का मेरा उद्देश्य सिर्फ अपने पाठकों को ख़ुश करना होता  है| मुझे आशा है कि ये पुस्तक  पाठकों के जीवन को समृद्ध  बनाने में सहायक होगी|” इस पुस्तक को लिखने के अलावा गुरुदेव की छोटी बहन होने के नाते भानुमति नरसिम्हा उत्थान संबंधी कई प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व भी करती हैं, जिसमें आर्ट ऑफ़लिविंग का स्कूल संबंधी प्रोजेक्ट भी शामिल है| इसके अंतर्गत देश के दूर-दराज़ के क्षेत्रों में क़रीब पचास हज़ार विद्यार्थियों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है|आप विश्व में हर धर्म और राष्ट्र के लोगों को ध्यान सिखाने के लिए यात्राएं भी करती हैं|       भानुमति नरसिम्हन के विषय में: भानुमति नरसिम्हन …

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उषा प्रियंवदा को पढ़ना  एक साथ बहुत से  बिंबों में घिर जाना है

रोहिणी अग्रवाल हमारे समय की एक सजग और गंभीर आलोचक हैं. अभी हाल में ही उन्होंने राजकमल प्रकाशन की ‘प्रतिनिधि कहानियां’ सीरीज में उषा प्रियंवदा की कहानियों का संचयन तैयार किया है. एक जमाने में नामवर सिंह ने नई और पुरानी कहानियों के अंतर को स्पष्ट करने के लिए उषा प्रियंवदा …

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पत्रकारिता और उपन्यास एक ही माँ की संतान हैं: मार्केज़

गाब्रिएल गार्सिया मार्केज़ की किताब ‘द स्टोरी ऑफ़ ए शिपरेक्ड सेलर’ एक ऐसी किताब है जो पत्रकारिता और साहित्य के बीच की दूरी को पाटने वाला है. एक ऐसे नाविक की कहानी है जो जहाज के टूट जाने के बाद भी समुद्र में दस दिन तक जिन्दा बचा रहा था. …

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‘चाहे हमें कारतूस से मार दिया जाए लेकिन हम समाज की बुराई को लगातार उठाते रहेंगे’

सुरेश कुमार लखनऊ विश्वविद्यालय के शोधार्थी हैं. उन्होंने नवजागरणकालीन पत्रकारिता पर लिखते हुए इस लेख में यह बताया है कि किस तरह पत्रकारिता के कारण उस ज़माने में हिंदी के बड़े बड़े लेखकों-संपादकों को धमकियाँ मिलती रहती थीं लेकिन वे डरते नहीं थे बल्कि अड़े रहते थे. समाज की बुराइयों …

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असहमति हो या सहमति पर बोलें जरूर!

योगेश प्रताप शेखर बिहार के केन्द्रीय विश्वविद्यालय, गया में प्राध्यापक हैं. शिक्षा को लेकर बहुत अच्छे फेसबुक पोस्ट लिखते हैं. कई बार मैं उनसे असहमत होता हूँ लेकिन पढता नियमित हूँ. बहुत स्पष्ट सोच के साथ, गहरी बौद्धिकता के साथ हर विषय पर लिखते हैं. यह पत्र उन्होंने केन्द्रीय विश्वविद्यालय …

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अंकिता जैन की कविताएँ

अंकिता जैन को हम सब ‘ऐसी वैसी औरत’ की लेखिका के रूप में जानते हैं. वह एक संवेदनशील कवयित्री भी हैं. आज उनकी कुछ कविताएँ- मॉडरेटर ================== क्यों सूख गई नदियाँ नदियाँ, जो सूख गईं सदा के लिए वे इसलिए नहीं कि गर्मी लील गई उन्हें बल्कि इसलिए कि हो …

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लेखकों को ‘चीयर अप’ करने के लिए पुस्तक विमोचन पार्टी में कोई हर्ज नहीं है!

पुस्तक विमोचन संस्कृति पर लेखक महेंद्र राजा जैन का यह लेख आज ‘दैनिक हिन्दुस्तान’ में प्रकाशित हुआ है. न पढ़ा हो तो पढ़ लें. बेहद दिलचस्प है- मॉडरेटर ========================== जैसे यह पुस्तक विमोचन की राजधानी ही हो। लंदन में प्राय: हर रोज एक-दो नहीं, वरन चार या पांच पुस्तकों का …

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शर्मिला जालान की कहानी ‘रंगरेज़’

शर्मिला जालान इस कोलाहल भरे समय में चुपचाप लेखन कर रही हैं. उनकी कहानियों में बांगला कथा परम्परा की भरी-पूरी सामाजिकता दिखाई देती है. रबीन्द्र संगीत की तान और कहीं कुछ न होने की हूक. उनकी एक कहानी ‘रंगरेज़’ पढ़ते हैं और साथ में उनके नए कथा संग्रह ‘राग-विराग और …

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कला में जिसे ‘न्यूड’ कहते हैं वह असल में ‘प्योर फीमेल फॉर्म’ है

जम्मू के पहाड़ी क़स्बे पटनीटॉप के कला शिविर की यात्रा हम उपन्यासकार-कथाकार गीताश्री के लगभग काव्यात्मक रपटों के माध्यम से कर रहे. यह समापन क़िस्त है- मॉडरेटर ==================================== चलते रहते हैं कि चलना है मुसाफिर का नसीब … पक्षी आकाश में कहीं खो चुके हैं, आखिरी बादल भी उड़ा चला …

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बिकने वाला आर्ट अलग, इतिहास में जाने वाला आर्ट अलग!

गीताश्री के लेखन से मेरा परिचय उनकी रपटों को पढ़कर ही हुआ था. नवभारत टाइम्स से आउटलुक तक. बहुत दिनों बाद पटनीटॉप के कला शिविर को लेकर उनकी रपटें एक के बाद एक पढने को मिल रही हैं. यह तीसरी क़िस्त है- मॉडरेटर ========== आपको अपने सभी सिद्धांतों और विचारों …

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