Home / Prabhat Ranjan (page 30)

Prabhat Ranjan

अनुकृति उपाध्याय का व्यंग्य ‘मेला देखन मैं गई’

‘जापानी सराय’ की लेखिका अनुकृति उपाध्याय ने इस बार व्यंग्य लिखा है। फागुन में साहित्य महोत्सवों की संस्कृति पर एक फगुआया हुआ व्यंग्य। आप भी पढ़िए- मॉडरेटर ================= मेला देखन मैं गई भूतपूर्व अभिनेत्री सत्र शुरू होने के आधे घंटे बाद लहराती हुई आई थी और छद्म मासूमियत के साथ …

Read More »

अभिषेक रामाशंकर की कहानी ‘लूट’

युवा लेखक अभिषेक रामाशंकर की कविताओं से तो मैं प्रभावित था, आज उनकी यह कहानी भी पढ़ी। आप भी पढ़िए- मॉडरेटर ============================== — लूट— सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ था , पुरज़ोर सन्नाटा । दर्जनों गाड़ियां जल चुकी थीं , कई मोटरसाइकिलें , बसों और दुकानों को आग में झोंक …

Read More »

युवा कवि कुशाग्र अद्वैत की कुछ कविताएँ

नए लड़के जब अच्छा लिखते हैं तो बहुत खुशी होती है। वे भाषा का भविष्य हैं, भाषा की श्रेष्ठ सर्जनशीलता का। कुशाग्र अद्वैत बीए तृतीय वर्ष के छात्र हैं, काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ते हैं। ज़रा उनकी कविताओं की ताज़गी देखिए- मॉडरेटर ================================= 1 एक सोलह बरस के लड़के की …

Read More »

‘ओस पसीना बारिश फूल’ पर एक काव्यात्मक टिप्पणी

युवा कवि मिथिलेश कुमार राय की कविताओं में गाँव का दैनन्दिन जीवन इतनी सहजता से दर्ज होता है पढ़कर आप हैरान रह जाते हैं। उनकी कविता उनके जीवन से गहरे जुड़ी कविता है। उनके कविता संग्रह ‘ओस पसीना बारिश फूल‘ की प्रकाशन के बाद अच्छी चर्चा हुई है। उनके इसी …

Read More »

कनुप्रिया गुप्ता की कहानी ‘स्ट्राबेरी फार्म’

कनुप्रिया गुप्ता अमेरिका के न्यू जर्सी में रहती हैं। छोटी छोटी कहानियाँ लिखती हैं। यह उनकी नई कहानी है- मॉडरेटर =============================================== शाम के धुंधलके का असर था या आस पास चारों तरफ फैले स्ट्राबेरी के बाग का रंग ,सब कुछ लाल हो रहा था, सूरज जो धीरे धीरे लौट जाना …

Read More »

वंदना राग के उपन्यास ‘बिसात पर जुगनू’ का एक अंश

वंदना राग के उपन्यास ‘बिसात पर जुगनू’ को मैंने पूरा पढ़ लिया है तो आपको कम से कम एक अंश पढ़वाने का फ़र्ज़ तो बनता ही है। अगर राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित इस उपन्यास का अंश पसंद आए तो कल इस उपन्यास पर आयोजित कार्यक्रम में भी ज़रूर पधारिएगा- प्रभात …

Read More »

हजारों वर्ष बाद भी स्त्रियों की स्थिति में बहुत बदलाव नहीं आया है

आशा प्रभात मेरे गृह नगर सीतामढ़ी में रहती हैं और अपने लेखन से उन्होंने बड़ी पहचान बनाई है। सीता पर उनका उपन्यास ‘जनकनंदिनी’ हो या ‘साहिर समग्र’ का संपादन आशा जी के लेखन-संपादन से हिंदी समाज अच्छी तरह परिचित है,उर्मिला पर उनका उपन्यास जल्द ही आने वाला है उनसे बातचीत …

Read More »

प्यार वह फल है जिस पर मासूमियत का छिलका होता है

समकालीन कवियों में सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले कवियों में गीत चतुर्वेदी का नाम निर्विवाद रूप से आता है। रुख़ प्रकाशन से प्रकाशित उनके कविता संग्रह ‘ख़ुशियों के गुप्तचर’ को ख़ूब पसंद किया जा रहा है। कवि यतीश कुमार ने इस संग्रह की कविताओं की काव्यात्मक समीक्षा अपनी ख़ास …

Read More »

इस वसंत को शरद से मानो गहरा प्रेम हो गया है

कृष्ण बलदेव वैद को पढ़ा सबने समझा किसने? शायद उन्होंने भी नहीं जो उनको समझने का सबसे अधिक दावा करते रहे। मुझे लगता है सबसे अधिक उनको उस युवा पीढ़ी ने अपने क़रीब पाया जो उनके अस्सी पार होने के आसपास उनका पाठक बना। युवा लेखिका सुदीप्ति के इस लिखे …

Read More »

एक ही पृथ्वी पर कितने बनारस

आज सुबह सुबह आलोचक-प्रोफ़ेसर पंकज पराशर का यह लेख पढ़ा। पढ़ते ही साझा करने का ऐसा मन हुआ कि एयरपोर्ट पर बैठे बैठे आज पहली बार फ़ोन से पोस्ट कर रहा हूँ। मैं यात्रा में हूँ, आप इस लेख के साथ परतदार बनारस की यात्रा कीजिए- प्रभात रंजन ——————————————————————- संतों-असंतों …

Read More »