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Prabhat Ranjan

आलोक कुमार मिश्रा की कहानी ‘दो चुटकी नमक’

आज युवा लेखक आलोक कुमार मिश्रा की कहानी पढ़िए। महामारी की पृष्ठभूमि में एक मार्मिक कहानी- ===================================== “अरे साब, जरा सुनो तो। दो चुटकी नमक डाल दो इस डिबिया में…खुदा जाने ज़ुबान क्यों उतरी हुई है…खाना बेस्वाद और फीका सा लगे है।” एक दुबले-पतले, मेहंदी लगी लाल दाढ़ी वाले लगभग …

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अणुशक्ति सिंह की कहानी ‘नो स्मेल, येट नेगेटिव…’

आज पढ़िए युवा लेखिका अणुशक्ति सिंह की कहानी। अणुशक्ति सिंह का उपन्यास ‘शर्मिष्ठा’ चर्चित रहा है। यह उनकी नई कहानी है- ======================   ओडोनिल की एकदम मद्धिम पड़ चुकी ख़ुशबू, टिपिर टिपिर चूता वाश बेसिन का नल, खिड़की की दूसरी तरफ़ रखा मोतिये के फूलों का गमला। ‘बाथरूम के बाहर …

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मानव कौल के उपन्यास ‘अंतिमा’ की काव्यात्मक समीक्षा

मानव कौल के उपन्यास ‘अंतिमा’ की अपने खास कविताई अन्दाज़ में समीक्षा की है यतीश कुमार ने। यह उपन्यास हिंद युग्म से प्रकाशित है- =========================   पहली बार हिंदी में शब्दों का जादुई वितान फैंटेसी/फंतासी विनोद कुमार शुक्ल रचित ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ पढ़ी तब समझा शब्दों से …

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नितिन यादव की कहानी ‘द बैटल ऑफ द ऐप्स’

आज युवा लेखक नितिन यादव की कहानी पढ़िए। जब युवा प्रयोग करते हैं, कुछ नया करते हैं तो अच्छा लगता है। इस कहानी को पढ़ते हुए ध्यान इस बात की ओर गया कि हिंदी में सबसे अधिक प्रयोग गद्य में हुए हैं। लगता है जैसे कविता एक ठहरी हुई विधा …

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इदरीस भाई: एक सफ़र चालीस रूपये से डाइरेक्टर ग़ालिब इंस्टिट्यूट तक

सुहैब अहमद फ़ारूक़ी पुलिस अफसर हैं, गम्भीर शायर हैं। वे उन शायरों में हैं जो अच्छा गद्य भी लिखते हैं, जैसे यह संस्मरण देख लीजिए- ========================================== ‘मुन्ना! क्या यह स्पोर्ट्सस्टार मैं ले लूँ?’ इदरीस भाई ने यूँ तो स्पोर्ट्स्टार ले तो रखी ही थी अपने हाथों में। मगर इस ‘ले …

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     पूनम अरोड़ा की कहानी ‘उस हवा का रंग स्लेटी था’

पूनम अरोड़ा समकालीन साहित्य में अपनी अलग उपस्थिति रखती हैं। उनकी कहानियाँ, उनकी कविताओं का अलग ही मिज़ाज है। आज अरसे बाद उनकी नई कहानी पढ़िए- ===========================  साइकिल ठीक गेट के सामने रुकती है. सर पर सफ़ेद सूती कपड़ा बांधे एक भलामानस आवाज़ लगाता है– कूरियर ! आवाज़ के साथ गेट …

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प्राइड मंथ में ‘प्रेग्नेंट किंग’ का अंश

प्राइड मंथ चल रहा है यानी एलजीबीटी समुदाय को लेकर जागरूकता का महीना। मुझे देवदत्त पटनायक के उपन्यास ‘द प्रेग्नेंट किंग’ का ध्यान आया। महाभारत में आए एक प्रसंग को लेकर लेखक ने मिथकीय कथाओं का अच्छा ताना-बना है। पेंगुइन से प्रकाशित इस किताब का सरस हिंदी अनुवाद किया है …

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भैया एक्सप्रेस के भैया और पंजाब दोनों बदल गये हैं

वरिष्ठ लेख सूरज प्रकाश हिंदी की कुछ चर्चित कहानियों का पुनर्पाठ कर रहे हैं। आज पढ़िए अरूण प्रकाश की क्लासिक कहानी ‘भैया एक्सप्रेस’ का पाठ- ========================== 1985 में समर्थ और संवेदनशील कथाकार अरुण प्रकाश की कहानी भैया एक्सप्रेस छपी थी। मूल कहानी के कुछ अंश – भयंकर गरीबी, खाने को …

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हमारी ज़ेब को अब हाजत-ए-रफ़ू क्या है!

फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘पंचलैट’ पर बनी फ़िल्म के ऊपर यह टिप्पणी की है साक़िब अहमद ने। साक़िब किशनगंज में रहते हैं और पुस्तकालय अभियान से जुड़े हैं। आप भी पढ़ सकते हैं- ====================== (पंचलैट के सिनेमाई प्रस्तुतिकरण की मुश्किलें और दुश्वारियां) क्या हर रचनात्मकता को कलात्मकता मान लेना चाहिए? …

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कला-राग की आभा: रस निरंजन

राजेश कुमार व्यास की किताब ‘रस निरंजन’ समकालीन कला पर लिखे निबंधों का संग्रह है। इस किताब पर यह विस्तृत टिप्पणी लिखी है चंद्र कुमार ने। चंद्र कुमार ने कॉर्नेल विश्वविद्यालय, न्यूयार्क से पढ़ाई की। वे आजकल एक निजी साफ्टवेयर कंपनी में निदेशक है लेकिन उनका पहला प्यार सम-सामयिक विषयों …

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