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Prabhat Ranjan

कविता शुक्रवार 14: बसंत त्रिपाठी की कविताएँ सफ़दर शामी के चित्र

‘कविता शुक्रवार’ के इस अंक में बसंत त्रिपाठी की कविताएं और सफदर शामी के चित्र शामिल हैं। बसंत त्रिपाठी का जन्म 25 मार्च 1972 को छत्तीसगढ़ के भिलाई में हुआ। शालेय शिक्षा से लेकर बी-एस.सी, एम.ए. (हिंदी) और पी-एच.डी. तक की शिक्षा भिलाई और दुर्ग में हुई। नाटकों में आरंभ …

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छठी बार का दूसरा वसंत:देवेश पथ सारिया

देवेश पथ सारिया ताइवान के एक विश्वविद्यालय में शोध कर रहे हैं और हिंदी के युवा लेखकों में उनका जाना माना नाम है। सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैं। विश्वविद्यालय के अनुभवों को लेकर उन्होंने यह सुंदर गद्य लिखा है- ================================== सितम्बर 2020 शिन चू सिटी मेरी …

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हिंदी को नवजीवन कैसे मिले!

हिंदी दिवस आने वाला है। हिंदी की दशा दिशा को लेकर गम्भीर चर्चाएँ हो रही हैं। क्या खोया? क्या पाया? आज यह लेख पढ़िए जिसे लिखा है युवा लेखक और राजकमल प्रकाशन समूह के संपादकीय निदेशक सत्यानंद निरुपम ने। भाषा के अतीत-भविष्य, सम्पन्नता-विपन्नता को लेकर उन्होंने कुछ गम्भीर बिंदु उठाए हैं …

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प्रेमाकुल रागमंजरी और दुनियादार काममंजरी गणिकाओं की कथा:  मृणाल पाण्डे

‘बच्चों को न सुनाने लायक बाल कथा’ प्रसिद्ध लेखिका मृणाल पाण्डे की कथा ऋंखला है जिसमें वह हिंदी-संस्कृत की कथा-परम्परा की याद दिला रही हैं। यह पंद्रहवीं कथा है जो सबसे अलग है और सबसे उदास भी। आप भी पढ़ सकते हैं- मॉडरेटर =============== (टीवी और सोशल मीडिया के नक्कारखाने में …

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‘द होली फ़िश’: विस्थापन के बीच अकेली स्त्री का शोकगीत

पिछले दिनों एक ओटीटी मंच पर विमलचंद्र पाण्डेय की फ़िल्म ‘द होली फ़िश’ रिलीज़ हुई, जिसका पता इस लेख में दिया गया है। उसी फ़िल्म पर युवा लेखक जितेंद्र विसारिया ने एक विस्तृत लेख लिखा है। आप भी पढ़ सकते है – ======================== 2004 में वागर्थ का अक्टूबर में नवलेखन …

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कविता शुक्रवार 13: यतीश कुमार की कविताएँ संजू जैन के चित्र

कविता शुक्रवार के इस अंक में यतीश कुमार की कविताएं और संजू जैन के चित्र शामिल हैं।यतीश कुमार (चार्टर्ड इंजीनियर और फेलो) भारतीय रेल सेवा के प्रशासनिक अधिकारी हैं। 22 वर्षों की रेल सेवा के बाद उन्हें भारत वर्ष के “सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम” का सबसे युवा अध्यक्ष एवं प्रबन्ध …

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न कोई वास्को डि गामा होता न कोलंबस और न कोई इब्ने बतूता!

प्रज्ञा मिश्रा ने प्रवास के अनुभवों को लेकर बहुत दार्शनिक लेख लिखा है। वह इंग्लैंड में रहती हैं और जानकी पुल सहित पत्र-पत्रिकाओं में नियमित लिखती रहती हैं- ========== देवदास (संजय लीला भंसाली वाली) फिल्म में देवदास पारो से कहता है, “लंदन की तो बात ही कुछ और है, बड़े …

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उन्नीसवीं शताब्दी ‘स्त्री दर्पण’ और स्त्री शिक्षा

सुरेश कुमार 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध और 20 वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में स्त्रियों से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते रहे हैं। उनका शोध भी इसी काल पर है। इस लेख में उन्होंने 19 वीं शताब्दी के सातवें दशक में प्रकाशित पुस्तक ‘स्त्री दर्पण’ पर लिखा है। यह बताया है …

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हमारा सिनेमा और कहानियाँ बदल रही हैं

हाल में ओटीटी प्लेटफ़ोर्म पर प्रदर्शित कुछ फ़िल्मों, वेब सीरिज़ को लेकर यह लेख लिखा है भूमिका सोनी ने।  भूमिका दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनोमिक्स में पढ़ाई करने के बाद एक बहुराष्ट्रीय बैंक में काम करती हैं और अलग अलग विषयों पर लिखती रहती हैं- ============= भारतीय सिनेमा में हीरो होना अलग …

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समाप्ति: सेल्यूलाइड पर विशुद्ध जादुई यात्रा

सत्यजित राय की फ़िल्म पर यह लेख मूल रूप से अंग्रेज़ी में सत्य चैतन्य ने लिखा है जिसका हिंदी अनुवाद विजय शर्मा ने किया है। आप भी पढ़िए- ============================= जब मैंने सत्यजित राय की ‘तीन कन्या’ की अंतिम फ़िल्म ‘समाप्ति’ देखी तब तक मैंने पहली दोनों मूवी नहीं देखी थी …

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