Home / Prabhat Ranjan (page 50)

Prabhat Ranjan

एनडीटीवी के बच जाने पर ‘विपक्ष’ को ‘जीत’ टाइप एहसास होगा कि नहीं?

कल एनडीटीवी चैनल के के मालिकों/प्रोमोटर्स के यहाँ सीबीआई की छापामारी के कई तरह की बातें सुनने को मिल रही हैं. तथ्यात्मक रूप से दिलीप खान ने बहुत अच्छा लिखा है. जिन्होंने न पढ़ा हो उनके लिए- मॉडरेटर ================================================= NDTV के मालिकाने, शेयर, बीच की ख़रीदफरोख़्त सबसे वाकिफ़ हूं। ये …

Read More »

लापता लड़की…स्लीपिंग पार्टनर नहीं!

वकील-लेखक अरविन्द जैन के कहानी संग्रह ‘लापता लड़की’ की समीक्षा लिखी है लेखक सुधांशु गुप्त ने- मॉडरेटर ======================================================= अरविंद जैन का कहानी संग्रह ”लापता लड़की” पठनीयता और लोकप्रियता के पैरोकारों के लिए नहीं है। उनके लिए तो यह संग्रह बिलकुल भी नहीं है, जो कहानियों में ”रसपान” खोजते हैं। और …

Read More »

क्या राहुल गाँधी स्टडी लीव पर गए थे?

यूपी चुनाव के बाद राहुल गांधी लम्बे समय तक गायब थे. वैसे गायब होना उनकी पुरानी आदत है. बस बीच बीच में ऐसी ख़बरें आती रहीं कि उनको कांग्रेस की अलां बैठक में अध्यक्ष बनाया जा रहा है, फलां बैठक में पार्टी का अध्यक्ष बनाया जा रहा है. इसके अलावा …

Read More »

डूंगरपुर में ‘औरतखोर’ का लोकर्पण

डूंगरपुर में आनंद कुरैशी के कहानी संग्रह ‘औरतखोर’ का लोकार्पण हुआ. लोकार्पण प्रसिद्ध लेखक असगर वजाहत ने किया. एक रिपोर्ट- मॉडरेटर ================= डूंगरपुर। बहुत सा श्रेष्ठ साहित्य भी विभिन्न कारणों से पाठकों तक पहुँच नहीं पाता. आनंद कुरेशी जैसे कथाकार को भी व्यापक हिन्दी पाठक वर्ग तक पहुंचाने के लिए …

Read More »

भारत का आम आदमी- सीधा-सादा, मेहनती, ईमानदार

वरिष्ठ लेखिका विजय शर्मा ने दिल्ली यात्रा और एक ऑटोचालक पर बड़ा दिलचस्प संस्मरण लिखा है. साझा कर रहा हूँ- मॉडरेटर ============ इस बार की दिल्ली यात्रा में समय कम था और काम बहुत ज्यादा। दिल्ली खूब फ़ैल गई है। अब अव्ह दिल्ली नहीं है जो अस्सी के दशक में …

Read More »

मान्यता है दशमी के दिन गंगा धरती पर आई थीं इसीलिए गंगा दशहरा

आज गंगा दशहरा है. आज के दिन इतना अच्छा पढने को मिल गया. वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा ने लिखा है. आप भी पढ़िए- मॉडरेटर ============ कुछ साल पहले की बात है। ऋषिकेश में रिवर राफ्टिंग कर रहे थे।एक अलग अनुभव है। गंगा के साथ-साथ बहने का आनंद। फिर मैं अपने …

Read More »

एक अमेरिकी लेखक की नजर में आतंकवादी

2009 में दिवंगत हुए जॉन उपडाइक की गणना आधुनिक अमेरिका के लिख्खाड़ और गंभीर लेखकों में की जाती रही है। 2006 प्रकाशित टेररिस्ट(आतंकवादी) उनका बाइसवां और जीवनकाल में प्रकाशित संभवतया अंतिम उपन्यास है। उपन्यास में अमेरिकी समाज की बदलती मानसिकता झलकती है. नाइन-एलेवन की घटना के बाद अमेरिका और योरोपीय …

Read More »

चरम देशभक्ति के माहौल में इण्डिया-पाकिस्तान का मैच!

4 जून है. दिन इतवार है, माहे-रमजान है, भारत पाकिस्तान में नफरत की राजनीति चरम पर है. यानी सब कुछ पूरा सेट है. भारत-पाकिस्तान के क्रिकेट मैच के लिए. टीवी चैनल वालों का बस चले तो मैच की जगह भारत पाकिस्तान में युद्ध करवा कर उसी को लाइव दिखा दें. …

Read More »

‘जन गण मन’ और रवीन्द्रनाथ टैगोर का पत्र

कल जॉर्ज पंचम की जयंती पर यह जिक्र आया था कि महाकवि टैगोर ने उनको भारत भाग्य विधाता लिखा था. टैगोर साहित्य के मर्मज्ञ उत्पल बैनर्जी ने पुलिन विहारी सेन को टैगोर का लिखा यह पत्र उपलब्ध करवाया जिसमें उन्होंने साफ़ साफ़ लिखा है कि ‘जन गण मन’ का उद्देश्य …

Read More »

समर्थ वशिष्ठ, ‘सपने में पिया पानी’ और एक छोटी सी टिप्पणी

समर्थ वशिष्ठ का कविता संग्रह ‘सपने में पिया पानी‘ पर युवा लेखक अनघ शर्मा की टिपण्णी- ============================================= मैंने इन दिनों इधर जिन कविताओं को पढ़ा उनमें समर्थ वशिष्ठ के राजकमल प्रकाशन से आये संग्रह “सपने में पिया पानी” की कवितायें बहुत अच्छी, अलग और नये मिजाज़ की लगीं| ये समर्थ …

Read More »