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Prabhat Ranjan

 डा.आंबेडकर और स्त्री मुक्ति का स्वप्न

 आज बाबासाहेब भीमराव आम्बेडकर की जयंती पर पढ़िए युवा शोधार्थी सुरेश  कुमार का लेख जो डॉक्टर आम्बेडकर के व्यक्तित्व के एक और विराट पहलू से साक्षात्कार करवाने वाला है- ======================== बीसवीं सदी के महान विचारक और सुधारक डा.भीमराव आंबेडकर अपने चिंतन में समाजिक समस्याओं पर सोचते हुए स्त्री समस्या पर  …

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शरद चंद्र श्रीवास्तव की कुछ कविताएँ

a कुछ दिन पहले ही भाई शरद चंद्र श्रीवास्तव ने अपनी कुछ कविताएँ पढ़ने के लिए भेजी थीं। क्या पता था अब उनसे कभी संवाद नहीं हो पाएगा। उनकी इन कविताओं के साथ जानकी पुल की ओर से शरद जी को श्रद्धांजलि- =============================   1. “अपने अपने एकलव्य”   हर …

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 डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया शीर्षक महाकथा में जो लेखन रहता है

गिरिराज किराड़ू का यह लेख बहुत पुराना है। उन दिनों का जब वे हिंदी के आधुनिक लेखकों के लेखन के मिथ को समझने-समझाने का प्रयास कर रहे थे। बड़ी-बड़ी बहसों को समझने का प्रयास कर रहे थे। निर्मल वर्मा आधुनिक हिंदी की एक बड़ी बहस रहे हैं। उनके आत्म और …

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इरशाद खान सिकंदर की भोजपुरी ग़ज़लें और नज़्म

आज इरशाद ख़ान सिकंदर की कुछ ग़ज़लें और नज़्म भोजपुरी में पढ़िए- ================================   1 हम मान भी लीं लेकिन आसार त कम बाटे जे पीही उहे जीही कुदरत के नियम बाटे   पी जाला अन्हरिया के सूरज भी शराबी ह बा चंदवो शराबी पर उम्मीद से कम बाटे   …

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कथ्य कैसे ढलता है कहानी में: धीरेंद्र अस्थाना

धीरेन्द्र अस्थाना हिंदी के जाने-माने कथाकार-उपन्यासकार हैं। कहानी लिखने की प्रक्रिया को लेकर उनका यह लेख हर युवा लेखक-पाठक को पढ़ना चाहिए- ================ कथ्य कैसे आता है? कोई एक घटना,अनेक घटनाओं के टुकड़े, कोई विचार,बार बार देखा जा रहा कोई स्वप्न,किसी और या अपने साथ घटी दुर्घटना/दुर्घटनाएं, सार्वजनिक संहार या …

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पूजा प्रसाद की कुछ कविताएँ

आज कविताएँ पूजा प्रसाद की। पूजा पेशे से पत्रकार हैं। फ़िलहाल न्यूज़ 18 ऑनलाइन से जुड़ी हैं। लम्बे समय से इस पेशे में हैं। उनकी कविताओं में देखने का एक अलग नज़रिया लगा और कहन की एक अलग शैली। आप भी पढ़िए- =============================   अब धैर्य नहीं     उम्मीद, …

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प्रज्ञा की कहानी ‘बुरा आदमी’

प्रज्ञा समकालीन कहानी का जाना-माना नाम हैं। आज उनकी कहानी ‘बुरा आदमी’ पढ़िए। यह कहानी ‘पहल’ पत्रिका के कहानी विशेषांक में प्रकाशित हुई थी। आप यहाँ पढ़ सकते हैं।      आज मैंने ठान लिया था टूटेजा सर शाम के समय कोई चक्कर लगवाएंगे तो साफ इंकार कर दूंगा। कई दिन …

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सोशल मीडिया ने लेखन को एक अभिनय, परफॉर्मेंस में बदल दिया है: आशुतोष भारद्वाज

आज हिंदी आलोचना के लिए दिया जाने वाला प्रतिष्ठित देवीशंकर अवस्थी सम्मान युवा लेखक-आलोचक आशुतोष भारद्वाज को दिया जा रहा है। यह पुरस्कार समारोह वर्चुअल दिया जाएगा। इस अवसर पर जानकी पुल ने आशुतोष से बातचीत की है। मेरे प्रश्नों के बहुत मानीखेज जवाब आशुतोष भारद्वाज ने दिए हैं। आप …

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    पहले दलित क्रिकेटर पी. बालू, जिन्होंने भद्रजनों के बीच साबित की अपनी प्रतिभा

युवा शोधकर्ता सुरेश कुमार ने माधुरी पत्रिका में 1928 में प्रकाशित एक लेख के हवाले से पहले दलित क्रिकेटर पी बालू पर यह लेख लिखा है। आप भी पढ़िए उस महान खिलाड़ी के बारे में जो तब का खिलाड़ी था जब भारतीय क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली थी- ============== इसमें …

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प्रिंट बनाम/सह डिजिटल: ‘पहल’ के बंद होने के संदर्भ में

पिछले दिनों ज्ञानरंजन जी की पत्रिका ‘पहल’ के बंद होने की खबार आई तो फ़ेसबुक पर काफ़ी लोगों ने लिखा। युवा कवि-लेखक देवेश पथ सारिया ने इस बहाने प्रिंट बनाम डिजिटल की बहस पर लिखा है। एक ऐसा लेख जिसके ऊपर बहस होनी चाहिए- ========================= वरिष्ठ कथाकार ज्ञान रंजन जी …

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