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pravin kumar

नॉर्वे में हूँ, निर्मल वर्मा की ‘परिंदे’ याद आ रही है!

नॉर्वे प्रवासी डॉक्टर-लेखक प्रवीण कुमार झा के व्यंग्य हम पढ़ते रहे हैं लेकिन यह व्यंग्य नहीं है. 25 अक्टूबर को निर्मल वर्मा की पुण्यतिथि है, उसी अवसर पर उन्होंने एक निर्मल-कथा लिखी है. पढ़ा जाए- मॉडरेटर  ===========   हिंदी कथाकारों में जो पहाड़ों में जीए, यूरोप वगैरा घूमे, उनमें और जो …

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बॉब डिलन को नोबेल और कवि कक्का का फोन!

गायक, गीतकार बॉब डिलन को साहित्य का नोबेल क्या मिला हर तरफ चर्चाओं का बाजार गर्म है. प्रवीण कुमार झा का एक अवश्य पठनीय टाइप व्यंग्य पढ़िए- मॉडरेटर  =============================================== कवि कक्का का अचानक फोन आया और डिसकनेक्ट हो गया। कवि कक्का, वही जिनका साहित्य अकादमी दो नम्मर से रह गया …

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पाकिस्तान का नमक खाया है

नॉर्वे-प्रवासी डॉक्टर व्यंग्यकार प्रवीण कुमार झा आज नए व्यंग्य के साथ- मॉडरेटर  ======================================================= मैं पाकिस्तान का नमक खाता हूँ। भड़किये नहीं! मैं ही नहीं, कई प्रवासी भारतीय पाकिस्तान का नमक-मसाला खाते हैं। दरअसल, यहाँ जितने भारतीय नमक-मसाले की दुकानें हैं, पाकिस्तानियों की है। अधिकतर रेस्तराँ, जिनमें हर तीसरे का नाम …

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फेसबुक-डिबेट और फेसबुकिया सपने

आजकल हिंदी वाले फेसबुक पर खूब डिबेट में लगे हुए हैं. अपने डॉक्टर व्यंग्यकार प्रवीण कुमार झा का यह व्यंग्य-लेख इसी पर है- मॉडरेटर  ========================== प्रयाग में आज शास्त्रार्थ ‘रिविजिटेड‘ का आयोजन है। रियैलिटी शो टाइप। मंच सजा है। ‘राईट‘ की ओर ‘मार्कण्डेय‘ लिखा है, ‘लेफ्ट‘ की ओर लिखा है …

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ओलम्पिक के नाम डॉक्टर की चिट्ठी

आज व्यंग्यकार प्रवीण कुमार झा की चिट्ठी ओलम्पिक के नाम- मॉडरेटर  ================================================ हम किस मिट्टी के बने हैं? किस चक्की का आटा खाते हैं? या सवाल यूँ तो वाहियात है, पर हमारी बनावट से जुड़ा है। उत्तर-पूर्व के लोग अक्सर फिट-फाट होते हैं, ‘V’ आकार के शरीर वाले। बंगाल-उड़ीसा तक आते-आते …

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दो नम्मर से साहित्य अकादमी रह गया था!

नॉर्वे प्रवासी डॉक्टर प्रवीण कुमार झा के व्यंग्य कुछ दिन न पढ़ें तो कुछ कुछ होने लगता है. यह ताज़ा है. पढियेगा- मॉडरेटर  =================== जब हिंदी लिखने की सोची तो कवि कक्का का ख्याल आया। इलाके के इकलौते ‘सर्टिफाइड‘ कवि। बाबा नागार्जुन के साथ उठना-बैठना था। कहते हैं दो नम्मर …

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कोई हिप्पी, कोई साधु। कोई नेता, कोई अभिनेता। अजीब मिक्स है!

पेशे से डॉक्टर प्रवीण कुमार झा मूलतः व्यंग्यकार हैं. आज उनका यह व्यंग्य लेख यमलोक में ‘बलात्कारी विभाग’ को खुलने को लेकर है. एक चुभता हुआ व्यंग्य- मॉडरेटर  ================================================== यमलोक में आज रौनक है। ब्रह्मा जी अभी-अभी ‘बलात्कारी-विभाग‘ का रिबन काट कर गए हैं। यमदूत छक कर छोले-भटूरे खा रहे …

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मैं भारतीय हूँ, और मैं रेफूजी नहीं

दिल्ली के इरविन हॉस्पिटल से पढाई करने के बाद प्रवीण कुमार झा अमेरिका में चिकित्सक बने. आजकल नॉर्वे में हैं. वहीं से उन्होंने एक मार्मिक पत्र भेजा है. आप सब भी पढ़ें- मॉडरेटर  =========================================================== बड़ा अजीब देश है। जिसे देखो कान में हेडफोन लगाये कहीँ भाग रहा है? किस से …

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