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TRIPURARI

युवा शायर #18 प्रदीप ‘तरकश’ की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है प्रदीप ‘तरकश’ की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ====================================================== ग़ज़ल-1 मैं अगर हूँ भी तो बाज़ार की सूरत में नहीं सो मैं तुझ ऐसे ख़रीदार की क़िस्मत में नहीं इतना कहना है मुझे प्यार बहुत है तुम से और ये भी कि ये कहना मेरी …

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सदैव की कविताएँ

आज प्रस्तुत हैं सदैव की कविताएँ – संपादक ======================================================== हम इस पेड़ को याद रखेंगे ———– तंग पगडंडियों से बियाबान जंगलों के बीच होकर दलदली जमीन में कमर तक धंसा घुप अंधेरे या भरी दोपहर खाली सवेरों-शामों से जब मैं चलता जाता था निर्जन पठारों पर कभी कभी बर्फीली हवाओं …

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किसी को चाहते जाना क्या इंक़लाब नहीं?

आज पेश है ज़ीस्त की एक नज़्म, जिसका उनवान है ‘इंक़लाब’ – संपादक ======================================================= मुझसे इस वास्ते ख़फ़ा हैं हमसुख़न मेरे मैंने क्यों अपने क़लम से न लहू बरसाया मैंने क्यों नाज़ुक-ओ-नर्म-ओ-गुदाज़ गीत लिखे क्यों नहीं एक भी शोला कहीं पे भड़काया मैंने क्यों ये कहा कि अम्न भी हो सकता …

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युवा शायर #17 सग़ीर आलम की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है सग़ीर आलम की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ====================================================== ग़ज़ल-1 कैसे कैसे मंज़र मेरी आँखों में आ जाते हैं, यादों के सब खंजर मेरी आँखों में आ जाते हैं। मेरी प्यासी आंखें फिर भी रह जाती हैं प्यासी ही, यूँ तो सात समंदर मेरी आँखों …

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भोगे हुए यथार्थ द्वारा सम्बन्धो से मोहभंग

हिंदी में छठे दशक के बाद लिखी गई कहानियों को केंद्र में रखकर, विजय मोहन सिंह और मधुकर सिंह द्वारा सम्पादित एक समीक्षात्मक किताब आई है. अब उस समीक्षात्मक किताब की समीक्षा कर रहे हैं माधव राठौर. आप भी पढ़िए- संपादक =======================================================   “60 के बाद की कहानियां” किताब विजय …

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युवा शायर #16 अक्स समस्तीपुरी की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है अक्स समस्तीपुरी की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ====================================================== ग़ज़ल-1 जुदाई में तेरी आंखों को झील करते हुए सबूत ज़ाया किया है दलील करते हुए मैं अपने आप से खुश भी नहीं हूँ जाने क्यों सो खुश हूँ अपने ही रस्ते तवील करते हुए न जाने …

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जंग की दास्तां बन गई मोहब्बत की ग़ज़ल

पिछले 2-3 बरसों में एक ग़ज़ल बहुत सुनाई पड़ी। ‘वो हम-सफ़र था मगर उस से हम-नवाई न थी’ …लेकिन कम लोगों को मालूम है कि मोहब्बत भरी ये ग़ज़ल, दरअसल सन्1971 में हुए इंडो-पाक जंग के बाद लिखी गई थी। बाद में जब पाकिस्तानी टीवी सीरियल ‘हमसफ़र’ के टायटल सॉन्ग …

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रविदत्त मोहता की कविताएँ

आज प्रस्तुत हैं रविदत्त मोहता की कविताएँ – संपादक ========================================================= यादें कभी अस्त नहीं होती मैं यादों के आसमान का पक्षी हूँ सदियां हो गयीं मैं सो नहीं पाया यादों के आसमानों का सूर्यास्त हो नहीं पाया कोई कहता है मैं किताब हूं कोई कहता हिसाब हूं पर मैं तो …

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सच, प्यार और थोड़ी-सी शरारत

खुशवंत सिंह की आत्मकथा ‘सच, प्यार और थोड़ी-सी शरारत’ पर युवा लेखक माधव राठौड़ की टिप्पणी – संपादक =================================================== अंग्रेजी के प्रसिद्ध पत्रकार, स्तम्भकार और विवादित कथाकार खुशवंत सिंह की आत्मकथा अपनी शैली में लिखा गया अपने समय का वह  कच्चा चिटठा है, जिसका दायरा रेगिस्तानी गाँव की गर्मी भरे …

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युवा शायर #15 स्वप्निल तिवारी की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है स्वप्निल तिवारी की ग़ज़लें – त्रिपुरारि  ====================================================== ग़ज़ल-1 मेरे चारों सिम्त पहले जमअ तन्हाई हुई दिल-कचहरी में मिरी तब जा के सुनवाई हुई रेत पर लेटी हुई थी शाम लड़की सी किसी धूप से साहिल पे पूरे दिन की सँवलाई हुई धीरे धीरे …

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