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युवा शायर #14 सौरभ शेखर की ग़ज़लें

आज युवा शायर सीरीज में पेश है सौरभ शेखर की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ====================================================== ग़ज़ल-1 भई देखो इस बात में कोई दो मत नईं प्यार छुपाया जा सकता है, नफ़रत नईं सच सुनने की हरगिज़ उसकी हसरत नईं और तकल्लुफ़ करना अपनी आदत नईं यार कमाया है हमको तो ख़र्च करो …

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विवाह का बदलता स्वरूप : साहित्य समाज और कानून

विवाह संस्था को लेकर विभिन्न लोगों का विभिन्न मत हो सकता है, होना भी चाहिए। समकालीन विवाह के बदलते स्वरूप पर माधव राठौड़ का लेख – संपादक ========================================================== अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हमेशा महिलाओं के इतिहास और वर्तमान  स्थिति पर ही चर्चा  होती है। उनके अधिकारों,मांगों और कानूनों पर ही चर्चा …

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युवा शायर #13 अभिषेक शुक्ला की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है अभिषेक शुक्ला की ग़ज़लें – त्रिपुरारि  ====================================================== ग़ज़ल-1 हर्फ़ लफ़्ज़ों की तरफ़ लफ़्ज़ म’आनी की तरफ़ लौट आए सभी किरदार कहानी की तरफ़ होश खो बैठा था मैं ज़र्दी-ए-जाँ से और फिर इक हवा आई उड़ा ले गई पानी की तरफ़ पहले मिसरे …

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मैं भूखा हूँ, रोज़ादार नहीं हूँ

रमज़ान का महीना शुरू हो गया है। मुझे याद आता है रहमान अब्बास का उर्दू नॉवेल (ख़ुदा के साए में आँख मिचोली), जिसमें एक किरदार कहता है- “मैं भूखा हूँ रोज़ादार नहीं हूँ।” बता दूँ कि 2011 में छपे, रहमान के इसी नॉवेल पर महाराष्ट्र साहित्य अकादमी का बेस्ट नॉवेल …

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युवा शायर #12 अब्बास क़मर की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है अब्बास क़मर की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ==================================================== ग़ज़ल-1 मेरी परछाइयां गुम हैं मेरी पहचान बाक़ी है सफ़र दम तोड़ने को है मगर सामान बाक़ी है अभी तो ख़्वाहिशों के दरमियां घमसान बाक़ी है अभी इस जिस्मे-फ़ानी में ज़रा सी जान बाक़ी है इसे …

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अभिषेक कुमार पाण्डेय की कहानी अनुबंधित जीवन

अभिषेक कुमार पाण्डेय युवा कथाकार हैं। अभी जो कहानी आप पढ़ने जा रहे हैं, उसे ग्रामीण परिवेश और वहाँ के जनजीवन को आधार बना कर लिखी गई है। स्वाभावत: ग्रामीण शब्दावली भी प्रयोग हुआ है, जिससे कहानी का लुत्फ़ दोबाला हो जाता है। – संपादक ======================================================== सुलक्षिणी ने दुआर बुहारने …

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रोहज़िन : मुंबई और यथार्थ की कहानी

हाल में मैंने उर्दू के लेखक रहमान अब्बास के लेटेस्ट नॉवेल ‘रोहज़िन’ पर लिखा था। जिसे यहाँ पढ़ा जा सकता है। आज ललिता दासगुप्ता (जो डिफ़ेंस रिसर्च एंड डेवलेपमेंट ऑरगेनाइजेशन, दिल्ली में सांइटिस्ट हैं) ने एक टिप्पणी लिख भेजी है। आप भी पढ़िए – त्रिपुरारि ======================================================= रोहज़िन उर्दू लेखक रहमान अबबास का एक ऐसा …

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युवा शायर #11 विजय शर्मा की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है विजय शर्मा की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ==================================================== ग़ज़ल-1 यमन की धुन पे ये किसका बदन बहलता है हर एक शाम ये साहिल पे कौन चलता है किसी के होंठ की गर्मी जबीं को मिलते ही बदन का ग्लेशियर आँखों से बह निकलता है …

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युवा शायर #10 प्रखर मालवीय ‘कान्हा’ की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है प्रखर मालवीय ‘कान्हा’ की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ==================================================== ग़ज़ल-1 आग है ख़ूब थोड़ा पानी है ये यहाँ रोज़ की कहानी है ख़ुद से करना है क़त्ल ख़ुद को ही और ख़ुद लाश भी उठानी है पी गए रेत तिश्नगी में लोग शोर उट्ठा …

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अनुशक्ति सिंह की (अ)कविताएँ

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में हम हज़ारों तरह की परिस्थितियों से गुज़रते हैं। लेकिन एक वक़्त आता है, जब यह ‘गुज़रना’ हमारा अनुभव बन जाता है। उन अनुभवों को लिखना उतना ही मुश्किल है, जितना एक रूह को पैकर देना। अनुशक्ति की कविताएँ ज़िंदगी के नए ‘डायमेंशन’ की तरफ़ इशारा करती …

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