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TRIPURARI

धड़का था दिल कि प्यार का मौसम गुज़र गया

नश्तर ख़ानक़ाही एक बेचैन रूह का नाम है। जिसने अपनी शायरी से न सिर्फ़ उर्दू अदब की ख़िदमत की, बल्कि कई आवाज़ों को रोशनी भी बख़्शी। उसकी ग़ज़ल हम आज भी सुनते हैं, गुनगुनाते हैं। आज अचानक एक ग़ज़ल सुनी तो सोचा क्यूँ न कुछ और ग़ज़लें पढ़ी जाए और …

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जिस रोज़ बग़ावत कर देंगे, दुनिया में क़यामत कर देंगे

मज़दूर दिवस पर पेश हैं कुछ नज़्में – संंपादक ======================================================== मज़दूरों का गीत – असरार-उल-हक़ मजाज़  मेहनत से ये माना चूर हैं हम आराम से कोसों दूर हैं हम पर लड़ने पर मजबूर हैं हम मज़दूर हैं हम मज़दूर हैं हम गो आफ़त ओ ग़म के मारे हैं हम ख़ाक नहीं …

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युवा शायर #9 विकास शर्मा ‘राज़’ की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है विकास शर्मा ‘राज़’ की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ==================================================== ग़ज़ल-1 चल रहे थे नज़र जमाये हम मुड़ के देखा तो लड़खड़ाये हम खोलता ही नहीं कोई हमको रह न जाएँ बँधे-बँधाये हम प्यास की दौड़ में रहे अव्वल छू के दरिया को लौट आये …

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महिलाएं और पॉर्न बनाम ज़बरदस्ती की शर्म

कुछ टॉपिक्स ऐसे होते हैं, जिन पर बहस कभी ख़त्म नहीं होती। जैसे कि भाषा, फ़ेमिनिज़्म, पॉर्न, फ़्रीडम, नेशन, वग़ैरह। ज़ाहिर है हर लिखने वाले का अपना नज़रिया होता है। जिसकी सोच जितनी गहरी होती है, वो उतने खुले दिमाग़ से चीज़ों को सोचता है। हाल में इंटरनेट पर महिलाओं …

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युवा शायर #8 मुदिता रस्तोगी की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है मुदिता रस्तोगी की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ग़ज़ल-1 सुनो एक बात थी जो तुमसे कहनी थी…चलो छोड़ो है छोटी उम्र और है दास्ताँ लम्बी, चलो छोड़ो उठा कर, खेल कर, दिल तोड़ कर देखे कई उसने पता की क़ीमतें सबकी के फिर बोली, चलो …

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युवा शायर #7 अज़ीज़ नबील की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है अज़ीज़ नबील की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ग़ज़ल-1 ख़ामुशी टूटेगी, आवाज़ का पत्थर भी तो हो जिस क़दर शोर है अन्दर, कभी बाहर भी तो हो मुस्कुराना किसे अच्छा नहीं लगता या-रब मुस्कुराने का कोई लम्हा मयस्सर भी तो हो बुझ चुके रास्ते, सन्नाटा …

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रमा भारती की कविताएँ

  हिंदी में किसी भी विषय पर कविता-सीरीज लिखने की परम्परा रही है। ‘चिनार’ रमा भारती के कविता संग्रह का नाम है। आइए आज इसी सीरीज की कुछ कविताएँ पढ़ते हैं। चिनार बहाने ज़िंदगी के कई पहलुओं पर बात करती हैं ये कविताएँ अपने में एक विशेष अर्थ रखती हैं …

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मुक्ति-भवन – मोक्ष का वेटिंग रूम

कुछ फ़िल्में ऐसी होती है जो लीक से हटकर होती हैं। जिसे कुछ ख़ास तरह के लोग पसंद करते हैं। ऐसी ही फ़िल्म है मुक्ति भवन। फ़िल्म के बारे में युवा लेखक नागेश्वर पांचाल ने लिखा है। आप भी पढ़िए – सम्पादक ======================================================== गुस्ताव फ्लौबेर्ट कहते है “देयर इज नो …

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युवा शायर #6 विपुल कुमार की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है विपुल कुमार की ग़ज़लें – त्रिपुरारि  ================================================== ग़ज़ल–1 जल्द आएँ जिन्हें सीने से लगाना है मुझे फिर बदन और कहीं काम में लाना है मुझे इश्क़ पाँव से लिपटता है तो रुक जाता हूँ वर्ना तुम हो तो तुम्हें छोड़ के जाना है …

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माइक इवरेट्ट की कविताएँ

माइक इवरेट्ट अमेरिकी आंचलिक उपन्यासकार हैं। लेख, कविता और कहानी भी लिखती हैं। माइक का एक परिचय यह भी है कि इनके लिखे एक कथन (जो कि एक लेख का हिस्सा है) को इंटरनेट पर दस लाख से ज़्यादा दफ़े कोट किया जा चुका है। वो कथन है, “When a writer falls …

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