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TRIPURARI

जब सौ मासूम मरते होंगे, तब एक कवि पैदा होता होगा

हाल में ‘संवदिया’ पत्रिका का युवा हिंदी कविता अंक (अतिथि संपादक : देवेंद्र कुमार देवेश) आया है। पत्रिका में 92 युवा कवियों की कविताओं के साथ-साथ “वर्तमान समय में हिंदी कविता के समक्ष चुनौतियाँ” विषय पर कई वरिष्ठ कवियों के विचार भी प्रस्तुत किए गए हैं। आप भी पढ़िए : …

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जब एक क़ज़ा से गुज़रो तो इक और क़ज़ा मिल जाती है

उम्र से लम्बी सड़कों पर ‘गुलज़ार’ 19 जनवरी की शाम गुलज़ार रही, गुलज़ार के नाम रही। मौक़ा था कवि-चिकित्सक विनोद खेतान लिखित पुस्तक “उम्र से लम्बी सड़कों पर गुलज़ार” के लोकार्पण का। ‘वाणी’ से प्रकाशित इस पुस्तक में लेखक ने बड़े आत्मीय ढंग से गुलज़ार के फ़िल्मी गीतों की परतों …

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महुआ मांझी के बहाने इंडिया टीवी के वंशज पर एक नज़र

विनीत कुमार युवा लेखक विनीत कुमार का यह लेख वर्चुअल स्पेस पर मौजूद हिंदी के उन लेखकों की ‘सर्जरी’ है, जो तुरत-फुरत समाधान में विश्वास रखते हैं और वह भी बिन किसी तैयारी के। ‘मांझी-गोस्वामी प्रकरण’ के बहाने विनीत ने उन मठाधीशों की भी ख़बर ली है, जो “मर्द लेखक-संपादक” …

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‘तुगलक’ से रंगमंच को क्या मिला?

भानु भारती के निर्देशन में गिरीश कर्नाड के नाटक ‘तुगलक’ का भव्य मंचन दिल्ली के फिरोजशाह कोटला के खंडहरों में हुआ. इस नाटक की प्रस्तुति को लेकर बहुत अच्छी समीक्षा लिखी है अमितेश कुमार ने- जानकी पुल. ================================ “निर्देशक का यह मूलभूत कर्तव्य है कि वह नाटक के अर्थ को …

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ओमा शर्मा की पुरस्कृत कहानी ‘दुश्मन मेमना’

ओमा शर्मा हमारे दौर के प्रमुख कथाकार हैं. उनको ‘रमाकांत स्मृति कथा-सम्मान’ दिए जाने की घोषणा हुई है. प्रस्तुत है उनकी पुरस्कृत कहानी : जानकी पुल ====================================================================== वह पूरेइत्मीनानसेसोयीपड़ीहै।बगलमेंदबोचेसॉफ्टतकिएपरसिरबेढंगापड़ाहै।आसमानकीतरफकिएअधखुलेमुंहसेआगेवालेदांतोंकीकतारझलकरहीहैं।होंठ कुछ पपडा़ से गए हैं,सांस का कोई पता ठिकाना नहीं है। शरीर किसी  खरगोशकेबच्चेकीतरहमासूमियतसेनिर्जीवपड़ाहै।मुड़ी–तुडी़  चादरकादोतिहाईहिस्साबिस्तरसेनीचेलटकापड़ाहै।सुबहकेसाढ़ेग्यारहबजरहेहैं।हरछुट्टीकेदिनकीतरहवहयूंसोयीपड़ीहैजैसेउठनाहीनहो।एक–दो बार मैंने दुलार से उसे ठेला …

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‘रेणु’ हिन्दी साहित्य के संंत लेखक थे – निर्मल वर्मा

इस बात में कोई दो राय नहीं कि फणीश्वरनाथ रेणु हिंदी साहित्य के संत लेखक थे। लेकिन जब यही बात निर्मल वर्मा जैसे लेखक की क़लम कहती है तो बात में वजन आ जाता है। निर्मल वर्मा लिखते हैं– “रेणु जी पहले कथाकार थे जिन्होंने भारतीय उपन्यास की जातीय सम्भावनाओं …

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