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कथा-कहानी

चीनी लेखक लाओ मा की कहानी ‘मरीज को देखने जाना’

हाल में मैंने जिन किताबों के अनुवाद किये हैं उनमें चीनी लेखक लाओ मा की कहानियों का संग्रह ‘भीड़ में तन्हा’ बहुत अलग है. चीन की राजनीति, समाज पर लगातार एक व्यंग्यात्मक शैली में उन्होंने कहानियां लिखी हैं. बानगी के तौर पर एक कहानी देखिये. यह किताब ‘रॉयल कॉलिन्स पब्लिकेशन’ …

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प्रियंका ओम की कहानी ‘वह फूहड़ स्त्री’

आज प्रियंका ओम की कहानी ‘वह फूहड़ स्त्री’ पढ़िए. नए साल की शुरुआत समकालीन रचनाशीलता से करते हैं- मॉडरेटर ===================== उस स्त्री के पहनावे का रंग संयोजन था मुझे विस्मय से भर देता ! पीले रंग की ब्लाउज़ पर एड़ी से चार अंगुल ऊँची ब्लू छींट की साड़ी, और साड़ी …

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तसनीम खान की कहानी ‘मेरे हिस्से की चांदनी’

समकालीन युवा लेखन में तसनीम खान का नाम जाना-पहचाना है. उनकी नई कहानी पढ़िए- मॉडरेटर ============ आंगन में फैली रातरानी के महकने का वक्त हो चला। वो इस कदर महक रही थी कि पूरा घर इस खूशबू से तर हो गया। हवा के झोंकों के साथ इसकी खुशबू कमरों की …

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मनोज कुमार पांडेय की कहानी ‘पापियों के उद्धार की अनोखी योजना’

मनोज कुमार पांडेय मेरी पीढ़ी के उन कथाकारों में हैं जो न सिर्फ निरंतर लिख रहे हैं बल्कि नए-नए कथा-प्रयोग भी कर रहे हैं. यह उनकी नई कहानी है जो लक्षणा और व्यंजना में पढ़े जाने की मांग करती है- प्रभात रंजन ================ स्वर्णदेश का राजा उन लोगों के लिए …

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चारुमति रामदास अनूदित अलेक्सांद्र कूप्रिन के उपन्यास ‘द डुअल’ का एक हिस्सा

अलेक्सांद्र कूप्रिन (1870-1938) एक प्रसिद्ध रूसी लेखक थे. यहाँ दिया गया हिस्सा कूप्रिन के सबसे प्रसिद्ध उपन्यास द डुअल से लिया गया है। इस हिस्से को पढ़ते हुए आपको अहसास होगा कि टाल्सटाय ने क्यों कूप्रिन को चेखब का सही उत्तराधिकारी कहा था। चारुमति रामदास के द्वारा इस तर्जुमा को …

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सुशील कुमार भारद्वाज की कहानी “जाति बदल लीजिए”

सुशील कुमार भारद्वाज ने बहुत कम समय में पटना के साहित्यिक परिदृश्य पर अपनी उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज की है. पेशे से अध्यापक हैं और उनकी कहानियों में बिहार के सामाजिक जीवन के ‘स्लाइसेज‘ होते हैं. उनको पढ़ते हुए बिहार का समकालीन समाज समझ में आता है. जानकीपुल पर आज है …

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वंदना राग की कहानी ‘अम्मा की डायरी’

आज मदर्स डे है. समकालीन दौर की सबसे संवेदनशील कथाकार वंदना राग की यह कहानी पढ़िए. पढ़ते पढ़ते मुझे अपनी माँ से मिलने का मन हो गया.  मन पर गहरी छाप छोड़ने वाली कहानी- मॉडरेटर ==============================================                     मेरी अम्मा को लिखना नहीं …

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स्त्री विमर्श की नई बयानी की कहानी ‘लेडिज सर्किल’

हिंदी के स्त्रीवादी लेखन से एक पाठक के रूप में मेरी एक शिकायत है कि अब यह बहुत प्रेडिक्टेबल हो गई हैं. लिफाफा देखते ही मजमून समझ में आने लगता है. ऐसे में गीताश्री की कहानी ‘लेडिज सर्किल’ चौंकाती है. शुरू में मुझे लगा था कि इसमें भी वही शोषण, …

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अनुकृति उपाध्याय की कहानी ‘जानकी और चमगादड़’

अनुकृति उपाध्याय एक प्रतिष्ठित वित्त संस्थान में काम करती हैं. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखती हैं.  यह कहानी बड़ी संवेदनशील लगी. बेहद अच्छी और अलग तरह के विषय पर लिखी गई. आप भी पढ़कर राय दीजियेगा- मॉडरेटर ========================================== पीपल का वह वृक्ष उस रिहायशी इमारत के विस्तृत प्रांगण …

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सूरज बड़त्या की कहानी ‘कबीरन’

हाल के वर्षों में दलित साहित्य में सूरज बड़त्या ने अच्छी पहचान बनाई है. आज उनकी एक कहानी आपके लिए- मॉडरेटर ======================================================= अक्सर वह सुमेघ को ट्रेन में दिखायी दे जाती थी। कभी अपने ग्रुप में तो कभी अकेली। सुमेघ उसे देख अपने पास बुला लेता या वह खुद ही चली …

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