Home / कथा-कहानी (page 8)

कथा-कहानी

शर्मिला बोहरा जालान की कहानी ‘एक अलग उजास में’

शर्मिला बोहरा जालान नए दौर की लेखिका हैं लेकिन पुराने शिल्प में सिद्धहस्त हैं. उनकी यह कहानी कैंसर से मरती एक माँ की कहानी है जिसमें संवेदना का उजास है, राग से मुक्त होते विराग की कथा है. कहानी कुछ लाबी है लेकिन अपने साथ बांधे लिए चली जाती है. …

Read More »

मृणाल पाण्डे का अथ वणिक रत्नसेन प्रबंध-4

यह जानकी पुल के लिए गौरव की बात है कि प्रसिद्ध लेखिका मृणाल पाण्डे एक कथा-श्रृंखला लिख रही हैं जो सबसे पहले जानकी पुल के पाठकों के लिए सामने आ रहा है. प्राचीन कथाओं के शिल्प में आधुनिक जीवन की गुत्थियाँ बहुत रोचक अंदाज़ में प्रस्तुत कर रही हैं. आज …

Read More »

‘एक गधे की आत्मकथा’ के चुनिन्दा अंश

1950 के दशक के आखिरी वर्षों में उर्दू के मशहूर लेखक कृशन चंदर का उपन्यास आया था ‘एक गधे की आत्मकथा’. भारतीय लोकतंत्र पर बहुत बड़ा व्यंग्य था. उपन्यस में गधा प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु से भी मिलता है. कृशन चंदर ने अपनी आत्मकथा ‘आधे सफ़र की पूरी कहानी’ में लिखा …

Read More »

मृणाल पांडे के किस्से: अथ एक कौड़ी के तोते का प्रबंध- 3

प्रसिद्ध लेखिका मृणाल पाण्डे अपने लेखन में नए नए प्रयोगों के लिए जानी जाती हैं. इस बार वह किस्सागोई की पारंपरिक शैली में किस्सों की एक श्रृंखला लिख रही हैं. जिनको पढ़ते हुए समकालीन सन्दर्भ याद आने लगते हैं. आज उनके किस्सों की श्रृंखला की तीसरी कड़ी प्रस्तुत है. हमें …

Read More »

मैं वेद प्रकाश शर्मा बनना चाहता था!

साल 1994 का था। इम्तियाज़ को मुम्बई गए एक साल हो गया था। एक दिन महाशय(राकेश रंजन कुमार) मेरे पास आया और बोला मैं मुम्बई जा रहा हूँ। वह चला गया। मैं अकेला रह गया। बीच बीच में कभी वह किसी धारावाहिक में दिख जाता था, कभी यह पता चलता …

Read More »

मृणाल पांडे का अथ पुरातन प्रबंध नव्य संस्करण -2

प्रसिद्ध लेखिका मृणाल पांडे इन दिनों किस्सों की पुरानी लुप्त हुई परम्परा के सूत्रों को जोड़ रही हैं. यह दूसरी कड़ी है. पहली कड़ी में हम हिमुली की कथा पढ़ चुके हैं. इस बार हिमुली की कथा आगे बढ़ी है और उसमें हर कथा की तरह अनेक नए पात्र जुड़ …

Read More »

श्री श्री की कहानी ‘अदू-धूं-ना’

  उनका नाम पूनम अरोड़ा है. श्री श्री के नाम से कहानियां-कविताएँ लिखती हैं. कहानियों में परिवेश किस तरह का प्रभाव पैदा कर सकता है इसके लिए इस कहानी को पढ़ा जा सकता है- मॉडरेटर =================================== काईयू ने जल्दी से किताब का पन्ना पलट दिया. इस बार ख़्याल ज़्यादा लंबा …

Read More »

मृणाल पांडे की अपूर्ण वृहतकथा का पूर्ण अंश

मृणाल पांडे का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. वह एक बड़ी कुशल गद्यकार भी हैं. हाल में ही संगीत की एक किताब लिखने के बाद मृणाल जी अपने गल्प-अवतार में अवतरित हुई हैं. बरसों पहले ‘पटरंगपुर पुराण’ जैसा उपन्यास लिखने वाली मृणाल जी इस बार अपने ‘देस’ की …

Read More »

नॉर्वे में हूँ, निर्मल वर्मा की ‘परिंदे’ याद आ रही है!

नॉर्वे प्रवासी डॉक्टर-लेखक प्रवीण कुमार झा के व्यंग्य हम पढ़ते रहे हैं लेकिन यह व्यंग्य नहीं है. 25 अक्टूबर को निर्मल वर्मा की पुण्यतिथि है, उसी अवसर पर उन्होंने एक निर्मल-कथा लिखी है. पढ़ा जाए- मॉडरेटर  ===========   हिंदी कथाकारों में जो पहाड़ों में जीए, यूरोप वगैरा घूमे, उनमें और जो …

Read More »

मेरी नई कहानी ‘यार को मैंने जाबजा देखा…’

आज अपनी ही नई कहानी प्रस्तुत कर रहा हूँ जो एक कथा श्रृंखला का हिस्सा है- प्रभात रंजन  ===============================================================   यार को मैंने जाबजा देखा प्रभात रंजनउसकी बायीं आँख के ठीक नीचे कटे का निशान था. बड़ा-सा. चेहरे में सबसे पहले वही दिखाई देता था. ‘तीन टाँके लगे थे’, उसने बताया था. देखने में दो …

Read More »