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कविताएं

हरे प्रकाश उपाध्याय की लम्बी कविता ‘खंडहर’

बड़ा जटिल समय है. समाज उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है. एक बड़ा परिवर्तन घटित हो रहा है. हरेप्रकाश उपाध्याय की कविता ‘खंडहर’ उसी को समझने की एक जटिल कोशिश की तरह है- मॉडरेटर ========================================= खंडहर भयानक परिदृश्य है डरा रहा है कहीं कोई विलाप…. कोई चिल्ला रहा है …

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हम से नज़र मिलाइए होली का रोज़ है / तीर-ए-नज़र चलाइए होली का रोज़ है

जो लोग उर्दू-हिंदी लिटरेचर से तआल्लुक़ रखते हैं, उनके ज़ेहन में होली के ख़याल के साथ नज़ीर अकबराबादी की नज़्म ‘होली की बहारें’ ज़रूर आती होगी। मन गुनगुनाने लगता होगा, ‘जब फागुन रंग झमकते हों, तब देख बहारें होली की’। ये बहुत मशहूर नज़्म है। लेकिन इसके अलावे भी उर्दू …

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फणीश्वरनाथ रेणु की कविता ‘साजन! होली आई है!’

यूपी चुनाव में जनता ने ऐसी होली खेली है कि किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा है. होली के इस माहौल में फणीश्वरनाथ रेणु की यह कविता याद आ गई- =============== साजन! होली आई है! सुख से हँसना जी भर गाना मस्ती से मन को बहलाना पर्व हो …

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फागुन में यतीन्द्र मिश्र की कविता ‘फाग बंधाओ’

यतीन्द्र मिश्र इन दिनों ‘लता सुरगाथा’ पुस्तक लिखने के बाद अपने लेखन का बसंत जी रहे हैं. लेकिन वे मूलतः कवि हैं. आज फागुन के इस मौसम में मुझे उनकी कविता ‘फाग बंधाओ’ की याद आई. आज के सन्दर्भ में बहुत माकूल कविता-  कविता का प्रसंग यह है कि हज़रत …

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मार्केज़ की बताई जाने वाली कविता ‘द पपेट’ हिंदी में

साहित्य के नजरिये को बदल कर रख देने वाले लेखक गैब्रिएल गार्सिया मार्केज़ का आज जन्मदिन है. उनके असाधारण गद्य लेखन से हम सब अच्छी तरह से परिचित हैं. लेकिन उन्होंने कविता भी लिखी थी यह कम लोगों को पता होगा. वैसे यह कविता उनकी है या नहीं इसको लेकर …

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राकेश रंजन की कविता ‘बनारस में’

इस साल अन्तरराष्ट्रीय पुस्तक मेले दिल्ली में राधाकृष्ण प्रकाशन से राकेश रंजन का का कविता संग्रह आया ‘दिव्य कैदखाने में’. कई अच्छी अच्छी कविताएँ हैं इसमें लेकिन आज इस कविता ने ध्यान खींचा. साथ में एक और छोटी सी कविता- मॉडरेटर ========== बनारस में स से सांड, साड़ी, सुरसरि, सीढ़ी, …

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फ़िल्म डायरेक्टर विशाल भारद्वाज की कविता

विशाल भारद्वाज निर्देशित फ़िल्म ‘रंगून’ हाल में रिलीज़ हुई और बहुत चर्चा में है। जानकीपुल पर भी कई रिव्यू पढ़ा जा चुका है। लेकिन कम लोग जानते हैं कि विशाल कविताएँ भी लिखते हैं। जल्द ही उनकी कविताओं का संग्रह हमारे बीच होगा। फ़िलहाल पढ़ते हैं विशाल भारद्वाज की कविता, …

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शम्भुनाथ सिंह का गीत ‘मुझको क्या क्या नहीं मिला’

नई कविता की तर्ज़ पर नवगीत आन्दोलन चला था. जिसके सूत्रधार थे शम्भुनाथ सिंह. इन्होने तीन खण्डों में नवगीत दशक का संपादन किया था. आज की पीढ़ी नहीं जानती लेकिन शम्भुनाथ सिंह ने हिंदी में गीतों को रुमान से मुक्त करके एक नया रंग दिया था. उनका ही एक गीत- …

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ओम प्रकाश आदित्य की कविता ‘इधर भी गधे हैं’

यूपी चुनाव और गधा विमर्श में ओम प्रकाश आदित्य की यह कविता भी पढियेगा- मॉडरेटर ============================================= इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं जिधर देखता हूं, गधे ही गधे हैं गधे हँस रहे, आदमी रो रहा है हिन्दोस्तां में ये क्या हो रहा है जवानी का आलम गधों के …

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प्रियंका वाघेला की कुछ कविताएँ

मेरे जीमेल अकाउंट में अनजान पतों से आई रचनाओं में छत्तीसगढ़ की प्रियंका वाघेला की कविताओं पर नजर गई. प्रियंका वाघेला, चित्रकार व लेखिका हैं. ‘शैडो ऑफ़ थॉट्स’, ‘प्रिजनर्स ऑफ मून’ व ‘स्नेह संपदा’ इत्यादि फिल्मों के लिये पटकथा लिखी हैं। देश विदेश की विभिन्न कलादीर्घाओं में चित्रों का प्रदर्शन तथा कुछ …

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