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कविताएं

केदारनाथ सिंह की कविता ‘दुपहरिया’

आज सुबह चढ़ते चैत के महीने पर वरिष्ठ लेखक राकेश कुमार सिंह की पोस्ट लगाईं थी. लेकिन चैत के महीने में केदारनाथ सिंह के इस कविता के बिना कैसी बात बनेगी- मॉडरेटर ========================= झरने लगे नीम के पत्ते बढ़ने लगी उदासी मन की, उड़ने लगी बुझे खेतों से झुर-झुर सरसों …

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मंजरी श्रीवास्तव की कविता ‘सुनो मीर साहब’

मंजरी श्रीवास्तव कम कविताएँ लिखती हैं लेकिन जब लिखती हैं तो बार बार पढने को जी चाहता है. यह एक कविता श्रृंखला है जो मीर तकी मीर को, उनकी पंक्तियों को याद करते हुए लिखी गई है. बहुत प्रासंगिक, तड़प से भरी कविताएँ. पढ़िए आप भी- मॉडरेटर ================== सुनो मीर …

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स्मिता पारिख की कुछ नज्में, कुछ कविताएँ

आकाशवाणी में उद्घोषिका , अभिनेत्री, और ई-बिज़ एंटरटेनमेंट की मुख्य प्रबंधक स्मिता पारिख ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा मध्य-प्रदेश के इंदौर शहर में की, कॉमर्स में स्नातकोत्तर की डिग्री राजस्थान के उदयपुर शहर में हासिल की. बचपन से ही कविताएँ और कहानियाँ लिखने की शौक़ीन स्मिता को कक्षा ११ वी में …

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हृदय दुनिया की सबसे कठोर वस्तु भी हो सकता है

यूँ तो हिंदी में ‘बनारस’ पर कई कविताएँ लिखी जा चुकी हैं। फिर भी, हर नया कवि उस शहर की ओर आकर्षित होता है। हर एक आँख उस शहर को अपनी नज़र से देखती है। हर एक दिल उस शहर को अलग तरह से महसूस करता है। अपना अनुभव बयान …

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कैनेडियन लेखिका मारग्रेट एटवुड की कुछ कविताएँ

मारग्रेट एटवुड को आम तौर पर ‘ब्लाइंड असैसिन्स’ उपन्यास के लिए जाना जाता है. जिसके ऊपर उनको बुकर पुरस्कार मिला था. उनके उपन्यासों को पांच बार बुकर पुरस्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किया जा चुका है. 77 साल की इस कैनेडियन लेखिका ने कविताएँ भी लिखी हैं. आज कुछ कविताएँ, जिनका …

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देवेश तनय की कविता ‘पेंटब्रश और सेब’

आज सुबह सुबह एक कविता देवेश तनय की. 22 साल के देवेश आईआईटी मुम्बई के छात्र हैं. लिखते हैं लेकिन यह कविता तो कमाल है. अपनी कल्पनाशीलता, अपने वर्णन में. पढ़कर बताइयेगा- मॉडरेटर ================================= पेंटब्रश और सेब   मेरे बचपन के दिनों में पेंट ब्रश मेरा सबसे अजीज़ दोस्त था सफ़ेद …

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रिम्पी खिल्लन की कविता ‘सदी के आर-पार’

रिम्पी खिल्लन पेशे से प्राध्यापिका हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित आई.पी. कॉलेज में पढ़ाती हैं. शुरुआत कहानी लेखन से की थी. लम्बे अंतराल के बाद पुनः साहित्य लेखन आरम्भ किया है. एक गहरे जीवन-दर्शन वाली उनकी कविताओं का मिजाज समकालीन कविता में जुदा है- मॉडरेटर ===================== सदी के आर पार  …

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हरे प्रकाश उपाध्याय की लम्बी कविता ‘खंडहर’

बड़ा जटिल समय है. समाज उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है. एक बड़ा परिवर्तन घटित हो रहा है. हरेप्रकाश उपाध्याय की कविता ‘खंडहर’ उसी को समझने की एक जटिल कोशिश की तरह है- मॉडरेटर ========================================= खंडहर भयानक परिदृश्य है डरा रहा है कहीं कोई विलाप…. कोई चिल्ला रहा है …

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हम से नज़र मिलाइए होली का रोज़ है / तीर-ए-नज़र चलाइए होली का रोज़ है

जो लोग उर्दू-हिंदी लिटरेचर से तआल्लुक़ रखते हैं, उनके ज़ेहन में होली के ख़याल के साथ नज़ीर अकबराबादी की नज़्म ‘होली की बहारें’ ज़रूर आती होगी। मन गुनगुनाने लगता होगा, ‘जब फागुन रंग झमकते हों, तब देख बहारें होली की’। ये बहुत मशहूर नज़्म है। लेकिन इसके अलावे भी उर्दू …

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फणीश्वरनाथ रेणु की कविता ‘साजन! होली आई है!’

यूपी चुनाव में जनता ने ऐसी होली खेली है कि किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा है. होली के इस माहौल में फणीश्वरनाथ रेणु की यह कविता याद आ गई- =============== साजन! होली आई है! सुख से हँसना जी भर गाना मस्ती से मन को बहलाना पर्व हो …

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