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कविताएं

कैनेडियन लेखिका मारग्रेट एटवुड की कुछ कविताएँ

मारग्रेट एटवुड को आम तौर पर ‘ब्लाइंड असैसिन्स’ उपन्यास के लिए जाना जाता है. जिसके ऊपर उनको बुकर पुरस्कार मिला था. उनके उपन्यासों को पांच बार बुकर पुरस्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किया जा चुका है. 77 साल की इस कैनेडियन लेखिका ने कविताएँ भी लिखी हैं. आज कुछ कविताएँ, जिनका …

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देवेश तनय की कविता ‘पेंटब्रश और सेब’

आज सुबह सुबह एक कविता देवेश तनय की. 22 साल के देवेश आईआईटी मुम्बई के छात्र हैं. लिखते हैं लेकिन यह कविता तो कमाल है. अपनी कल्पनाशीलता, अपने वर्णन में. पढ़कर बताइयेगा- मॉडरेटर ================================= पेंटब्रश और सेब   मेरे बचपन के दिनों में पेंट ब्रश मेरा सबसे अजीज़ दोस्त था सफ़ेद …

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रिम्पी खिल्लन की कविता ‘सदी के आर-पार’

रिम्पी खिल्लन पेशे से प्राध्यापिका हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित आई.पी. कॉलेज में पढ़ाती हैं. शुरुआत कहानी लेखन से की थी. लम्बे अंतराल के बाद पुनः साहित्य लेखन आरम्भ किया है. एक गहरे जीवन-दर्शन वाली उनकी कविताओं का मिजाज समकालीन कविता में जुदा है- मॉडरेटर ===================== सदी के आर पार  …

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हरे प्रकाश उपाध्याय की लम्बी कविता ‘खंडहर’

बड़ा जटिल समय है. समाज उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है. एक बड़ा परिवर्तन घटित हो रहा है. हरेप्रकाश उपाध्याय की कविता ‘खंडहर’ उसी को समझने की एक जटिल कोशिश की तरह है- मॉडरेटर ========================================= खंडहर भयानक परिदृश्य है डरा रहा है कहीं कोई विलाप…. कोई चिल्ला रहा है …

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हम से नज़र मिलाइए होली का रोज़ है / तीर-ए-नज़र चलाइए होली का रोज़ है

जो लोग उर्दू-हिंदी लिटरेचर से तआल्लुक़ रखते हैं, उनके ज़ेहन में होली के ख़याल के साथ नज़ीर अकबराबादी की नज़्म ‘होली की बहारें’ ज़रूर आती होगी। मन गुनगुनाने लगता होगा, ‘जब फागुन रंग झमकते हों, तब देख बहारें होली की’। ये बहुत मशहूर नज़्म है। लेकिन इसके अलावे भी उर्दू …

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फणीश्वरनाथ रेणु की कविता ‘साजन! होली आई है!’

यूपी चुनाव में जनता ने ऐसी होली खेली है कि किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा है. होली के इस माहौल में फणीश्वरनाथ रेणु की यह कविता याद आ गई- =============== साजन! होली आई है! सुख से हँसना जी भर गाना मस्ती से मन को बहलाना पर्व हो …

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फागुन में यतीन्द्र मिश्र की कविता ‘फाग बंधाओ’

यतीन्द्र मिश्र इन दिनों ‘लता सुरगाथा’ पुस्तक लिखने के बाद अपने लेखन का बसंत जी रहे हैं. लेकिन वे मूलतः कवि हैं. आज फागुन के इस मौसम में मुझे उनकी कविता ‘फाग बंधाओ’ की याद आई. आज के सन्दर्भ में बहुत माकूल कविता-  कविता का प्रसंग यह है कि हज़रत …

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मार्केज़ की बताई जाने वाली कविता ‘द पपेट’ हिंदी में

साहित्य के नजरिये को बदल कर रख देने वाले लेखक गैब्रिएल गार्सिया मार्केज़ का आज जन्मदिन है. उनके असाधारण गद्य लेखन से हम सब अच्छी तरह से परिचित हैं. लेकिन उन्होंने कविता भी लिखी थी यह कम लोगों को पता होगा. वैसे यह कविता उनकी है या नहीं इसको लेकर …

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राकेश रंजन की कविता ‘बनारस में’

इस साल अन्तरराष्ट्रीय पुस्तक मेले दिल्ली में राधाकृष्ण प्रकाशन से राकेश रंजन का का कविता संग्रह आया ‘दिव्य कैदखाने में’. कई अच्छी अच्छी कविताएँ हैं इसमें लेकिन आज इस कविता ने ध्यान खींचा. साथ में एक और छोटी सी कविता- मॉडरेटर ========== बनारस में स से सांड, साड़ी, सुरसरि, सीढ़ी, …

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फ़िल्म डायरेक्टर विशाल भारद्वाज की कविता

विशाल भारद्वाज निर्देशित फ़िल्म ‘रंगून’ हाल में रिलीज़ हुई और बहुत चर्चा में है। जानकीपुल पर भी कई रिव्यू पढ़ा जा चुका है। लेकिन कम लोग जानते हैं कि विशाल कविताएँ भी लिखते हैं। जल्द ही उनकी कविताओं का संग्रह हमारे बीच होगा। फ़िलहाल पढ़ते हैं विशाल भारद्वाज की कविता, …

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