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पुस्तक अंश

कृष्णा सोबती के उपन्यास ‘गुजरात पाकिस्तना से गुजरात हिन्दुस्तान’ से एक अंश

हिंदी की वरिष्ठ लेखिका कृष्णा सोबती का आत्मकथात्मक उपन्यास आया है ‘गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिन्दुस्तान’. पुस्तक का प्रकाशन राजकमल प्रकाशन से हुआ है. उसका एक अंश- मॉडरेटर =========================================== नए कमरे में उसने कई करवटें बदलीं। नई जगह का उनींदा। सिरोही राज के गैस्टहाउस में न घर अपना और न …

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महापंडित राहुल और वोल्गा की रात

आज महापंडित राहुल सांकृत्यायन की 54 वीं पुण्यतिथि है. हिंदी में उनके जितना विविध और विपुल लेखन शायद ही किसी और लेखक ने किया. वे महायात्री थे. उनके यात्राओं के वर्णन सम्मोहक होते थे. यह वोल्गा का वर्णन है- दिव्या विजय ================== निशा 1 देश – वोल्गा तट (ऊपरी) जाति …

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डॉ. अम्बेडकर की आत्मकथात्मक पुस्तक के अंश

‘वेटिंग फ़ॉर वीसा’ (पहला प्रकाशन वर्ष सन् 1990) स्वतंत्र भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर के कुछ आत्मकथात्मक नोट्स हैं, जो उन्होंने अपने योरोप-अमेरिका प्रवास से लौटने के अट्ठारह वर्ष बाद सन् 1935-36 के दौरान लिखे थे। बड़ौदा लौटने पर रहने की जगह तलाशने को लेकर जो मुश्किलात उन्होंने झेलीं, …

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रस्किन बांड और मसूरी के सेवॉय होटल के भूत

कल मैंने फेसबुक पर भूतों से अपने डर की बात लिखी थी. उसमें मैंने रस्किन बांड का जिक्र किया था. मसूरी में रहने वाले इस लेखक ने भूतों के अपनी मुलाकातों के बारे में खूब लिखा है. अभी हाल में ही उनकी एक किताब मिली हिंदी अनुवाद में ‘अजब गजब …

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गांधी जी की पोती की किताब में गाँधी जी का चंपारण सत्याग्रह

आज महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह के सौ साल पूरे हो रहे हैं. देश भर में इसको याद किया जा रहा है, इसके बारे में लिखा जा रहा है. गांधी जी की पोती सुमित्रा गांधी कुलकर्णी ने अपनी किताब ‘महात्मा गांधी मेरे पितामह’ में भी इस घटना पर विस्तार से …

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70 साल का हुआ बाबा नागार्जुन का उपन्यास ‘रतिनाथ की चाची’

इधर इस बात पर ध्यान गया कि बाबा नागार्जुन के उपन्यास ‘रतिनाथ की चाची’ के लेखन का यह 70 वां साल है. इस उपन्यास के तीसरे संस्करण की भूमिका में नागार्जुन ने स्वयं यह लिखा है कि इसका रचनाकाल 1947 था. मुझे आज भी यह बात समझ में नहीं आई …

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‘चंपारण प्रयोग’ और गाँधी का जादू कैसे चला

यह गांधी के चम्पारण सत्याग्रह की शताब्दी का साल है. इस मौके को ध्यान में रखते हुए प्रसिद्ध पत्रकार और मूलतः चंपारण के निवासी अरविंद मोहन ने एक किताब लिखी है ‘चंपारण प्रयोग’. पुस्तक उन्होंने महात्मा गांधी के कम्युनिकेटर रूप को ध्यान में रखते हुए काफी अलग तरह से लिखी …

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धर्मपाल की किताब ‘गौ-वध और अंग्रेज’ का एक अंश

गाय को लेकर इस गर्म माहौल में मुझे प्रसिद्ध गांधीवादी चिन्तक धर्मपाल की किताब ‘गौ वध और अंग्रेज’ की याद आई. जिसका प्रकाशन वाणी प्रकाशन द्वारा किया गया था. इस पुस्तक में धर्मपाल जी ने अंग्रेज सरकार के प्रामाणिक दस्तावेजों के आधार पर यह दिखाया था कि किस तरह भारत …

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मीना कुमारी के ‘आखिरी अढाई दिन’ की दास्तान

आज मीना कुमारी की बरसी है. मुझे याद आई मधुप शर्मा की किताब ‘आखिरी अढाई दिन’ की. मीना कुमारी के आखिरी दिनों को लेकर लिखे गए इस उपन्यास में आत्मकथा की शैली में मीना कुमारी अपनी कथा कहती हैं. कुछ कुछ रामकुमार वर्मा के एकांकी ‘औरंगजेब की आखिरी रात’ की …

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क्या ‘शतरंज के खिलाड़ी’ ने लखनऊ को बदनाम कर दिया?

प्रसिद्ध कवि-विचारक उदयन वाजपेयी के संपादन में निकलने वाली पत्रिका ‘समास’ में उर्दू के मशहूर लेखक शम्सुर्ररहमान फारुकी का इंटरव्यू आया है, जी उदयन जी ने खुद लिया है. उस इंटरव्यू से यह पता चलता है कि आजकल फारुकी साहब लखनऊ पर उपन्यास लिख रहे हैं. उस उपन्यास का एक …

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