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बातचीत

खरीद बिक्री के आंकड़े साहित्य के मूल्य तय नहीं करते- ऋषिकेश सुलभ

आज ऋषिकेश सुलभ का जन्मदिन है. वरिष्ठ पीढ़ी के सबसे सक्रिय लेखकों में एक सुलभ जी ने अपने नाटकों, अपनी कहानियों से एक बड़ा पाठक वर्ग बनाया है. सबसे बड़ी बात यह है कि बिहार के वे उन दुर्लभ लेखकों में हैं जिन्होंने समकालीन युवा लेखकों से निरंतर संवाद बनाया …

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प्रेमचंद को नहीं चेखव को पढ़कर कथाकार बना

स्वयंप्रकाश के बारे में कुछ लिखने की जरुरत नहीं उनकी कहानियां खुद उस माहिर लेखक का बयान हैं. अभी हाल में ही राजपाल एंड संस प्रकाशन से ‘मेरी प्रिय कहानियां’ सीरिज में उनकी किताब आई है. उसकी भूमिका में उन्होंने अपनी रचना-प्रक्रिया, अपनी रचनाओं, पसंदों-नापसंदों को लेकर खुल कर बात …

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ग़ैरपाठकों को भी पाठक बनाना मेरा उद्देश्य है- पंकज दुबे

‘बिहार-यूपी के किसी छोटे गाँव से सत्तू-अचार भरी पेटी लिए, अपने पिता से पाए गए आईएएस बनने के सपने के साथ अधिकतर लोग दिल्ली यूनिवर्सिटी पढ़ाई करने आते हैं। इनमें से बहुतों का एक निज़ी सपना होता है: एक दूधिया गोरी पंजाबी लड़की के साथ सोना।’ इसी प्लॉट पर लिखे …

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हिन्दी होमियोपैथी की तरह गरीब और बेसहारा लोगों के लिये है!

हम अक्सर बड़े लेखकों से बातचीत करते हैं, पढ़ते हैं. लेकिन आज हम प्रस्तुत कर रहे हैं बातचीत एक युवा लेखक प्रचंड प्रवीर से, जो भूतनाथ के नाम से भी लेखन करते रहे हैं. आईआईटी दिल्ली से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके जिसने लेखन को चुना, हिंदी में लेखन को. उसका …

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मेरे लेखन की प्रेरणा यश और अर्थ की आकांक्षा तो बिलकुल नहीं है:नंदकिशोर नवल

प्रसिद्ध आलोचक नंदकिशोर नवल जब 75 साल के हुए थे तब उनसे यह बातचीत की थी योगेश प्रताप शेखर ने, जो समकालीन पीढ़ी के प्रखर आलोचक और प्राध्यापक हैं। नवल की स्मृति में यह बातचीत पढ़िए- मॉडरेटर  ==================================== १. इन दिनों आप क्या लिख रहे हैं ?  कुछ उसके बारे …

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‘ग्लोबलाइजेशन’ पुस्तकों की देन है – चित्रा मुद्गल

कल से 20वां नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला शुरू होने जा रहा है। जीवन में पुस्तकों के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। इसी बात को ध्यान में रखते हुए “पुस्तक-लेखन-शिक्षा-साहित्य-पुरस्कार” आदि विषयों पर चित्रा मुद्गल जी ने अपने विचार व्यक्त किए हैं। पुस्तक मेले में उनकी नई पुस्तकों के …

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तुझसे मैं मिलता रहूँगा ख़्वाब में

कल हरदिल अज़ीज़ शायर शहरयार का इंतकाल हो गया. उनकी स्मृति को प्रणाम. प्रस्तुत है उनसे बातचीत पर आधारित यह लेख, जो अभी तक अप्रकाशित था. त्रिपुरारि की यह बातचीत शहरयार के अंदाज़, उनकी शायरी के कुछ अनजान पहलुओं से हमें रूबरू करवाती है – मॉडरेटर ======================================================   वो सुबह बहुत हसीन …

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मनोहर श्याम जोशी का अंतिम साक्षात्कार

आज लेखक मनोहर श्याम जोशी की पुण्यतिथि है. देखते ही देखते उनकी मृत्यु के पांच बरस बीत गए. विश्व कप का सेमीफ़ाइनल शुरु होने से पहले पढ़ लेते हैं उनका अंतिम साक्षात्कार जो प्रसिद्ध पत्रकार अजित राय ने किया था. १९-३-२००६ को यानी उनकी मृत्यु से केवल ११ दिनों पहले. …

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मार्केज़ के एक इंटरव्यू का हिंदी अनुवाद

गाब्रियल गार्सिया मार्केज़ के साथ पीटर एच. स्टोन की बातचीत का सम्पादित अंश   जिसका अनुवाद मैंने किया है- प्रभात रंजन. प्रश्न- टेपरिकार्डर के उपयोग के बारे में आप क्या सोचते हैं? मार्केज़- मुश्किल यह है कि जैसे ही आपको इस बात का पता चलता है कि इंटरव्यू को टेप …

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मनोहर श्याम जोशी की परम्परा और उनका विद्रोह

मनोहर श्याम जोशी के जन्मदिन पर प्रस्तुत है यह साक्षात्कार जो सन २००४  में आकाशवाणी के अभिलेखगार के लिए की गई उनकी लंबी बातचीत का अंश है. उसमें उन्होंने अपने जीवन के अनेक अनछुए पहलुओं को लेकर बात की थी। यहां एक अंश प्रस्तुत है जिसमें उन्होंने अपने जीवन और लेखन के …

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